भारत भी भगाएगा 40,000 रोहिंग्या मुसलामानों को ? फिर भी मोदी से है उम्मीद…


सुप्रीम कोर्ट ने देश से निकालने की योजना पर मोदी सरकार से जवाब मांगा

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन में आयोजित ब्रिक्स सम्मलेन से सीधे म्यांमार पहुँच गए हैं,जहाँ वे 7सितंबर तक रहेंगे.ऐसे में विश्व के बड़े नेता होने के कारण उम्मीद की आखरी किरण पीएम मोदी बन गए हैं मोदी से एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी आग्रह किया है. लेकिन इस बीच खबर है कि 40,000 रोहिंग्या मुसलामानों को भारत भी अपनाने को तैयार नहीं है. गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने घोषणा ने कहा है कि भारत रोहिंग्या मुसलमानों को निर्वासित करेगा. भारत में लगभग 40,000 रोहिंग्या समुदाय के लोग रहते हैं. इसमें 16,000 संख्या उन रोहिंग्या मुसलमानों की है जो संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के तौर पर पंजीकृत हैं. प्रधानमंत्री मोदी के म्यांमार दौरे से पहले भारत का ये कहना कि वह म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों को निर्वासित करने पर विचार कर रहा है,
इसके कई अर्थ हैं.

हिन्दू शरणार्थी भी हो रहे हैं हिंसा का शिकार:बौद्ध बहुल म्यांमार से लाखों की तादाद में रोहिंग्या मुसलमान पलायन करने को मजबूर है। बौद्ध आतंकियों और म्यांमार की सेना की हिंसा का शिकार सिर्फ रोहिंग्या मुसलमान ही नहीं बल्कि बड़ी तादाद में हिन्दू भी हो रहे हैं.इस हिंसा की वजह से अब तक 400 से ज्यादा हिंदू अपना घर छोड़ चुके हैं. चश्मदीदों की मानें उखिया के कुटुप्लोंग शरणार्थी शिविर से 412 हिंदुओं ने मंदिरों में पनाह ले रखी है.संयुक्त राष्ट्र अब इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है.हालांकि बर्मा की सेना ने किसी भी तरह की ज़्यादती से इनकार किया है. म्यांमार म्यांमार में एक अनुमान के मुताबिक़ 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं. इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं. सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है. लेकिन ये म्यामांर में कई पीढ़ियों से रह रहे हैं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल का पीएम मोदी से आग्रह 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के म्यांमार का आधिकारिक दौरा शुरू करने के दिन मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उनसे आग्रह किया कि वह रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करें. संगठन ने पीएम मोदी से यह आग्रह भी किया कि म्यांमार के नेतृत्व पर दबाव डालें कि हिंसा प्रभावित रखाइन प्रांत के रोहिंग्या को सहायता पहुंचाई जाए. मोदी सरकार को रोहिंग्या शरणार्थियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता जतानी चाहिए न कि उनके प्रत्यर्पण की धमकी देनी चाहिए.एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी को म्यांमार के अधिकारियों पर दबाव बनाना चाहिए कि वे जरूरतमंद लोगों को सहायता पहुंचाएं. हताश लोगों को जीवन रक्षक सहयोग से इंकार करने को उचित नहीं ठहराया जा सकता.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा:सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 40,000 रोहिंग्या मुसलमानों को देश से निकालने की योजना पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. ऐसी रिपोर्ट है कि सरकार रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को उनके देश म्यांमार वापस भेजने की तैयारी कर रही है. रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उन्हें वापस भेजने से रोकने की अपील की है. दो रोहिंग्या शरणार्थियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमान दुनिया में सबसे अधिक मुश्किलों का सामना करने वालों में शामिल हैं.