वो 10 कारण जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में डुबो दिया

दिल्ली के उपचुनाव के नतीजे सबसे ज्यादा आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल के लिए चिंता लाये है| आज के रिजल्ट का असर सीधा आने वाले एमसीडी चुनावो पर पड़ेगा| राजौरी गार्डन में आप कि न केवल हार हुई है बल्कि वो पहले पायदान से सीधे तीसरे नंबर पर आ गई है| राजौरी गार्डन में बीजेपी और अकाली दल के प्रत्याशी मनजिंदर सिरसा भरी मतों से जीते है| आज की हार ने आने वाले एमसीडी चुनावो में आम आदमी पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है|

केवल 2 सालो में ख़त्म हुआ केजरीवाल का जादू

अभी 2 साल ही हुए है जब दिल्ली कि जनता ने 70 सीटों में से 67 सीटे आम आदमी पार्टी को दी थी| दो साल पहले जनता ने पूरा समर्थन देकर अरविन्द केजरीवाल को सत्ता में लाये थे| पर दो साल बाद आखिर ऐसा क्या हुआ कि पहले पंजाब और गोवा में बुरी हार मिली| उसके बाद अब दिल्ली जिसे पार्टी अपना गढ़ मान रही थी| वहां भी उसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा| राजौरी गार्डन में आप पार्टी के प्रत्याशी की जमानत भी जब्त हो गई|

इन कारणों को केजरीवाल की बुरी हालत का जिम्मेदार माना जा सकता है:

10 कारण जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में डुबो दिया
जरनैल सिंह को पंजाब भेजना: आम आदमी पार्टी ने जरनैल सिंह को दिल्ली से पंजाब भी दिया था| पार्टी का मानना था कि पंजाब चुनाव में पटरी को फायदा मिलेगा| लेकिन पार्टी को वहां हार का सामना करना पड़ा| उसके बाद दिल्ली कि खाली सीट पर पार्टी से जिसे उतरा, उसे दिल्ली वालो ने पसंद नहीं किया|

शुंगलू रिपोर्ट: चुनावो से ठीक पहले आयी शुंगलू रिपोर्ट ने पार्टी कि काफी किरकिरी की| इस रिपोर्ट का इस समय आना पार्टी के डूबते जहाज में छेद करने के लिए काफी था| रिपोर्ट में यह साफ़ साबित हो गया कि पिछले दो सालो से पार्टी ने अपनी मनमानी की है| एलजी के बिना परामर्श के ही उसने सारे फैसले लिए| जिसमे काफी फेसलो में नियमो का उल्लंघन भी हुआ है|

10 कारण जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में डुबो दिया
16000 की खाने की थाली: चुनावो से ठीक पहले बीजेपी ने जनता के आगे पार्टी के एक जैसे का खर्च ला दिया| इस बिल में खाने की एक खाली की कीमत 12000 से 16000 रूपए बताई गई| विपक्ष के इस वार का केजरीवाल सरकार पर कोई जबाब नहीं है| अपने आपको आम आदमी कहने वाली पार्टी की जनता के पैसो पर ऐश जनता को पसंद नहीं आयी| शायद उसी का परिणाम है तह सब|

हमेशा मोदी के खिलाफ बोलना: दिल्ली में भरी मतों से जीतने के बाद भी केजरीवाल जामेशा नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमले करते रहे| कभी उनकी डिग्री को लेकर, तो कभी उनकी माँ के साथ खिंचवाई फोटो को लेकर| उन्होंने अपनी हर नाकामी को एलजी और केंद्र सरकार के ऊपर मढ़ दिया| जनता को उनकी यह बात बिलकुल पसंद नहीं आयी|

10 कारण जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में डुबो दिया
विज्ञापन पर खर्चा: पार्टी पर लगातार आरोप लग रहे है कि उन्होंने जनता की मेहनत की कमाई अपने प्रचार में उड़ा दी| उनपर आरोप लगाया गया कि उन्होंने लगभग 97 करोड़ रूपए अख़बार, रेडिओ, टीवी आदि पर खर्च कर दिए| शायद दिल्ली की जनता को यही बात बुरी लग गई| जिस पैसे से शहर का विकास हो सकता था| उस पैसे को आम आदमी पार्टी ने अपने प्रचार में उड़ा दिए|

10 कारण जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में डुबो दिया
मंत्रियो का विवादों में घिरना: जब से आम आदमी पार्टी सत्ता में आई है| उनके मंत्रियो पर कोई न कोई आरोप लगते ही रहते है| कई नेता तो उनके जेल भी गए| आप नेताओ पर घरेलू हिंसा से लेकर फर्जी डिग्री समेत कई आरोप लगे है| जिसे पार्टी ने न तो खंडन किया और न ही अपने नेताओ को बेगुनाह साबित कर पाई| जिससे धीरे-धीरे जनता के बीच आप नेताओ ने भरोसा खो दिया|

10 कारण जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में डुबो दिया
ईवीएम पर सवाल: जब से केजरीवाल पंजाब इलेक्शन हारे है| वो लगातार ईवीएम और चुनाव आयोग पर अपनी हार का ठीकरा फोड़ रहे है| चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर लगातार आरोप लगाना पार्टी के विपक्ष में गई| लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस ने भी कभी चुनाव आयोग पर ऊँगली नहीं उठाई| ऐसा नहीं है कि 2014 के बाद से बीजेपी लगातार हर राज्य में जीत रही है| परन्तु केजरीवाल का आयोग पर ऊँगली उठाना उन्हें ही भरी पड़ता नज़र आ रहा है|

10 कारण जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में डुबो दिया
बड़े नेताओ को किया बाहर: पार्टी ने दिल्ली की सत्ता में आते ही पार्टी के बड़े नेताओ को बाहर कर दिया| वो नेता जो आंदोलन के समय से पार्टी में रहे| सत्ता में आते ही केजरीवाल ने प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और आनंद कुमार जैसे साफ़ छवि वाले नेताओ को बाहर कर दिया| इन नेताओ ने पार्टी से निकाले जाने के बाद पार्टी के खिलाफ काफी कुछ बोला, जो पार्टी के लिए नकारात्मक रहा|

10 कारण जिन्होंने अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में डुबो दिया
आरोप प्रत्यारोप की राजनीती करना: आम आदमी पार्टी ने लगातार आरोप प्रत्यारोप की राजनीती की| उन्होंने काम पर अधिक ध्यान देने की जगह दुसरो पर आरोप लगाने पर ध्यान दिया| शुरू में पार्टी ने अपनी ईमानदार छवि को और मजबूत किया था| जब उसने 49 दिन में ही इस्तीफा दे दिया था| 2015 में दुबारा चुनाव में जनता ने भी पूरा समर्थन देते हुए पार्टी को एकतरफा जीत दिलाई| परन्तु सत्ता में आते ही पार्टी ने एलजी और मोदी पर आरोप लगाने शुरू कर दिए| जिससे जनता की नजरो में पार्टी की छवि आरोप लगाने वाली बन गई न कि काम करने वाली|