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दिल्ली/ मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर दी है. इस रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि बीते वित्त वर्ष कितने नोट छापे गए और नोटों की छपाई पर कितना खर्चा आया है. इस रिपोर्ट के मुताबकि 9 नवंबर से 31 दिसंबर तक करीब 2380 करोड़ नोटों की छपाई की गई है. वित्त वर्ष 2016-17 में नोटों की छपाई में कुल खर्च 7965 करोड़ रुपए का रहा है.नोटबंदी के दौरान बैन किए गए 1000 रुपये के पुराने नोटों में से करीब 99 फीसद बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट आए हैं. लेकिन, 1000 रुपये के 8.9 करोड़ यानी 1.3 फीसद नोट वापस नहीं लौटे हैं.

नोटबंदी का उद्देश्यों पूरा हुआ :जेटली
आरबीआई का डेटा सामने आने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष रखा है. उन्होंने आरबीआई के आंकड़ों पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. नोटबंदी अपने उद्देश्यों में कामयाब रही। नोटबंदी का उद्देश्य पैसा जमा करना नहीं था. नोटबंदी से नकली नोटों का पता चला. इसका लक्ष्य टैक्स का दायरा बढ़ाना था. नोटबंदी से आतंकवाद और नक्सलवाद पर असर पड़ा. नोटबंदी का उद्देश्य कैश लेन-देन कम करना था. नकदी का आदान-प्रदान 17 प्रतिशत कम हो गया है.

ना के बराबर खत्म हुआ काला धन
जेएनयू में अर्थशास्त्र के प्रफेसर सुरजीत मजूमदार ने कहा, ‘जिस तरह 1000 के नोट वापस आए हैं उसी तरह 500 के नोट भी वापस आए होंगे. उन्होंने कहा कि इसका मतलब ये है कि 1000 और 500 के लगभग पूरे नोट वापस आए है, तो कालाधन तो ना के बराबर खत्म हुआ है. नोटबंदी में 15.4 लाख करोड़ की करंसी चलन से बाहर की गई थी. इसमें से 44 प्रतिशत 1000 के नोट और 56 प्रतिशत 500 के नोट थे.

चिदंबरम ने कहा- 16000 लाने के लिए 21000 करोड़ खर्च हुए, ऐसे अर्थशास्त्री को नोबेल दे दो
भारतीय रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के डेटा जारी कर दिया है. आरबीआई की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार 1000 रुपए के कुल 670 करोड़ नोटों में से 8.9 करोड़ नोट वापस नहीं आए हैं. इस तरह से यह कहा जा सकता है कि सिर्फ 1000 रुपए के नोटों में ही 8.9 हजार करोड़ रुपए वापस नहीं आए हैं. आरबीआई का डेटा सामने आने पी चिदंबरम ने पलटवार किया है. चिदंबरम के निशाने पर आरबीआई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने ट्वीट करके बताया कि नोटबंदी में चलन से बाहर किए गए 15,44,000 करोड़ रुपये के नोट में से 16,000 करोड़ रुपये के नोट वापस नहीं आए. ये करीब एक फीसद है. ऐसे में आरबीआई को शर्म आनी चाहिए जिसने नोटबंदी की अनुशंसा की.

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