हिंगोट युद्ध: सरकार की निगरानी में हर साल होता है मौत का खेल, एक की मौत, 35 घायल

इंदौर. मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में धार्मिक परंपरा से जुड़े हिंगोट युद्ध में बुरी तरह घायल 30 वर्षीय व्यक्ति की आज इलाज के दौरान मौत हो गई. इस युद्ध में 35 अन्य लोग घायल हो गए.

यह रिवायती जंग इंदौर से करीब 55 किलोमीटर दूर गौतमपुरा कस्बे में हुई. इसमें मामूली रूप से घायल 33 लोगों का मौके पर मौजूद चिकित्सकों के दल ने प्राथमिक उपचार किया और उन्हें घर जाने की इजाजत दे दी गई. अन्य तीन घायलों को गंभीर चोटों के चलते इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में भर्ती कराया गया.

अस्पताल के आकस्मिक चिकित्सा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि घायलों में शामिल किशोर (30) की इलाज के दौरान आज मौत हो गई। हिंगोट युद्ध के दौरान उसे सिर में गंभीर चोटें आई थीं.

हिंगोट आंवले के आकार वाला एक जंगली फल है। फल का गूदा निकालकर इसे खोखला कर लिया जाता है. फिर इसमें कुछ इस तरह बारूद भरा जाता है कि आग दिखाते ही यह किसी अग्निबाण की तरह तेजी से निकल पड़ता है.

गौतमपुरा कस्बे में दीपावली के अगले दिन यानी विक्रम संवत की कार्तिक शुक्ल प्रथमा को हिंगोट युद्ध की धार्मिक परंपरा निभाई जाती है.गौतमपुरा के योद्धाओं के दल को तुर्रा  नाम दिया जाता है, जबकि रुणजी गांव के लड़ाके कलंगी दल की अगुवाई करते हैं.

दोनों दलों के योद्धा रिवायती जंग के दौरान एक-दूसरे पर हिंगोट दागते हैं. इस जंग में हर साल कई लोग घायल होते हैं.
माना जाता है कि प्रशासन हिंगोट युद्ध पर इसलिए पाबंदी नहीं लगा पा रहा है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय लोगों की धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं.

क्या है हिंगोट:हिंगोट दरअसल हींगोरिया नामक जंगली पेड़ का नींबू के आकार का फल होता है. हिंगोट युद्ध के लिए इसे तोड़कर जमा किया जाता है. ऊपर से यह काफी कठोर होता है. अंदर से इसका गूदा निकालकर इसमें बारूद भर दिया जाता है.युद्ध में दोनों पक्ष इसमें आग लगाकर एक दूसरे पर इसे दागते हैं। इस खेल में हर साल लोग घायल होते हैं.