दिव्य दीपावली: त्रेता युग जैसी जीवंत होगी राम की नगरी अयोध्या

1.71 लाख दीप आसमान के तारों के रूप में जगमगाएंगे

अयोध्या। सरयू के तट पर पहली बार मन रही दिव्य दीपावली को लेकर अयोध्यावासियों को निहाल कर रखा है। अयोध्या की आत्मा में राम बसते हैं और वह राम की वापसी का इतिहास दोहराने को आतुर नजर आती है.1.71 लाख दीप आसमान के तारों के रूप में जगमगाएंगे

सहस्त्रधारा घाट पर आरती की तैयारियों को देख रहे दशरथ मंदिर के महंत बृजमोहन दास पूछने पर भगवान राम के वापस आने पर मानस में लिखी पंक्तियां दोहरान लगते हैं -चलत विमान कोलाहल होई/जय श्री राम कहत सब कोई.

पोस्टरों में सिर्फ भगवान राम ही नहीं, मुख्यमंत्री योगी भी हैं और कही-कहीं रामायण की चौपाइयां भी हैं। योगी में लोगों को मंदिर के साथ ही विकास की उम्मीदें भी नजर आती हैं. बिड़ला धर्मशाला के निकट लोगों में इस बात की चर्चा होती नजर आती है कि योगी फैजाबाद को अरबों रुपए देने वाले हैं.

दिगंबर अखाड़े के ब्रह्मलीन मंहत राम चंद्र परमहंस और योगी के गुरु अवैद्यनाथ के घनिष्ठ संबंधों की वजह से अयोध्या से मुख्यमंत्री का भावनात्मक रिश्ता भी है और मुख्यमंत्री बनने के सात महीने में वह तीसरी बार यहां आ रहे हैं.

मंदिर की उम्मीदों की एक वजह ये भी है हालांकि अभी राम के राज्याभिषेक की तैयारियों में यह तथ्य हाशिये पर नजर आता है कि मुख्य आयोजन स्थल राम कथा पार्क से महज दो किमी दूर ही पत्थर तराशने का काम भी चल रहा है.

माना जाता है कि सरयू भगवान विष्णु के नेत्र से निकली हैं और इसीलिए इसे नेत्रजा भी कहा जाता है. बुधवार को इस नेत्रजा में 1.71 लाख दीप आसमान के तारों के रूप में जगमगाएंगे.

अयोध्या के लोगों ने काशी की देव-दीपावली के बारे में काफी कुछ सुन रखा है इसलिए आरती को लेकर उनमें अधिक उत्साह है। सरयू किनारे की आरती का इतिहास बहुत पुराना नहीं है.

कल्याण सिंह के शासनकाल में 1991 के बाद पहली बार अयोध्या में भगवान राम को केंद्र में रखकर कोई हलचल है, लेकिन इस बार तस्वीर में आक्रोश, भय या उत्तेजना न होकर लोगों में उस क्षण को जीने की उत्कंठा है. फैजाबाद से अयोध्या की ओर बढ़ते ही स्वागत द्वारों की शृंखला शुरू हो जाती है.