शिक्षाप्रद कहानी – पत्थर का बच्चा

दागिस्तान एक खुश्क मरूस्थल है, जहां चारों ओर रेत और पत्थरों के सिवा कुछ भी नजर नहीं आता। वहां एक खुश्क मैदान के बीच एक छोटा सा पत्थर खड़ा है। जो एक बच्चे के समान प्रतीत होता है। इस बारे में वहां के लोगों में एक कहानी प्रचलित है।

दागिस्तान पर प्रायः शत्रु आक्रमण करते रहते थे। एक बार क्रूर तैमूर ने भी दागिस्तान को हड़पना चाहा। तैमूर की बड़ी सेना बिना पानी वाले सूखे रेगिस्तान में बहुत दूर तक बढ़ती चली गई। अंत में आराम करने के लिए सेना एक घाटी में ठहर गई। उस घाटी में चारों ओर कहीं भी पानी का नामो निशान तक न था। तैमूर ने हर दिशा में पानी के लिए ऊंटों के काफिले भेजे। सेना का प्यास के मारे बुरा हाल था। एक एक करके सभी काफिले वापस लौट आए। उन्हें कहीं पानी न मिला।Shikshaprad kahani - pathar ka baccha

तैमूर ने अपने सभी काफिलों के मुखियाओं को बुलाया और उनसे रास्ते के हालात पूछे, हर किसी ने एक ही जवाब दिया कि दागिस्तान के रास्ते बहुत खतरनाक और कठिन हैं तथा इन प्रदेशों में रहने वाले सब लोग पहाड़ों में भाग गए हैं। इन्हीं मुखियाओं में से एक ने कहा, ”बादशाह! अगर आपकी आज्ञा हो तो आपको वह घटना सुनाऊं, जो मैंने अपनी आंखों से देखी है।“

”जल्दी बताओ, ऐसा क्या देखकर आए हो तुम?“ तैमूर ने उतावलेपन से पूछा।

”मैंने एक छोटा लड़का देखा, जो दस-बारह भेड़ें चरा रहा था। मैंने उसे पकड़ने का आदेश दिया ताकि उससे पूछूं कि क्या आसपास पानी का कोई झरना है और यदि है तो कहां पर है? मैंने सोचा कि वहां आस पास कोई न कोई झरना अवश्य होगा, क्योंकि वहां एक लड़का अपनी भेड़ें चराता है, तो आसपास से उनके लिए पानी भी जरूर लाता होगा। पर उस लड़के ने झरने के बारे में कुछ भी बताने से साफ-साफ मना कर दिया। उसने कहा कि इस भूमि की भांति यहां का पानी भी हमारी संपत्ति है और हम अपने शत्रु को न तो अपनी भूमि दे सकते हैं और न ही पानी।“ उस मुखिया ने तैमूर को बताया।

यह सुनकर तैमूर ने उस लड़के को पकड़कर लाने का आदेश दिया। जब वह लड़का तैमूर के सामने लाया गया तो तैमूर ने उससे पूछा, ”क्यों रे लड़के, तू जानता है कि तू इस समय किसके सामने खड़ा है?“

”जानता हूं।“ लड़के ने फिर दृढ़तापूर्वक उत्तर दिया।

”तब तू चुपचाप मुझे वह झरना दिखा दे, जहां से तू पानी लाता है।“ तैमूर ने गुस्से से कहा।

”नहीं, अपने देश के दुश्मनों को मैं झरने का पता हरगिज नहीं बता सकता।“ बच्चे ने फिर दृढ़ता के साथ कहा।

”मैं तुझे झरने का पता बताने पर मजबूर कर दूंगा।“ तैमूर ने गुस्से से लाल-पीला होते हुए कहा और अपने सैनिकों को उससे झरने का पता उगलवाने का हुक्म दिया। सैनिकों ने उसे गंभीर यातनाएं दीं। पर बच्चे की जुबान से झरने का पता न उगलवा सके।

अंततः जब तैमूर को उस घाटी में कहीं पानी न मिला तो उसे जान बचाने के लिए अपने साथियों सहित वहां से वापस लौट जाना पड़ा। तैमूर के सैनिकों द्धारा दी गई यातनाओं की वजह से वह बच्चा जीवित न रह सका। लेकिन उसकी याद आज भी ताजा है। दरअसल वहां के निवासियों ने उसी जगह पर एक पत्थर रख दिया, जहां उस बच्चे की तैमूर के सिपाहियों ने यातनाएं दी थी और उसने दम तोड़ा था और वह ‘पत्थर का बच्चा’ दागिस्तान के मरूस्थल के बीच तब से आज तक स्थित है।