गुजरात HC का बड़ा फैसला: गोधरा काण्ड में किसी को नहीं मिली फांसी

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अहमदाबादः गुजरात हार्इकोर्ट ने सोमवार को गोधरा में साबरमती ट्रेन के डिब्बों में की गयी आगजनी की वारदातों को लेकर अहम फैसला सुना दिया है. इस मामले में हार्इकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनायी है.

इस मामले में हार्इकोर्ट ने 11 दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया है. वहीं, 20 लोगों के आजीवन कारावास को हार्इकोर्ट ने जारी रखा है. मालूम हो कि 27 फरवरी, 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगा दी गई थी. घटना में 59 लोगों की मौत हो गई थी.

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मार्च 2011 में विशेष अदालत ने गोधरा कांड में 11 को फांसी, 20 को उम्रकैद की सजा सुनायी. इसके बाद साल 2014 में नानावती आयोग ने 12 साल की जांच के बाद गुजरात दंगों पर अपनी अंतिम रिपोर्ट तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सौंप दी थी.

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मृतकों में अधिकांश कार सेवक थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे। इस घटना के बाद राज्यभर में ब़़डे पैमाने पर हिंसा और दंगे हुए थे.बाद में दोषी ठहराए जाने को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में कई अपील दायर की गई. जबकि राज्य सरकार ने 63 लोगों को बरी करने पर सवाल उठाया.

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गुजरात सरकार द्वारा गठित नानावटी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एस-6 कोच का अग्निकांड कोई दुर्घटना नहीं थी बल्कि उसमें आग लगाई गई थी.

बताया जाता है कि इस ट्रेन में भीड़ ने पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी, जो गोधरा कांड की जांच कर रहे नानवती आयोग ने भी माना है. इसके बाद प्रदेश में सांप्रदायिक दंगा भड़का और उसमें 1200 से अधिक लोग मारे गये. आग लगाने को लेकर कई लोगों को गिरफ्तार किया गया.

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2008 में एक जांच आयोग बनाया गया और नानावटी आयोग को जांच सौंपी गयी, जिसमें कहा गया था कि आग दुर्घटना नहीं बल्कि एक साजिश थी.

जनवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले में न्यायिक कार्रवाई करने को लेकर लगायी रोक हटा ली. फरवरी 2011 में विशेष अदालत ने गोधरा कांड में 31 लोगों को दोषी पाया, जबकि 63 अन्य को बरी किया.

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