आरबीआई के आदेश के बिना बैंकों ने अकाउंट को आधार से क्यों जोड़ा

नयी दिल्लीः सूचना अधिकार (आरटीआर्इ) के तहत पूछे गये सवाल में रिजर्व बैंक ने जवाब दिया है कि आधार को बैंक खातों से जोड़ना जरूरी नहीं है. आरटीआर्इ के जवाब में रिजर्व बैंक की आेर से यह कहा गया है कि आधार को बैंक खातों से जोड़ने के लिए इस तरह का कोर्इ नियम नहीं बनाया गया है.

सरकार की आेर से बनाये जा रहे दबाव आैर दिये जा रहे दिशा-निर्देशों के बाद देश के तमाम निजी आैर सरकारी बैंकों की आेर से अपने ग्राहकों को 12 नंबर वाले आधार को खातों से जोड़ने के लिए र्इ-मेल आैर एसएमएस के जरिये संदेश भेजे जा रहे हैं.

इस बीच कर्इ लोगों ने बैंक खातों से आधार को जोड़ने का काम पूरा कर लिया है, तो ज्यादातर करदाताआें ने अपने पैन खातों से इसे जोड़ने का काम पूरा भी कर लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर, 2015 के अपने फैसले में कहा था कि हम भारत सरकार को निर्देश देते है कि उसे उसके 23 सितंबर, 2013 को दिये गये फैसले के अनुसरण करना चाहिए.

इसके साथ ही कोर्ट ने उस समय यह साफ शब्दों में कह दिया था कि आधार कार्ड योजना पूरी तरह से वाॅलिंटरी है आैर यह कभी आवश्यक नहीं हो सकती.

केंद्रीय बैंक ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि उसकी आेर से बैंक खातों को आधार से जोड़ने के काम को जरूरी बनाने के लिए कोर्इ निर्देश जारी नहीं किया गया है.

इतना ही नहीं, आरटीआर्इ में यह भी कहा गया है कि रिजर्व बैंक की आेर से सुप्रीम कोर्ट में बैंक खातों से आधार को जोड़ने के काम को जरूरी बनाने के लिए किसी प्रकार की याचिका दाखिल नहीं की गयी है.

आरटीआर्इ के जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा है कि सरकार ने गजट अधिसूचना 538 (र्इ) के जरिये अन्य सभी के साथ एक जून, 2017 को मनी लाॅन्ड्रिंग (मेंटेनेंस आॅफ रिकार्ड्स)

द्वितीय संशोधित नियम, 2017 के तहत एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें बैंक खाता खोलते समय स्थायी खाता नंबर (पैन) आैर आधार को देना जरूरी बताया गया है.