हसरतों का कोई क्या करे

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हसरतें
हसरतों का कोई क्या करे

ना पूछती हैं
ना बताती हैं
बस दरवाजे पर खडी हो कर
चुपचाप मुस्कुराती हैं

हसरतों का कोई क्या करे

अब हर चाय की प्याली को
तेरा साथ चाहिए
तेरी आँखों में कटे जो
एैसी रात चाहिए
हर साँस को तेरी
सौगात चाहिए
कभी खत्म ना हो जो
एैसी बात चाहिए

ना पूछती हैं ना बताती हैं
बस दरवाजे पर खडी हो कर
चुपचाप मुस्कुराती हैं

हर चाट के ठेले पर अकसर
तेरे खुशबू आती है
मैने ये महसूस किया है
बड़ी देर रह जाती है
थामे मेरे हाथ की उंगली
ठेले तक ले जाती
खट्टा मीठा स्वाद वो बन कर
रूह मेरी सहलाती है

ना पूछती है ना बताती है
बस दरवाजे पर खडी हो जाती है
चुपचाप मुस्कुराती है

हसरतें
हसरतों का कोई क्या करे

~ स्कंद नयाल खान

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