Aatankwad Essay in Hindi for Class 5/6 in 100 words

पुराने समय में आतंकवाद से कोई परिचित नहीं था। किंतु आज के समय में इसने इतना विकराल रूप ले लिया है कि आप किसी बच्चे से भी इसके बारे में जान सकते हैं। आतंकवाद के जरिये लोग डरा-धमका कर अपनी बात पूरी कराना चाहते हैं। परन्तु बात कितनी भी उचित क्यों न हो, आतंकवाद के जरिये मनवाने का तरीका बहुत ही गलत है। आतंकवाद में कई निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है, देश की सम्पत्ति नष्ट होती है देश के विकास की गति भी धीमी पड़ती है। इसलिए धरती पर शान्तिपूर्ण जीवन बनाये रखने के लिए इस समस्या पर वैश्विक स्तर पर निराकरण करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

Aatankwad essay in hindi

Aatankwad Essay in Hindi for Class 7/8 in 200 words

ऐसा माना जाता है कि जब इंसान समस्या के निराकरण की सारी कोशिशों से थक जाता है तो वह हथियार उठाता है। लेकिन समस्या समाधान का यह तरीका बहुत ही निन्दनीय है। इस प्रकार से समस्या का निदान होना असंभव है क्योंकि यह कोई समझदारी से किया गया समाधान नहीं है। इससे थोड़े समय की ही राहत महसूस होगी किंतु आतंक दिखाने वाला व्यक्ति या देश अपने को और अधिक कमजोर करते जायेंगे। आतंकवाद का सहारा लेने वाले व्यक्ति को जन्म-मृत्यु का कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्हें लगता है कि यदि इसमें उनके प्राण भी चले जायेंगे तो यह गर्व की बात है। जबकि यह मात्र यह गलतफहमी है। यदि आपको लगता है कि आपकी बात सही है तो उसे सही मंच पर रख कर उसका हल निकाला जा सकता है।

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कई व्यक्ति या देश जो इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त हैं उन्हें अंतराष्ट्रीय स्तर पर कई मुद्दों से अलग कर दिया जाता है। इस प्रकार खुद उस देश के विकास की गति धीमी तो पड़ती ही है साथ ही उन व्यक्ति या देशों का कोई सम्मान भी नहीं करता। अतः किसी भी देश अथवा व्यक्ति को वैधानिक तरीके अपनाकर समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिये जिससे देश के नाम पर भी कोई धब्बा न लगे और मासूमों की जान-माल की भी हानि न हो।

Aatankwad Essay in Hindi for Class 9/10 in 500 words

आतंकवाद क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय हर स्तर पर फैल कर अशान्ति, असुरक्षा और भय की स्थिति उत्पन्न करता है। आतंकवाद का मुख्य उद्देश्य सामाजिक व राजनैतिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचा कर अमुक क्षेत्र/देश को अपने आगे कमजोर करना होता है। कुछ देश आतंक के साये में इस कदर जी रहे हैं कि उनके लिए क्या करें, कहाँ जायें, कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है। किस जगह आतंकवाद का साया उनके पीछे हो कुछ पता नहीं।

आतंकवादियों को लगता है कि वे आतंकवाद फैलाकर अपनी बात मनवा लेंगे लेकिन ऐसा होता नहीं, उल्टा उनका और उनके देश का नाम खराब होता है। यह समस्या कोई बड़े स्तर पर ही नहीं है। छोटे-छोटे राजनैतिक दल भी कई बार अपनी बात मनवाने के लिए अपने ही देश में आतंक फैलाते हैं। युवा शक्ति को गलत राह दिखाकर, उन्हें लालच देकर आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न करके लोग अपना मतलब सिद्ध करते हैं। इसमें संलग्न होने वाले लोगों का फायदा तो कुछ नहीं बल्कि नुकसान ही होता है।

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कुछ मासूम लोग इस आतंकवाद की चक्की में गेहूँ के साथ घुन की तरह पिस जाते हैं। कई बार आतंकवादी डराने-धमकाने के लिए बड़े-बड़े मॉल, बाजार, मेलों, त्यौहारों पर, सिनेमाघरों, यातायात के साधनों व रिहाइशी इलाकों में विस्फोट कर देते हैं जिसमें कई लोग व सगे-सम्बन्धी तथा मित्रगण मर जाते हैं। अपने लोगों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए वे भी बदला लेते हैं और आतंकवादी गतिविधियों में और अधिक बढ़ावा होता है।

बहुत से लोग जो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं वे राजनैतिक दबाव के कारण बच जाते हैं लेकिन इससे मासूम लोगों में रोष उत्पन्न होता है और अराजकता फैलती है।

किसी भी समाज एवं देश को चाहिये कि वे ऐसे लोगों का बिलकुल भी समर्थन न करें। किसी की बात कितनी भी जायज हो लेकिन उनका समर्थन कर हम अपने ही लोगों के जान-माल को खतरे में डाल रहे है। शासन स्तर पर भी सरकार को चाहिये देश में सब लोगों को एक समान अधिकार प्राप्त हों और सबको संरक्षण प्राप्त हो। मात्र कुछ खास लोगों के लिए सुरक्षा एवं संरक्षण देकर देश में शान्ति नहीं बल्कि और अधिक अशान्ति फैलेगी। यदि कोई भी व्यक्ति या वर्ग किसी मुद्दे से परेशान है तो उसे सुना जाये जिससे वह कुंठित हो कर अपनी बात मनवाने के लिए गलत राह न पकड़े। आतंकवाद की समस्या से बचने के लिए हमें अपने नौ-निहालों को धर्म का वास्तविक अर्थ सही प्रकार से समाझाना होगा। मात्र जातिवाद से ऊपर उठकर इंसानियत धर्म का पाठ पढ़ाना होगा। जिससे यदि कोई उन्हें बहकाने की कोशिश करे भी तो वे उसकी बातों से डगमगायें नहीं।

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अधिकतर आतंकवादी वे ही बनते हैं जिन्हें शिक्षा का अवसर नहीं मिल पाता क्योंकि शिक्षित व्यक्ति अपने भले-बुरे की समझ बेहतर रख सकता है और समझ सकता है कि मुझे मात्र मोहरा बनाया जा रहा है। कई बार लोग बेरोजगारी में भी पैसे के नाम पर लालच देकर युवा पीढ़ी को आतंकवाद में शामिल कर लेते हैं लेकिन यदि हमारी युवा पीढ़ी पढ़-लिख कर जागरुक होगी तो वह इस गलत कार्य में शामिल नहीं होगी।

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सरिता महर
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