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तानसेन से ज्यादा मधुर संगीत किसका है – अकबर बीरबल की कहानियां

बादशाह अकबर (Akbar) को अनेक कलाओं से प्रेम था, परंतु उन्हें संगीत का ज्यादा शौक था। उनके दरबार के नौ रत्नों में से एक तानसेन थे, जो अपने संगीत की वजह से सम्मान से जाने जाते थे।

तानसेन से ज्यादा मधुर संगीत किसका है - अकबर बीरबल की कहानियां

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एक बार अकबर (Akbar) तानसेन के संगीत से बहुत खुश हुए और उन्होंने तानसेन से कहा, ”तुम दुनिया के सबसे अच्छे कलाकार हो। तुम्हारा संगीत बहुत महान है, जिसकी किसी से तुलना नहीं की जा सकती।“

तानसेन आभार के साथ अभिभूत थे, किंतु वह एक सामान्य व्यक्ति थे। उन्होंने कहा, ”यह केवल आपकी राय है। दुनिया में बहुत से कलाकार मुझ से बेहतर हैं।“

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अकबर (Akbar) ने कहा, ”तानसेन मैंने बहुत संगीतकारों को सुना है। किंतु तुम्हारा संगीत उन सबसे बहुत अच्छा है।“

तानसेन ने कहा, ”मेरे मालिक! फिर तो आपको मेरे गुरू स्वामी हरिदास को जरूर सुनना चाहिए। वह मुझसे बहुत अच्छा गाते हैं।“

अकबर (Akbar) ने बहुत उत्सुकता से कहा, ”यदि ऐसा है तो मैं तुम्हारे गुरू का संगीत जरूर सुनूंगा। तुम्हें उनसे मेरे लिए संगीत गाने का अनुरोध करना होगा।“

तानसेन ने कहा, ”मेरे मालिक! स्वामी हरिदास कभी दरबार में नहीं आते हैं और न ही वह आपके लिए गायेंगे। किंतु यदि आप मेरे साथ उनके घर जाएंगे, तो आप उनका संगीत सुन सकते हैं।“ अकबर, बीरबल (Birbal) तानसेन के साथ स्वामी हरिदास के घर जाने को राजी हो गए।

अकबर (Akbar) स्वामी हरिदास के घर कुछ दिनों तक रूके किंतु गुरू ने उस बीच में कुछ भी नहीं गाया। अकबर (Akbar) अधीर हो रहे थे। उन्होंने तानसेन को बुलाया और कहा, ”स्वामी हरिदास कब गायेंगे? मैं यहां चार दिन से हूं किंतु अब तक उन्होंने संगीत का एक शब्द तक नहीं गाया। लगता है मुझे बिना संगीत सुने ही वापस महल में जाना होगा।“

तानसेन ने कहा, ”मेरे मालिक! गुरूजी केवल तभी गाते हैं जब उन्हें लगता है कि सही समय है। हमें धैर्य रखना चाहिए।“

फिर एक सुबह अकबर (Akbar) को एक बहुत ही मधुर स्वर ने नींद से जगा दिया। स्वामी हरिदास गाना गा रहे थे। उनकी आवाज इतनी गहरी और मीठी थी कि सम्राट पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो गये थे। उन्होंने तानसेन से कहा, ”तुम सही थे। वास्तव मे स्वामी हरिदास तुमसे बेहतर हैं।“

अकबर (Akbar) ने अब वापस महल लौटने का निश्चय किया। रास्ते में उन्होंने बीरबल (Birbal) से कहा, ”बीरबल, तानसेन का संगीत अपने गुरू के जैसा अच्छा क्यों नहीं है?“

बीरबल (Birbal) बोला, ”जहांपनाह! क्योंकि तानसेन आपको खुश करने के लिए गाता है और स्वामी हरिदास भगवान को खुश करने के लिए गाते हैं।“

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