हमेशा छुप नहीं सकती जिसे औक़ात कहते हैं – इमरान ख़ान की एक ग़ज़ल

मुझे जीवन की राहों में हुई है मात कहते हैं,
मैं कल तक तो उजाला था, मुझे अब रात कहते हैं।हमेशा छुप नहीं सकती जिसे औक़ात कहते हैं - इमरान ख़ान की एक ग़ज़ल

वो कल तक जो मुहाफ़िज़ थे, दुआ-गो थे मेरी खातिर,

मेरा दिल जिनसे ज़्यादा दुख सके वो बात कहते हैं।

मेरे अंदाज़ को शाही बताते थे, वही देखो,
ज़रा सा वक़्त क्या बदला मुझे बदज़ात कहते हैं।

न हो मायूस ऐसे हम बदल जायेंगे जल्दी ही,
मेरे टूटे हुए दिल से मेरे हालात कहते हैं।

ज़बाँ के साथ ही अक्सर ये बाहर आ ही जाती है,
हमेशा छुप नहीं सकती जिसे औक़ात कहते हैं।

– इमरान खान