mere allah khatare mein tere bhagvan khatre mein poem by mahesh katare sugam

मेरे अल्लाह खतरे में तेरे भगवान खतरे में

ग़ज़ल हमारी हर समय रहने लगी है जान खतरे में कभी दीवाली खतरे में कभी रमज़ान खतरे में किसी के ऐतराज़ों में उलझकर रह गयी श्रद्धा कहीं पर...
इमरान ख़ान

मेरी दो ग़ज़लें

नदिया मुहब्बतों की उमड़ती है मेरी माँ नदिया मुहब्बतों की उमड़ती है मेरी माँ, लेकर मुझे जहान में आई है मेरी माँ। दुनिया के वास्ते भले शोला...

Holi Special