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एटमी ख़तरों से दुनिया को बचाने वालों को नोबेल शांति पुरस्कार

ओस्लो. इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार परमाणु हथियारों के ख़ात्मे के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘इंटरनेशनल कैम्पेन टू अबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स’ (आईकैन) को दिया गया है.

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उत्तर कोरिया और अमरीका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर बढ़े तनाव के बीच नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई है, ये निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने वाली संस्था आईकैन को अपने दशक लंबे प्रयास के लिए नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है. ऐसे समय में जब उत्तर कोरिया और ईरान से जुड़ा परमाणु हथियार संकट गहरा रहा है, यह बेहद समीचीन है.

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नोर्वे की नोबेल समिति के अध्यक्ष ब्रिट रेइस-एंडरसन ने कहा, संस्थान को परमाणु हथियारों के प्रयोग से होने वाली भीषण मानवीय क्षति की ओर ध्यान आकर्षित करने संबंधी उसके कार्य और संधि के आधार पर ऐसे हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के अथक प्रयासों के लिए पुरस्कार दिया जा रहा है.

नोबेल शांति पुरस्कार पानी वाली इस संस्था का कहना है कि उनका काम अभी पूरा नहीं हुआ है और परमाणु हथियारों की पूरी तरह समाप्ति होने तक वह प्रयास जारी रखेंगे. संस्था की प्रमुख बी. फिन ने इस सप्ताह कहा था, हमारा काम अभी पूरा नहीं हुआ है. परमाणु हथियारों के खात्मे तक काम पूरा नहीं होगा.

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आईकैन ख़ुद को सौ से ज़्यादा देशों में काम करने वाले ग़ैर-सरकारी संस्थाओं का समूह बताता है. इसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया में हुई थी और साल 2007 में विएना में इसे औपचारिक तौर पर लॉन्च किया गया.स्विट्जऱलैंड के जिनेवा में आधारित इस संस्था को दिसंबर में नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा.

रॉयटर्स के मुताबिक जुलाई में 122 देशों ने परमाणु हथियारों के निवारण के लिए संयुक्त राष्ट्र की संधि को मंज़ूरी दी थी, इसमें अमरीका, रूस, चीन, ब्रिटेन शामिल थे और फ्रांस इस वार्ता से बाहर रहा था.

 

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