ऐसे कर रहे हैं लोग अपने ‘काले धन’ को ‘सफ़ेद’ – डिमोनेटाइजेशन ट्रिक्स

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8 नवम्बर को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन में काला धन ख़त्म करने के लिए डीमोनेटाइजेशन की ऐतिहासिक घोषणा के बाद से सारे देश में अफरातफरी का माहौल है. आम आदमी बैंक के सामने कतारों में खड़ा है और डेली लिमिट के हिसाब से पैसे निकाल पाने की उम्मीद कर रहा है. साधारण नागरिक कैश की तंगी से जूझ रहा है. ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने काले धन को नयी करेंसी में बदलने के नए नए जुगाड़ निकाल लिए हैं. यही कारण है कि सरकार के नयी करेंसी उपलब्ध कराने के तमाम इंतजामात के बावजूद आम आदमी तक जरुरत भर का कैश नहीं पहुँच पा रहा है. आइये, जानते हैं कौन सी हैं वो ट्रिक्स जिनसे बेईमान लोग अपने काले धन को कर रहे हैं सफ़ेद (how to convert black money to white money in Hindi):

demonetization-tricks-to-convert-old-500-and-1000-black-money-new-currency1. बिहार से सटा हुआ है नेपाल का एक कस्बा बिराटनगर जहाँ पर 8 नवम्बर की शाम तक 1 लाख रुपये के नोटों के बदले 1.6 लाख नेपाली रुपये मिल रहे थे. लेकिन रात होते होते ये रेट गिर गया और अब 1 लाख भारतीय रुपयों (500 और 1000) के बदले सिर्फ 1 लाख नेपाली रुपये मिल रहे थे. यानी करीब 40% का नुक्सान हो रहा था. फिर धीरे धीरे रेट कुछ ठीक हुआ और 1 लाख भारतीय रुपये के बदले 1.4 लाख नेपाली रुपये का रेट हो गया यानी 30 % का कमीशन 500 और 1000 के नोट बदलने के लिए जो इस वक़्त तक बाकी तरीकों से 500 और 1000 के नोट बदली का स्टैण्डर्ड रेट बन चुका था.

29 नवम्बर को भारत सरकार की अघोषित आय को 50% टैक्स देकर बदलने की योजना आने के बाद ये रेट करीब 1.25 लाख नेपाली रुपये हो गया.

अभी तक भी ट्रक ड्राइवर अपना आधा मेहनताना पुराने नोटों में और आधा नए नोटों में ले रहे हैं. काले धन को सफ़ेद करने का ये एक नायाब तरीका है जिससे करोड़ों रुपयों का काला धन नेपाली करेंसी के रास्ते सफ़ेद किया जा चुका है. इससे पता चलता है पुराने करेंसी को नए नोटों में बदलने वाले गैंग खुलकर काम कर रहे हैं. नेपाली मनी एक्सचेंजर खुल कर यह काम कर रहे हैं इससे साफ़ है कि वो आश्वस्त हैं भारत में बैठे उनके आका भारत सरकार की आँखों में धूल झोंक कर पुरानी करेंसी को नयी करेंसी में बदल पाने में कामयाब हो जायेंगे.

ये तो रही एक बानगी! अब जानिये और भी तरीकों के बारे में जो भारत के अंदर ही पुराने बंद हो चुके नोटों को नए नोटों में बदलने के लिए इस्तेमाल किये जा रहे हैं:

2. मल्टिपल खातों का इस्तेमाल (tricks people are using how to convert black money to white money in Hindi):

भारत में कुछ ब्लैक मनी का काम करने वाले एजेंट्स पहले से यह काम करते आ रहे हैं जिसमें अपनी जान-पहचान के लोगों के नाम पर खाते खोल कर वो उसमें अमीरों का काला धन छुपा कर रखते हैं. बहुत से ऐसे एजेंट्स हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वो ऐसे 500 से भी ज्यादा लोगों के खाते चलाते हैं. हर साल ये एजेंट्स इन लोगों के नाम से इनकम टैक्स रिटर्न भी फ़ाइल करते हैं और खातों को लेजिटिमेट दिखाने के लिए 10 रुपये से लेकर 500 रुपये तक का टैक्स भी भरते हैं.

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एजेंट्स इन खातों के जरिये इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स यानी आरटीजीएस पेमेंट्स भी करते हैं. इन आरटीजीएस पेमेंट्स के थ्रू ही वो मैजिक होता है जिससे पुराने नोटों को नए नोटों में बदलने का काला कारोबार होता है. कैसे?

मान लीजिये कि एक आदमी “X” एजेंट “Y” के पास दस लाख के पुराने नोट बदलवाने जाता है. एजेंट “Y” के पास ऐसे ही ढेरों बैंक एकाउंट्स हैं जिन्हें वो ऑपरेट करता है. वो 2 लाख रुपये के पुराने नोट “Z1” के अकाउंट में जमा कर देता है. क्योंकि 2 लाख रुपये 2.5 लाख रुपये की लिमिट से कम हैं इसलिए इस डिपॉजिट पर कोई सवाल नहीं उठाया जायेगा.

अब एजेंट यही 2 लाख रुपये आरटीजीएस के थ्रू “Z2″ के अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है और साथ ही “Z2″ के अकाउंट में 2 लाख रुपये नकद भी पुराने नोटों में ही जमा कर देता है. इस तरह “Z2″ के अकाउंट में 4 लाख रुपये हो जाते हैं जिसे एजेंट “Z3” के अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है साथ ही 2 लाख रुपये कैश भी “Z3” के अकाउंट में जमा कर दिए जाते हैं जो कुल 6 लाख हो जाते हैं. ये 6 लाख रुपये “Z4” के अकाउंट में ट्रांसफर कर 2 लाख रुपये फिर से कैश जमा कर दिए जाते हैं जो अब 8 लाख रुपये हो गए हैं. ये 8 लाख रुपये “Z5” के अकाउंट में आरटीजीएस से ट्रांसफर करने के बाद 2 लाख पुराने नोटों से कैश जमा कर दिए जाते हैं. इस तरह “Z5” के पास अब लीगल 10 लाख रुपये हो गए हैं जिन पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता.

अब “Z5” ये 10 लाख रुपये “X” के अकाउंट में आरटीजीएस ट्रांसफर कर देता है और दिखता है की उसने “X” को ये 10 लाख रुपये का लोन दिया है.

आप पूछेंगे कि २ लाख के आरटीजीएस पेमेंट पर किसी का ध्यान क्यों नहीं जाता. दरअसल २ लाख रुपये आरटीजीएस ट्रांसफर के हिसाब से बहुत छोटी राशि है इसलिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर इस पर पड़ना बहुत मुश्किल है.

करेंसी निकालने की लिमिट ख़त्म होने के बाद “X” 10 लाख रुपये निकाल सकता है. लीजिये, हो गए 10 लाख रुपये के पुराने नोट काले से सफ़ेद. और क्योंकि एजेंट्स जिन एकाउंट्स को ऑपरेट करते हैं उन्हें अतीत में इनकम टैक्स से कोई नोटिस नहीं मिला होता. इसलिए ऐसे एकाउंट्स को इस्तेमाल करना बड़ा मुफीद रहता है.

एजेंट “Y” को क्या मिलेगा? 30% का कमीशन. लेकिन “X” के 7 लाख अभी भी काला धन ही कहलायेंगे यानी ब्लैक मनी ख़त्म नहीं हुई उसने केवल चोला बदल लिया है पुराने से नए नोटों का.

3. ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी (tricks people are using how to convert black money to white money in Hindi):

मान लीजिये कि एक बिजिनेसमैन “A” का एक चालू खाता है (CURRENT  ACCOUNT)  का जिसमें उसे 60 लाख रुपये की ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी है. इस ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के लिए उसने बैंक को अपना घर कोलेटरल के तौर पर रखा हुआ है. बैंक उसके द्वारा ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी से निकाली गयी राशि पर ब्याज लेता है. अब ऐसा समझिये कि “A”  का ज्यादातर कारोबार कैश में है और 8 नवंबर की डिमोनेटाइजेशन की तारीख़ तक उसने 50 लाख रुपये का ओवरड्राफ्ट लिया हुआ है. यह 50 लाख रुपये की ओवरड्राफ्ट राशि बिजिनेसमैन की अकाउंट बुक में “कैश इन हैण्ड’ के तौर पर दिखाई जाएगी. इस 50 लाख रुपये की राशि का वह जो चाहे इस्तेमाल कर सकता है जैसे कि अपने सैर-सपाटे पर या  अपने घर में एक और फ्लोर का निर्माण करना. बैंक को इसलिए कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उसके पास 50 लाख के बदले बिजिनेसमैन का घर गिरवी रखा हुआ है.

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बिजिनेसमैन “A” एक बिजिनेसमैन “B” को जनता है जिसके पास 50 लाख रुपये के पुराने करेंसी नोट हैं. बिजिनेसमैन “A” बिजिनेसमैन “B” की मदद कर सकता है जिसके लिए वह 30% का कमीशन लेगा. वो पुरानी करेंसी के 50 लाख रुपये अपने करेंट अकाउंट में जमा कर देगा जिसे वह अपने बहुत से ग्राहकों द्वारा किये गए पेमेंट के रूप में दिखा सकता है जिन्होंने वो पुराने करेंसी नोट खुद अपने ग्राहकों से पेमेंट में रिसीव किये हैं. ऐसा करने के लिए उसे कुछ फर्जी बिलों की जरूरत पड़ेगी जिनकी भारत में कोई कमी नहीं है क्योंकि भारत में ग्राहकों द्वारा बिलों की मांग नहीं की जाती. ऐसे में कोई भी दुकानदार जरूरत पड़ने पर ऐसे बिल फर्जी ग्राहकों के नाम पर बना सकता है. बिजिनेसमैन को “A” को बाजार से ऐसे बिलों का जुगाड़ करना है जिनके सहारे बुक्स को अपने हिसाब से बदल सकता है.

जनवरी के बाद फिर से बिजिनेसमैन “A” अपनी ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी का इस्तेमाल कर सकता है. वो अपने अकाउंट से फिर से  50 लाख निकाल कर 30% यानी रुपये 15 लाख का कमीशन काट कर 35 लाख रुपये बिजिनेसमैन “B” को दे देगा.

लेकिन ये 35 लाख अभी भी ब्लैक मनी ही रहेगी.

4. आप किस्मत वाले हैं और आपका कोई दोस्त बैंक मेनेजर है!

पहले 14 दिनों तक सरकार ने अपनी आइडेंटिटी जमा कर लोगों को बैंकों से पुराने नोट बदलने की छूट दी थी. यानी कुछ दिनों बाद बैंक मेनेजर के पास ऐसे हजारों आइडेंटिटी प्रूफ जमा हो गए थे जिन्हें दुबारा कॉपी कर के वो आपके पुराने नोट एक्सचेंज कर सकता था. मान लीजिये एक बैंक एम्प्लोयी के पास ऐसे 500 आइडेंटिटी कागजात हैं तो वो 500X4000 यानी 20 लाख रुपये के पुराने नोटों को नयी करेंसी में बदल सकता है. अब वह बैंक एम्प्लोयी अगर आपका पडोसी या आपका दोस्त है और आपके पास है पुराने नोटों में 20 लाख रुपये की ब्लैक मनी तो हो गयी आपकी बल्ले-बल्ले. बस बैंक एम्प्लोयी लेगा आपसे 30% का कमीशन और आपके पास रह जाएगी रुपये 20 लाख की – जी हाँ – ब्लैक मनी !

लेकिन ऐसा भी संभव है कि बैंक एम्प्लोयी जानबूझ कर ऐसा नहीं करना चाहता लेकिन उसकी बदकिस्मती से पोस्टिंग हो गयी है यूपी-बिहार  के किसी देहाती इलाके या छोटे कसबे में जहां पर किसी गुंडे-बाहुबली “A” की तूती बोलती है. और एक शाम को “A” इस बेचारे बैंक एम्प्लोयी को घर बुला कर 50 लाख रुपये के पुराने नोटों का बैग पकड़ा कर हुक्म देता है कि अगले हफ्ते तक ये रुपये नए नोटों की शक्ल में उसके पास पहुँचा दे वर्ना .. खैर छोडो, बस पहुँचा दे, और हाँ, 10 % कमीशन रख ले.

बताइये बैंक एम्प्लोयी क्या करे? शहीद हो जाये डिमोनेटाइजेशन के नाम पे (बिना कम्पेन्शेशन और वीरता चक्र मैडल के) या 10% रख ले?

5. किसान क्रेडिट कार्ड

किसान क्रेडिट कार्ड सरकारी बैंकों द्वारा चलाई जा रही एक किसान क्रेडिट स्कीम हैं जिसमें किसान अपने जमीन के रकबे और फसल के आधार पर बैंकों से एक सीमा तक लोन ले सकते हैं.

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मान लीजिये कि एक किसान के पास इस किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 5 लाख रुपये की लोन लेने की सीमा है. और बैंक मेनेजर ऐसे 10 किसानों को जनता है. अब वह बैंक मैनेजर इन 10 किसानों को एक ऐसे अमीर बिजिनेसमैन से मिलवा देता है जो उनका नियमित ग्राहक है. ऐसे बिजिनेसमैन के पास 50 लाख रुपये के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट हैं. वह इन किसानों के क्रेडिट कार्ड से लिए गए लोन के वापसी के रूप में हर किसान के खाते में 5 लाख रुपये जमा करवा देता है. क्योंकि खेती की आय पर टैक्स नहीं है तो कोई सवाल नहीं पूछा जायेगा और जनवरी के बाद वह किसान अपने खाते में किसान क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर फिर से 5 लाख रुपये निकल कर अपना कमीशन काट कर बैंक मैनेजर को दे देगा जो फिर से अपना कमीशन काट कर बिजिनेसमैन को दे देगा. लीजये, हो गए बिजिनेसमैन के पुराने 500 और 1000 के नोट नयी करेंसी में तब्दील 30% कमीशन के बाद.

खास बात यह कि इस बार बैंकों के ऐसे हजारों किसान क्रेडिट कार्ड खाते नॉन-परफार्मिंग असेट से बाहर निकल गए हैं क्योंकि इन किसान क्रेडिट कार्ड्स पर ली गयी सालों पुरानी लोन की रकम की भी अदायगी हो गयी है.
यानी कह सकते हैं कि डिमोनेटाइजेशन से बैंकों और किसानों का फायदा हुआ है.

6. खेती की जमीन की खरीद और बिक्री

मान लीजिये किसान “A” किसान “B” से खेती की जमीन 20 लाख रुपये में खरीदता है जिसकी सर्किल रेट 5 लाख है. वह 5 का भुगतान चेक से और बाकी का कैश में पुराने नोटों में करता है. किसान “B” रुपये ५ लाख का चेक और बाकी 15 लाख कैश, दोनों को अपने अकाउंट में जमा कर देता है. खेती की इनकम पर किसान को कोई टैक्स नहीं लगता. अब जनवरी के बाद वह इस जमीन को वापस “B” को बेच देता है जो फिर से 5 लाख का चेक और 15 लाख कैश का पेमेंट कर देता है लेकिन नयी करेंसी में.

हो गया 20 लाख का काला धन सफ़ेद. खर्च आएगा 2 बार की स्टाम्प ड्यूटी और 30 % कमीशन, जो किसान “बी’ को मिलेगा.

तो फिर क्या होगा इस डिमोनेटाइजेशन स्कीम का?

जिस आसानी से लोग पुराने नोटों को नए में बदलवा रहे हैं उससे पता चल रहा है कि क्यों इतनी जल्दी 10 लाख रुपये से ज्यादा के पुराने 500  और 1000  रुपये के नोट बैंकों में जमा हो गए हैं. और काला धन पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि बड़ी मछलियों ने अभी तक अपने पुराने नोटों को ठिकाने लगाना शुरू नहीं किया है. वे सरकार के कन्फ्यूजन का फायदा उठाना चाहते हैं जो रोज सरकार के बदलते हुए नियमों से पता चल भी रहा है. इस तरह से मान कर चलिए कि बचे हुए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट भी जल्द ही बैंकों में जमा हो जायेंगे. सरकार इस सारी एक्सरसाइज से कुछ खास काला धन बाहर निकलवा पायेगी, इसमें शक है.

फिलहाल, इंतज़ार करने के सिवा और कोई ऑप्शन नहीं है.

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(source : Ajaz Ashraf’s article – yahoo news)

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