लापरवाही: ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक नहीं लगाए

कई परिवारों के शव लापता

शवों को लेजाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिल रही है

दिल्ली.उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली में कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के जिस हादसे में 23 से ज़्यादा मौतें हो चुकी है और डेढ़ सौ से ज़्यादा लोग घायल हो चुके हैं इसमें घोर लापरवाही सामने आई है. हादसा इतना खतरनाक था कि पटरी से उतरे 14 कोच एक-दूसरे पर जा सवार हो गए. इस बीच मृतकों का शव न मिलने पर उनके परिवार के लोगों ने काफी हंगामा किया है। उधर कुछ लोग फर्जी मुआवजा लेने भी पहुंचे, लेकिन सख्ती से पूछताछ होने के बाद वहां से गायब हैं.।लोगों ने पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा किया.

फिलहाल जो शुरूआती जांच हुई है उसमें यह बात स्पष्ट हो गई है कि जिस पटरी पर से ट्रेन को गुजरना था, उस पर काम चल रहा था और ड्राइवर को ट्रेन को धीमी गति से गुजारने के आदेश थे. ड्राइवर को समय पर सिग्नल नहीं मिला,ट्रेन 100 किमी की गति से दौड़ रही थी.ऑटो सिस्टम की वजह से ब्रेक नहीं लगा.

हादसे के वक़्त ट्रेन संख्या 18477 कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस पुरी से हरिद्वार की तरफ जा रही थी. तभी खतौली रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए. डिब्बों में फंसे यात्रियों को निकालने के लिए गैस कटर से डिब्बे काटे गए.

कई लोगों के शव नहीं मिल रहे हैं
रेल हादसे में मुजफ्फरनगर के तीन लोगों की मौत हुई है। उनका शव नहीं मिलने पर कुछ लोगों ने पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा किया। बाद में जिला अस्पताल में शव मिलने पर लोग शांत हो गए।

देश में अब तक हुए बड़े रेल हादसे

भारत में 1988 के बाद से हुए बड़े रेल हादसों का घटनाक्रम इस प्रकार है
21 जनवरी, 2017: आंध प्रदेश के विजयनगरम जिले में जगदलपुर-भुवनेर हीराखंड एक्सप्रेस का इंजन और नौ डिब्बे पटरी से उतर जाने की वजह से कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई और 69 घायल हो गए.
28 दिसंबर, 2016: कानपुर देहात जिले के रूरा रेलवे स्टेशन के निकट एक पुल को पार करते हुए सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस के 15 डिब्बे पटरी से उतर जाने की वजह से 62 यात्री घायल हो गए थे.
20 नवंबर, 2016 : उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में पुखराया के निकट इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बों के पटरी से उतर जाने की वजह से 100 से ज्यादा यात्रियों की मौत हो गई जबकि 200 घायल हो गए.
10 जुलाई, 2011: दिल्ली जाने वाली कालका मेल के 15 डिब्बे पटरी से उतर जाने की वजह से 70 यात्रियों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए.
28 मई, 2010: पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले में नक्सलियों द्वारा ज्ञानेरी एक्सप्रेस को पटरी से उतार देने की घटना में कम से कम 148 लोगों की मौत हो गई थी.
नौ सितंबर, 2002: बिहार के औरंगाबाद जिले में हावड़ा-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का एक डिब्बा धावी नदी में गिर जाने की वजह से 100 लोगों की मौत हो गई थी और 150 घायल हो गए थे.
दो अगस्त, 1999: असम के गैसल में 2,500 यात्रियों को ले जा रही दो ट्रेनों के बीच हुई टक्कर में कम से कम 290 लोगों की मौत हो गई थी.
26 नवंबर, 1998: पंजाब में खन्ना के निकट पटरी से उतरी फ्रंटियर मेल के डिब्बों से जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस की टक्कर में कम से कम 212 लोगों की मौत हो गई थी.
14 सितंबर, 1997: मध्य प्रदेश के बिलासपुर जिले में अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस के पांच डिब्बों के नदी में गिरने की वजह से 81 लोगों की मौत हो गई थी.
20 अगस्त, 1995: उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन के निकट पुरूषोत्तम एक्सप्रेस के कालिंदी एक्सप्रेस से टकरा जाने की वजह से 400 लोगों की मौत हो गई थी.
18 अप्रैल, 1988: उत्तर प्रदेश में ललितपुर के निकट कर्नाटक एक्सप्रेस के पटरी से उतर जाने की वजह से कम से कम 75 लोगों की मौत हो गई थी.
8 जुलाई, 1988: केरल में अष्टमुडी झील में आइलैंड एक्सप्रेस के गिर जाने की वजह से 107 लोगों की मौत हो गई.