नई दिल्ली: 8 नवम्बर को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 500  और 1000 रुपये के नोटों को अवैध मुद्रा घोषित करते हुए जनता को 30  दिसंबर तक पुराने नोट बैंकों में जमा करने का अवसर दिया था. आशा जताई जा रही थी कि मोदी के विमुद्रीकरण के इस ऐतिहासिक कदम से बड़ी मात्रा में काला धन बाहर आएगा लेकिन जैसे जैसे 30  दिसंबर की यह समय सीमा पास आ रही है, ऐसा महसूस हो रहा है कि अर्थव्यवस्था में मौजूद लगभग सार पुरानी 500  और 1000 रुपये की करेंसी वापस बाणों में जमा हो जायेगी. नोटबंदी पर कालाधन को रोक पाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर असफल होने के आरोप लगने लगे हैं. इस हालात में नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी पर एक नया दांव चला है और लगता है इस खेल की आखिरी बाज़ी अब मोदी सरकार के ही हाथ लगेगी. दरअसल सरकार ने आरबीआई के माध्यम से एक नया मास्टर स्ट्रोक खेला है.

RBI orders banks to arrange cctv footage demonetisation currency exchangeनोटबंदी के लागू करने के साथ ही जहां सरकार को उम्मीद थी कि करीब 70 फीसदी पैसा वापस बैंकों में जमा हो जाएगा और बाकी का कालाधन होने की वजह से सामने नहीं आएगा वहीं, आरबीआई ने जो ताजा आंकड़े जारी किए हैं, उनके अनुसार अभी तक अर्थव्यवस्था में मौजूद कुछ नकद का 80 फीसदी बैंकों में जमा हो चुका है.

बैंकों में इतनी बड़ी तादाद में पुराने 1000 और  500  के नोट जमा होने के बाद सरकार के माथे पर शिकन आने लगी और सरकार को भी यही लगने लगा कि इस मुद्दे पर सरकार का दांव कहीं उल्टा तो नहीं पड़ा गया. लोगों को हो रही परेशानियों को खत्म करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी तमाम मंचों से यह घोषणा करते रहे कि केवल 50 दिन में सरकार स्थिति पर नियंत्रण पा लेगी और लोगों को बैंकों और एटीएम के बाहर लाइनों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा. वास्तविक्ता में ऐसा हुआ नहीं. लोग आज भी लाइनों में लगे हैं और यह लाइनें बैंकों और एटीएम के बाहर भोर से ही लगने लगती हैं.

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लोगों में बढ़ती नाराजगी और अपनी विफलता पर सरकार ने फिर एक तीर चला है और अब सरकार ने आरबीआई के माध्यम से सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि सभी बैंक 8 नवंबर से 30 दिंसबर यानि नोट बदलने की मियाद के भीतर के दौरान बैंकों के सभी सीसीटीवी फुटेज को संभाल कर रखेंगे.

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