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इस साल अब तक मध्यप्रदेश में 17 बाघों की मौतें हुईं

भोपाल. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में इस साल अब तक कुल 17 बाघों की मौतें हुईं है. प्रदेश को टाइगर स्टेट के रूप में जाना जाता था.एनटीसीए के अनुसार इस साल एक जनवरी से लेकर 29 सितंबर तक देश में कुल 71 बाघों की मौत हुईं,जिनमें सबसे ज़्यादा आंकड़ा मध्य प्रदेश का है.

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एनटीसीए से मिले आंकड़ों के अनुसार पिछले साल देश में कुल 100 बाघों की मौत हुई थी, जिनमें से 30 बाघों की मौत मध्य प्रदेश में हुई थी.

वर्तमान में भारत में दुनिया के कुल बाघों में से 70 प्रतिशत बाघ हैं, जो देश के 17 राज्यों के जंगलों एवं 50 अभयारण्य में रहते हैं.आकड़ों के अनुसार, प्रदेश में पिछले महीने तीन बाघों की मौत हुई. अप्रैल में सबसे ज्यादा आठ बाघों की मौत राज्य में हुई। जनवरी एवं मई में दो-दो और फरवरी एवं मार्च में एक-एक बाघ की मौत हुई.

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वहीं, कर्नाटक में 14 बाघ की मौत हुई, जबकि महाराष्ट्र एवं उत्तराखंड में 12-12, उत्तर प्रदेश में छह, असम में चार, केरल एवं तमिलनाडु में दो-दो और ओडिशा एवं राजस्थान में एक-एक बाघ की मौत हुई है.

कर्नाटक, महाराष्ट एवं ओडिशा में भी बाघों की काफी संख्या है और इन तीनों राज्यों में बाघों को बचाने के लिए विशेष बाघ सुरक्षा बल (एसटीपीएफ) का गठन किया है, लेकिन मध्य प्रदेश में अब तक ऐसा नहीं किया गया है.

इस साल 11 मार्च को कान्हा टाइगर रिजर्व में शिकारियों द्वारा लगाए गए फंदे में फंसने से एक बाघ की मौत हो गई, जबकि एक अन्य बाघ को बैतूल जिले के जंगल में 22 अप्रैल को शिकारियों ने मार दिया.

पिछले साल भी पेंच टाइगर रिजर्व में 28 मार्च को तीन बाघ शावकों को शिकारियों ने जहर देकर मारा, जबकि एक बाघ की मौत कान्हा टाइगर रिजर्व में 22 अक्तूबर को करंट से हुई. बाघ मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में भी सुरक्षित नहीं हैं. ऐसा लगता है कि शिकारियों को खुली छूट दी गई है.

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