दाढ़ी खींचने की सजा - अकबर बीरबल की कहानियां

दाढ़ी खींचने की सजा – अकबर बीरबल की कहानियां

एक दिन, बादशाह अकबर (Akbar) बहुत विचारशील मुद्रा में दरबार में आए।  उन्होंने दरबार में उपस्थित अपने सभी मंत्रियों की तरफ देखा और कहा,...
हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई

हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई

हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई हिंदुस्तान के हिस्से में तो महज़ गुलामी है आई, अपने हों गद्दार तो कैसे चमकेगी किस्मत भाई. गोरी...
mere allah khatare mein tere bhagvan khatre mein poem by mahesh katare sugam

मेरे अल्लाह खतरे में तेरे भगवान खतरे में

ग़ज़ल हमारी हर समय रहने लगी है जान खतरे में कभी दीवाली खतरे में कभी रमज़ान खतरे में किसी के ऐतराज़ों में उलझकर रह गयी श्रद्धा कहीं पर...
चाँद खुदकुशी

चाँद ख़ुदकुशी करने निकला है

आज मैं कोई कविता नहीं लिखूंगा कोई कहानी नहीं सुनाऊंगा बस बैठ कर इन्तेजार करुंगा तुम्हें पता ना हो शायद कि सायों की भी रूह होती है जो धूप में पिघल...
प्रीति तिवारी

फिर उड़ने की तैयारी है

घर चौबारे की क्यारी में, हँसती है चारदीवारी में महके फूलों को साथ लिए शाखें हैं पहरेदारी में. दूर पहाड़ों से उठती है धुंध की चादर,...
हसरतों का कोई क्या करे

हसरतों का कोई क्या करे

हसरतें हसरतों का कोई क्या करे ना पूछती हैं ना बताती हैं बस दरवाजे पर खडी हो कर चुपचाप मुस्कुराती हैं अब हर चाय की प्याली को तेरा साथ चाहिए तेरी...
राजीव ध्यानी

उदास होने का समय

ज़्यादातर उदासी खर्च हो चुकी होती है चालीस की उम्र तक बची- खुची में भी पुरानापन आ जाता है जैसे पुरानी किताबों के पन्नों की रंगत या पुराने नोटों...
भुवनेश कुमार

श्री राम तुम वन में भले

श्री राम तुम वन में भले, घर तो खंडहर हो चुके मन भी मलिन हो गये अब वहाँ कैसे रहोगे हे राम तुम वन में भले।। जो भी पाना...