बच्चों की कहानी – कटहल तो नहीं खाया Bachchon ki kahani – kathal to nahin khaya

Bachchon ki kahani kathal to nahin khaya

आज से कई सौ वर्ष पहले की बात है, एक व्यापारी किसी अन्य देश से पहली बार बंगलादेश में व्यापार करने आया और अपने देश से लाया हुआ सामान बाजार में बेचने निकला। दोपहर हुई, तो उसे भूख लगी। सामने फलों की एक दुकान थी। उसने सोचा, चलो आज कुछ फल ही खाए जाएं।

Bachchon ki kahani kathal to nahin khayaफलों की दुकान में उसे कटहल लटका हुआ नजर आया। वह फल उसके लिए बिल्कुल नया था। वह बड़ी देर तक विस्मय से उसे ताकता रहा और जब उसने उसे सूंघा तो मजा ही आ गया। उसकी सुगंध इतनी अच्छी थी कि उसके मुंह में पानी भर आया, किंतु उसने सोचा कि जब फल इतना बड़ा है, तो मूल्य भी उतना ही अधिक होगा। थोड़ी देर उसने सोचा। जब मन न माना, तो साहस बटोरकर उसने दुकारनदार से उसका मूल्य पूछा।

दुकानदार ने कहा, ”छह आने।“

व्यापारी को अपने कानों पर विश्वास नहीं आया। उसने सोचा दोबारा पूछने पर दुकानदार कहीं अधिक न बता दे। झट छः आने निकालकर दुकानदार के हाथ पर रखे और कटहल कंधे पर रखकर यह जा और वह जा।

व्यापारी बार बार कटहल को सूंघता और सोचता, कितना सस्ता सौदा किया है उसने और फिर भाग भागकर रास्ता तय करने लगा। आखिर उससे धीरज नहीं बंधा और वह सड़क के किनारे एक बाग में बैठकर पूरा का पूरा कटहल हड़प कर गया। इतना बड़ा फल खाकर उसका पेट फूलकर गुब्बारा हो गया।

कटहल का रस उसकी हाथों, चेहरे, दाढ़ी और कपड़ों पर जम गया। उसने सोचा, नदी पर जाकर पानी से धो लूंगा, किंतु पानी से धोने पर वह और भी सख्त हो गया। अब व्यापारी की दशा अजीब थी। कपड़ों पर बड़े बड़े धब्बे नजर आ रहे थे और दाढ़ी और मूंछों के बाल एक दूसरे से बुरी तरह चिपक गए थे।

व्यापारी को बड़ी उलझन हो रही थी। जब सादे पानी से रस न छूटा, तो उसने साबुन मला, किंतु उसका प्रभाव यह हुआ कि रस और सख्त हो गया। मिटृी, धूल और सूख पत्ते उड़ उड़कर उसके बालों और कपड़ों पर चिपक गए। जो उसे देखता, उसकी दूर्दशा पर हंसता।

जैसे जैसे हवा लगती, रस खुश्क होता गया। व्यापारी के चेहरे और हाथों की खाल अकड़ने लगती और दाढ़ी मूंछों के बाल सख्त होने लगते। इससे उसे बड़ा कष्ट होता। इसी परेशानी में रात हो गई। उसने सोना चाहा, किंतु कष्ट के कारण उसे नींद न आई।

प्रातः काल वह उठा, तो उसका तकिया उसके सिर से चिपका हुआ था, उसने तकिये को छुड़ाना चाहा, तो सिर के कुछ बाल उखड़ गए। इससे उसे बड़ी पीड़ा हुई।

कल का दिन तो बरबाद हो ही चुका था। उसने सोचा, आज का दिन क्यों बरबाद करे। वह अपनी इस अवस्था में बाजार चला गया, ताकि अपना माल बेचकर नया माल खरीदे और अपने देश वापस जाने की तैयारी करे।

जिस दुकान पर वह लेन देन के लिए बैठता, उसके हाथों, बालों और कपड़ों से कुछ न कुछ चिपक गया। लोग उसे चोर समझकर बुरा भला कहते। इस बात से वह बहुत लज्जित होता।

इसी प्रकार वह एक दुकान पर अपना माल बेचने पहुंचा। वह दुकान हीरे जवाहरात की थी। व्यापारी ने अपने तौर पर बड़ी सावधानी बरती, किंतु फिर भी एक हीरा उसके हाथ से चिपक गया। दुकानदार ने उसे उठाईगीर समझकर मारना आरंभ कर दिया।

किंतु यह क्या? दुकानदार ने जैसे ही चपत मारी, उसका हाथ व्यापारी के गाल से चिपककर रह गया। दूसरे हाथ से उसने व्यापारी की गर्दन पकड़ी, तो वह भी गर्दन से चिपक गया।

अब दुकानदार को पता चला कि व्यापारी चोर नहीं, बल्कि मुसीबत का मारा है। व्यापारी ने रो रोकर सारी व्यस्था कह सुनाई।

दुकानदार ने कहा, ”अजनबी, तुमने बड़ी गलती की। जिस चीज के बारे में तुम जानते नहीं थे उसका उपयोग करने से पहले उसके बारे में किसी से पूछ तो लेते। तुमने जल्दबाजी से काम लिया।“

व्यापारी ने उत्तर दिया, ”बंगाली बाबू, मैंने अपनी गलती की सजा भुगत ली। अब खुदा के लिए मुझे इस मुसीबत से छुटकारा हासिल करने की कोई तरकीब बताओ।“

दुकानदार ने कहा, ”एक ही तरकीब है और वह यह कि अपने बाल मुंडवा दो और यह कपड़े उतारकर दूसरे कपड़े पहल लो।“

बेचारा व्यापारी नाई के पास गया और अपने सारे बाल मुंडवा दिए। इस प्रकार उसके प्राण इस संकट से छूटे। उसके बाद जब भी उसकी मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से होती, जिसके बाल मुंडे हुए होते, तो वह उसके कान के पास मुंह ले जाकर पूछता, ”तुमने कटहल तो नहीं खाया था?“