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मुझे अपने आप को और दर्शकों को चौंकाने में मजा आता है:आमिर खान

नई दिल्‍ली: सुपरस्टार आमिर खान ने कहा है कि मुझे अपने आप को और दर्शकों को चौंकाने में मजा आता है. एक चीज जो मैं महसूस करता हूं कि लोगों को अप्रत्याशित रूप से कुछ देना हमेशा मजेदार होता है. हालांकि नये रुझानों को जानना अच्छा है, लेकिन मुझे लगता है कि अन्य फिल्मकारों को भी इसके बारे में सोचना चाहिये.

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अपनी नई फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के प्रमोशन के लिए दिल्ली आए आमिर खान ने एक कार्यक्रम में फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ की सह कलाकार जायरा वसीम के साथ भाग लिया.अद्वैत चंदन लिखित और निर्देशित “सीक्रेट सुपरस्टार” 19 अक्टूबर को रिलीज होगी.

पत्रकारों से बातचीत करते हुए आमिर ने कहा कि जब फिल्में चुनने की बात आती है, तो मैं अपने दिमाग की बात सुनता हूं.मैं जिस प्रकार की फिल्मों का चयन करता हूं, उसके लिये मेरा उत्साहित होना बहुत महत्वपूर्ण है और मैं अक्सर ऐसे विषय चुनता हूं, जो बालीवुड के मौजूदा चलन का हिस्सा नहीं होते हैं.’

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‘दंगल’ फिल्म में अपनी बेहतरीन एक्टिंग की वजह से राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी जायरा वसीम की अगली फिल्म ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ है. दंगल में जहां वे पहलवान के रोल में थीं, इस बार वे गायिका बनी हैं. फिल्म मे युवा अभिनेत्री के सफर को दिखाया गया है.

जायरा ने खुद की एक पहलवान से एक गायक के सफर को दर्शकों के सामने पेश किया है. एक गिटार प्रशिक्षक द्वारा जायरा वासिम ने गिटार बजाना सीखा जिसमें जायरा ने बारीक से बारीक चीजों पर विशेष ध्यान दिया है.

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एक एक्टर के रूप में, जब भी हम कोई इंस्ट्रूमेंट बजाना सीखते हैं तो हम अक्सर इसे सही ढंग से बजाने की कोशिश करते हैं. वे (जायरा) एक कदम आगे निकलीं और उन्होंने मेघना मिश्रा (गायक) के साथ बहुत समय बिताया ताकि वो उनसे यह समझ सके कि कैसे गाऊं. वे एक साथ रिर्हसल भी करते थे.

16 वर्षीय जायरा वसीम के अनुसार उन्हें यह सुनिश्चित करना था कि बड़े पर्दे पर ऐसा न लगे कि वे एक्टिंग कर रही है. कई बार ऐसा होता है कि आप एक या दो नोट से चूक जाते हैं. लेकिन यह सुनिश्चित करना कि वे एक्टिंग कर रही इनसे न चुकें यह काफी मुश्किल था.

यह सवाल पैदा होता है कि क्या ये कुश्ती सीखने से ज्यादा आसान था? दोनों समान रूप से मुश्किल थे. जब जायरा ने पहली बार कुश्ती सीखी तो उसे डर लग रहा था. उसे यकीन नहीं था कि वे इसे निभा पाएंगीं. यह उनके कोच (कृपा शंकर बिश्नोई) के बिना संभव नहीं था.

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