जीव हत्या खेल नहीं पाप है – शिक्षाप्रद कहानी

किसी गांव में कुछ शरारती लड़के रहते थे। एक दिन के गांव के एक तालाब में मेंढ़कों पर पत्थर फेंक कर खेल का आनन्द ले रहे थे। जैसे ही मेंढ़क पानी की सतह पर आते, लड़के उनको पत्थरों से मारते। मेंढ़कों को घायल होकर मरता देखकर उन्हें बहुत प्रसन्नता होती और वे तालियां बजाते।

जीव हत्या खेल नहीं पाप है

शिक्षाप्रद कहानियाँ

बहुत बड़ी संख्या में मेंढ़कों को घायल होते और मरते देखकर मेंढ़कों का सरदार परेशान हो गया। उसने हिम्मत जुटाई और तालाब से बाहर आकर बच्चों से बोला- ”बच्चों, तुम क्या कोई दूसरा खेल नहीं खेल सकते?“ शायद तुम लोगों को हमारी परेशानी की जानकारी नहीं है। जिस काम को तुम खेल समझते हो वह हमारे लिए मृत्यु है। इसलिए अच्छे बच्चों, कोई और खेल खेलो।

शिक्षा – जीव हत्या खेल नहीं पाप है, इससे बचना चाहिए।