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शहरों में महिला हाइपरटेंशन मरीज़ों की तादाद में हुआ इज़ाफ़ा

हैदराबाद. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्युट्रिशन (एनआइएन) ने एक रिपोर्ट में बताया कि शहरी इलाकों में रहने वाले मर्दों के मुक़ाबले में महिलाओं में उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन के मरीज़ ज़्यादा पाए गए हैं. इस समस्या से सबसे ज्यादा पीड़ित केरल और सबसे कम बिहार में हैं.

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एनआइएन की रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया कि देश में करीब 16 फीसद पुरुष धूमपान और 30 फीसद शराब का सेवन करते हैं. एनआइएन की ओर से इन तमाम पहलुओं को लेकर नेशनल न्युट्रिशन मानिटरिंग ब्यूरो (एनएनएमबी) से अध्ययन कराया गया.

एनआइएन भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के तहत आता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में रहने वाले करीब फीसद 31 फीसद पुरुषों की तुलना में 26 फीसद महिलाएं उच्च रक्तचाप से पीड़ित होती हैं.

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केरल में उच्च रक्तचाप पीड़ितों की संख्या 31 से 39 फीसद है, जबकि बिहार में 16 से 22 फीसद लोग इस परेशानी से पीड़ित हैं. रिपोर्ट यह भी बताती है कि 22 फीसद पुरुष डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि इनकी तुलना में 19 फीसद महिलाएं इस रोग की चपेट में हैं.

यह रिपोर्ट साल 2015-16 के दौरान राज्यों में 52,577 घरों के 1.72 लाख लोगों पर किए गए अध्ययन पर आधारित है। आइसीएमआर ने 1972 में एनएनएमबी की स्थापना की थी.

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शहरों में यह रोग 30 से 40 फीसदी में, जबकि गांवों में 15 फीसदी को ही है. आनुवंशिक कारण के अलावा खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान भी है. इससे हार्ट अटैक से लेकर लिवर डैमेज और आंखों की रोशनी जाने का खतरा होता है.

हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर भी कहा जाता है, जो बिना लक्षण के ही प्राण घातक होता है. इसमें कुछ लोगों में सिर दर्द, धड़कनों का तेज होना, चलते समय सांसों का फूलना, थकान और असहजता देखी जाती है. यह लकवा और हार्ट अटैक का प्रमुख कारण है.

यह किडनी व आंखों पर भी असर डालता है. इससे बचाव के लिए नियमित जांच जरूरी है. उच्च रक्तचाप के कारण हर वर्ष लाखों लोगों की मृत्यु हो जाती है. हृदय शरीर के सभी अंगों को नलीकाओं द्वारा रक्त को पहुंचाने का कार्य करता है. रक्त प्रवाह के समय हृदय दबाव पैदा करता है, जो नलीकाओं के अंदरूनी भाग पर पड़ता है.

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