बच्चों को अजनबियों से शोषण के खतरे के बारे में बताना जरुरी है मगर कैसे बताएं?

हमारे बचपन में हमें अपनी सुरक्षा का एक बड़ा सीधा सा नियम बताया जाता था – “अजनबियों से बात नहीं करनी चाहिए”. लेकिन आज के बदलते परिवेश में बच्चों को अजनबियों से उनकी सुरक्षा के लिए सिर्फ इतना ही बताना काफी नहीं है.

ऐसे सभी व्यक्तियों को जिनसे हमारा बच्चा परिचित नहीं है, बुरा अजनबी करार दे देने से वास्तविक खतरे के समय बच्चे के मन में दुविधा आ सकती है कि वह किससे मदद मांगे और किससे ना मांगे?

जिन बच्चों को बचपन में ही उनकी सुरक्षा के बेसिक नियम बताये जाते हैं जैसे कि अजनबियों से कैसे बात करनी है, या कब नहीं करनी है, ऐसे बच्चे किसी अजनबी से खतरे की स्थिति का बेहतर तरीके से सामना कर पाते हैं.

आइये हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बताते हैं जिन्हें बच्चों से शेयर कर आप उन्हें अजनबियों से खतरों के बारे में आगाह भी कर सकते हैं और ऐसे मौके पर क्या करना है, यह शिक्षा भी दे सकते हैं:

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अजनबी कौन है, साफ़ साफ़ बताइये:

अक्सर छोटे बच्चों की कल्पना में बुरे अजनबी का मतलब उनकी कपोल कथाओं की तरह एक अँधेरे कोने में छुपा नकाबपोश होता है जो मौका पा कर उनपर हमला कर सकता है.

उन्हें बताइये कि उन पर गलत निगाह रखने वाला अजनबी दिखने में एकदम आम आदमी-औरत की ही तरह दिखने वाला हो सकता है. उन्हें समझाइये अजनबी का अर्थ है “ऐसा कोई भी महिला या पुरुष, जिसे बच्चा नहीं जानता”.

सभी अजनबी बुरे नहीं होते:

बच्चों को बताइये कि सभी अपरिचित व्यक्ति गलत नहीं होते. कुछ सेफ अजनबी भी होते हैं जैसे कि पुलिसमैन, फायरमैन, पोस्टमैन, स्टोर क्लर्क, स्कूल टीचर, अपने बच्चों के साथ कोई मम्मी आदि. उन्हें बताइये कि जरुरत पड़ने पर ऐसे अजनबियों से सहायता मांगी जा सकती है.

असुरक्षित जगहों की पहचान कराइये:

बच्चों को अपने साथ लेजाकर उनके लिए असुरक्षित जगहों की पहचान कराइये जहाँ पर कोई अजनबी उन्हें नुक्सान पहुंचा सकता है जैसे – पार्किंग लॉट, पार्क के कोने, घने पेड़ों वाली जगह, स्कूल बंद होने के बाद अकेले क्लास में रुकना, घरों के पीछे की संकरी और अँधेरी गलियां आदि.

बड़े लोग बच्चों से हेल्प नहीं मांगते :

उन्हें बताइये कि बड़े लोग हमेशा बड़े लोगों से ही हेल्प मांगते हैं. अगर कोई कार उनके पास आकर रुके और उसमें बैठा व्यक्ति किसी का पता पूछे तो दूर हट जाइये. अगर कोई आदमी पार्क में अपने कुत्ते को ढूंढ़ने में मदद मांगे तो मना कर दें.

विशेषकर अगर ऐसा करने में बच्चों को पैसे या चॉकलेट का लालच दें तो तुरंत वहां से दूर चले जाएँ.

“ना’ कहना उनका अधिकार है और ये गलत नहीं है :

शुरू से ही बच्चों को सिखाया जाता है कि वे बड़े लोगों से आदर और विनम्रता से बात करें. ऐसे में वे किसी अजनबी को साफ ना कहने में हिचक सकते हैं. इसलिए उन्हें बताइये कि एकदम अनजान आदमी या औरत को ना कहने में कुछ भी गलत नहीं है.

बच्चों को स्थिति को कण्ट्रोल करना सिखाइये:

“ऐसे जगह पर बैठो जहां मैं तुम्हे देख पाऊं” कहने के बजाय पूछिए कि “क्या तुम मुझे देख पा रहे हो”? ऐसा करने से बच्चे में अपनी सुरक्षा खुद करने का भाव पैदा होता है. यह बात दीगर है कि आप उन पर नजर बनाये रखिये और उनके भरोसे उन्हें मत छोड़ दीजिये.

अपनी फैमली का सीक्रेट कोड बनाइये:

अपने परिवार में एक ऐसा सीक्रेट कोड बनाइये जिसे और कोई न जनता हो. यह सरल सा होना चाहिए जैसे” अक्कड़ बक्कड़”. बच्चों को बताइये कि कोई अजनबी अगर स्कूल से उन्हें घर ले जाना चाहे या फिर अचानक कोई कहे कि आपकी मम्मी का एक्सीडेंट हो गया और वह उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए आया है तो उससे फॅमिली का सुरक्षा कोड पूछे. अगर वह नहीं बता पता है तो जोर जोर से चिल्ला कर अपने आसपास के लोगों को बताएं कि वह व्यक्ति उन्हें जबरदस्ती कहीं ले जाना चाहता है.

बच्चे को दूसरे बच्चों के साथ खेलने के लिए उत्साहित करें:

अकेला बच्चा किसी बुरे इरादों वाले अजनबी के लिए एक आसान शिकार होता है. संख्या ही ताकत है. ग्रुप में खेलने वाले बच्चों के साथ जल्दी से कोई गलत हरकत नहीं कर पायेगा.

सेफ जगहों और व्यक्तियों के बारे में बताइये:

बच्चों के अपने ऐसे मित्रों के घर के बारे में बताइये जहाँ वे इमरजेंसी में जा सकते हैं या उन्हें फ़ोन कर सकते हैं.

बच्चे को बताइये कि माँ-पिता को सब कुछ बताना है:

बच्चे को विश्वास दिलाइये कि उससे कुछ गलत भी हो जाये या कोई भी उनके साथ कुछ गलत हरकत करे तो भी आप को सब कुछ बताएं और आप इसके बाद भी उनसे उतना ही प्यार करते रहेंगे जितना पहले करते रहे हैं.

प्राइवेट पार्ट्स के बारे में बताएं:

खासकर छोटे बच्चों को उनके प्राइवेट पार्ट्स के बारे में सही जानकारी दें. उनके सही नाम बताएं. किसी अजनबी द्वारा गलत तरह से छुए जाने पर वे आपको खुल कर सही सही बता पाएंगे कि उनके साथ क्या गलत हरकत हुई है.

बच्चों के प्राइवेट पार्ट्स को हर कोई नहीं छू सकता:

अपने बच्चों को बताएं कि उनके प्राइवेट पार्ट्स को माँ, पापा या दादा/दादी/नाना/नानी के सिवा और “कोई नहीं छू सकता” और यहाँ पर “कोई नहीं का मतलब साफ-साफ कोई नहीं” है.

अजनबियों से खतरे के बारे में अक्सर बताये:

अजनबियों से खतरे के बारे में एक या दो बार बताना काफी नहीं है. जब भी मौका मिले या ऐसी कोई स्थिति सामने दिखाई दे जिसकी मदद से आप बच्चे को इस खतरे के बारे में बता सकें, अवश्य बताएं

आशा है इन उपायों की मदद से आप अपने बच्चों को किसी अजनबी के हाथों बुरे अनुभव का शिकार बनने से रोक सकते हैं.