अब दिल्ली के जंतर मन्तर पर नारे सुनाई नहीं देंगें

नई दिल्ली. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यहां जंतर मंतर के आसपास सभी धरना – प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करती हैं. इसने धरना स्थल को रामलीला मैदान ले जाने का भी निर्देश दिया.

जंतर मंतर लंबे समय से कई आंदोलनों का मुख्य स्थल रहा है. एनजीटी ने एनडीएमसी के अध्यक्ष, पुलिस आयुक्त और दिल्ली सरकार को आज से पांच हफ्ते के अंदर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.

एनजीटी ने कहा कि शहर के बीचो बीच स्थित कनॉट प्लेस के पास मौजूद जंतर मंतर रोड इलाके में रह रहे नागरिकों के प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के अधिकारों की हिफाजत करने में सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है.

इसने कहा कि यह सुनिश्चित करना सरकार की ड्यूटी है कि शांतिपूर्वक और चैन का जीवन जी रहे लोगों के अधिकारों का वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार के नाम पर ध्वनि प्रदूषण करने वाले लोग हनन ना करें। वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कभी असीमित नहीं हो सकती.

न्यायमूर्ति आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) को रोड से सभी अस्थाई ढांचे, लाउडस्पीकर और जन संबोधन प्रणालियां हटाने का भी निर्देश दिया. नगर निकाय को इलाके में पड़ा कूड़ा हटाने और इसे चार हफ्तों के अंदर साफ करने का भी निर्देश दिया.

एनजीटी ने कहा कि यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता कानून के घोर उल्लंघन, वायु प्रदूषण और सफाई की कमी एवं राज्य के अधिकारियों द्वारा कर्तव्य नहीं निभाने के चलते स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान का सामना कर रहे हैं.

पीठ ने कहा कि यह इलाका पूरी तरह से बदल गया है, जहां कोई भी यह देख सकता है कि पुरूष, महिलाएं और बच्चे दिल्ली जल बोर्ड के टैंकरों के नीचे रहे हैं और अपने कपड़े धो रहे हैं. यह स्थिति तब और भी बदतर हो जाती है जब लोग खुले में शौच करते देखे जाते हैं जो समूचे रोड पर पूरी तरह से अस्वच्छ हालात पैदा करता है.

एनजीटी का निर्देश वरूण सेठ और अन्य की एक याचिका पर आया है. उन्होंने आरोप लगाया था कि जंतर मंतर रोड पर सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, एनजीओ के जुलूस और प्रदर्शन इलाके में ध्वनि प्रदूषण की बड़ी वजह है.