800 किलो खिचड़ी पकाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की जाएगी…

शुक्रवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में वर्ल्ड फूड इंडिया 2017 का इनॉगरेशन किया। इसका आयोजन फूड प्रॉसेसिंग मिनिस्ट्री की ओर से किया गया है.

 इस मेले में मुख्या आकर्षण का केंद्र रहेगी खिचड़ी.  800 किलो खिचड़ी पकाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की कोशिश की जाएगी.

4 नवंबर को संजीव कपूर सात फीट चौड़ी और एक हजार लीटर कैपिसिटी वाली कड़ाही में यह खिचड़ी बनाएंगे.मोदी ने  अपने भाषण मे कहा- “भारत की ताकत उसका एग्रीकल्चर है, फूड प्रॉसेसिंग भारत में जीवन जीने का तरीका है. इसमें विविधता भी है,हमारे यहां कई तरह की फसलें होती हैं, भारत में गेहूं, चावल, केला, पपीता और कई सब्जियां पैदा होती हैं.

हमारे यहां अचार-मुरब्बे, पापड़ और चटनियां साधारण  तरीको से बनाई जाती हैं. इसमें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समेत बड़ी फूड कंपनियों के चीफ हिस्सा ले रहे हैं.

तीनदिवसीय इस मेले का मकसद फूड इकोनॉमी में बदलाव लाना और भारत को ग्लोबल फूड प्रॉसेसिंग इंडस्ट्री का सोर्सिंग हब बनाना और   किसानों की इनकम को दोगुना करना है.

65 हजार करोड़ का मेगा इवेंट है वर्ल्ड फूड इंडिया,इस इवेंट पर 65 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। केंद्र का दावा है कि इस इन्वेस्टमेंट से 10 लाख रोजगार पैदा होंगे। देश के 28 राज्य इस इवेंट के पार्टनर बनने वाले हैं। 50 ग्लोबल कंपनियों के सीईओ इवेंट में शिरकत करेंगे.

पहले सोशल मीडिया पर खबरें थीं कि इस आयोजन में खिचड़ी को नेशनल फूड भी डिक्लेयर किया जाएगा।लेकिन ये सिर्फ वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज कराने की कोशिश है।

क्या हैं खिचड़ी का इतिहास ..

खिचड़ी महज एक प्रकार का भोजन नहीं है,यह एक पारंपरिक पकवान है.खिचड़ी को भारत के त्यौहारों का मान समझा जाता है।खिचड़ी उत्सवों का एक अहम हिस्सा है.ऐसे कई त्यौहार आते हैं,जिसके दौरान खिचड़ी बनाया जाना अनिवार्य है।

इतिहास के पन्नों को खोलें तो यह भारत की संस्कृति को बखूबी दर्शाती है.खिचड़ी धर्म और संस्कृति का उदाहरण देती है। लोक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा का आरंभ भगवान शिव ने किया था.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मकर संक्रांति  तक खिचड़ी पर्व मनाया जाता है .यहां मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। मान्यता है कि बाबा गोरखनाथ जी भगवान शिव का ही रूप थे,उन्होंने ही खिचड़ी को भोजन के रूप में बनाना आरंभ किया.

पौराणिक कहानियो के अनुसार खिलजी ने जब आक्रमण किया तो उस समय नाथ योगी उनका डट कर मुकाबला किया था .उनसे जूझते-जूझते वह इतना थक जाते कि उन्हें भोजन पकाने का समय ही नहीं मिल पाता था.

जिससे उन्हें भूखे रहना पड़ता और वह दिन-ब-दिन कमजोर होते जा रहे थे,एक दिन अपने योगियों की कमजोरी को दूर करने लिए बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एकत्र कर पकाने को कहा.

देखते ही देखते एक ऐसा व्यंजन तैयार हुआ जो झट से पक भी गया और खाने में स्वादिष्ट भी था। इतना ही नहीं, इसे खाने से नाथ योगी अपने भीतर ऊर्जा को महसूस कर पा रहे थे.

कहानियो के अनुसार  इस सफल प्रयोग को देखते हुए बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम ‘खिचड़ी’ रखा.आज भी गोरखपुर में बाबा गोरखनाथ के मंदिर के समीप मकर संक्रांति के दिन से खिचड़ी मेला शुरू होता है.

बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाता है,और भक्तों को प्रसाद रूप में दिया जाता है.