अलंकार की परिभाषा, भेद एवं उदाहरण – Alankar In Hindi

अलंकार की परिभाषा Alankar In Hindi

काव्य में भाषा को शब्दार्थ से सुसज्जित तथा सुन्दर बना कर कविता का सौन्दर्य बढ़ाने वाले चमत्कार को ही अलंकार कहते हैं। अलंकार का शाब्दिक अर्थ है, ‘आभूषण’। जिस प्रकार सुवर्ण आदि के आभूषणों से शरीर की शोभा बढ़ती है उसी प्रकार कविता की सुन्दरता को बढ़ाने का साधन अलंकार है। अलंकार कविता की शोभा में चार चाँद लगा देते हैं।

अलंकार का महत्त्व Alankar ka mahattva –

कविता में अलंकारों का महत्त्व कुछ इस प्रकार है
1. अलंकारों से कविता की सुन्दरता बढ़ती है।
2. सुन्दरता बढ़ने से कविता का अधिक प्रभाव पड़ता है।
3. अलंकार की सहायता से कवि अपने भावों को सरलता तथा आकर्षक ढंग से प्रकट कर पाता है।

संज्ञा की परिभाषा, भेद, उदाहरण

अलंकार के भेद Alankar ke bhed

साहित्य अथवा कविता में शब्द और अर्थ दोनों महत्त्वपूर्ण होते हैं। कुछ अलंकार शब्दों के चमत्कार पर आधारित होते हैं तो कुछ अलंकार अर्थों के चमत्कार पर

जैसे
‘रघुपति राघव राजा राम’-पंक्ति में ‘र’ वर्ण की आवृत्ति एक से अधिक बार होने के कारण यहाँ शब्दों में चमत्कार है।
एक अन्य उदाहरण देखिए
ऋतु दुलार की निकल गई
नयन ही आँजती रही उम्र की दुल्हन।
उपर्यक्त पंक्तियों में तैयारी करते रहने में सारा जीवन बीत जाने का ढंग से प्रकट हुआ है। अतः यहाँ शब्दों में नहीं अर्थ में चमत्कार है।

अलंकारों के तीन भेद माने गए हैं

1. शब्दालंकार 2. अर्थालंकार 3. उभयालंकार

1. शब्दालंकार Shabdalanka

जहाँ शब्दों के प्रयोग से सौंदर्य में वृद्धि होती है और काव्य में चमत्कार आ जाता है, वहाँ शब्दालंकार माना जाता है। जहाँ कविता किसी शब्द विशेष के कारण सुन्दर हो तो वहाँ शब्दालंकार होता है।

शब्दालंकार का उदाहरण Example of Shabdalankar in Hindi –

काली घटा का घमण्ड घटा।
उपर्युक्त पंक्ति में ‘घटा’ शब्द का दो अलग-अलग अर्थों में प्रयोग हआ है उसकी आवृत्ति से पंक्ति में चमत्कार उत्पन्न हो गया है, अतः यहाँ शब्दालंकार है।

2. अर्थालंकार Arthalankar

जहाँ शब्दों के अर्थ से चमत्कार स्पष्ट हो, वहाँ अर्थालंकार माना जाता है। जहाँ कविता की सुन्दरता और उसका प्रभाव किसी शब्द विशेष पर निर्भर नहीं होता, बल्कि उनसे प्राप्त अर्थ सुन्दर, चमत्कृत और प्रभावशाली होता है वहाँ अर्थालंकार होता है।

अर्थालंकार का उदाहरण Example of Arthalankar in Hindi

हनूमान की पूँछ में, लगन न पाई आग।
लंका सगरी जल गई, गए निसाचर भाग।।
उपर्युक्त पंक्तियों में हनुमान की पूँछ में आग लगने से पहले ही लंका का जलना और राक्षसों का भाग जाना वर्णित है। अतः यहाँ अर्थ में चमत्कार होने के कारण अर्थालंकार है।

3. उभयालंकार Ubhayalankar

जहाँ कविता में प्रयुक्त शब्द और अर्थ दोनों में सुन्दरता हो, वहाँ उभयालंकार होता है।

उभयालंकार का उदाहरण Example of Ubhayalankar in Hindi
भावी-भारत-गौरव गढ़
इस पंक्ति में शब्दालंकार ‘अनुप्रास’ और अर्थालंकार ‘रूपक’ दोनों का प्रयोग है। अतः यहाँ उभयालंकार है।

प्रमुख शब्दालंकार Pramukh Shabdalankar In Hindi

1. अनुप्रास अलंकार Anupras Alankar in Hindi

परिभाषा- जहां एक पंक्ति में एक या अनेक वर्णों (अक्षरों) की एक या दो से अधिक आवृत्ति होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

अनुप्रास अलंकार का उदाहरण Example of Anupras Alankar in Hindi

1. कालिन्दी कूल कदंब की डारनि।
2. तरणि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।
3. कूकै लगी कोइले कदंबन पै बैठि फेरि।

अनुप्रास अलंकार के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:-
क) “मैया मोरी मैं नही माखन खायो”
[यहाँ पर ‘म’ वर्ण की आवृत्ति बार बार हो रही है।]
ख) “चारु चंद्र की चंचल किरणें”
[यहाँ पर ‘च’ वर्ण की आवृत्ति बार बार हो रही है।]
ग) “कन्हैया किसको कहेगा तू मैया”
[यहाँ पर ‘क’ वर्ण की आवृत्ति बार बार हो रही है।]

2. यमक अलंकार Yamak Alankar in Hindi

परिभाषा– जहाँ काव्य पंक्ति में एक ही शब्द दो अथवा दो से अधिक बार प्रयुक्त अर्थ में भिन्नता हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।

यमक अलंकार का उदाहरण Example of Yamak Alankar in Hindi
नगन जड़ाती वे नगन जड़ाती हैं
पर्यस्त काव्य पंक्ति में ‘नगन’ तथा ‘जड़ाती’ शब्दों का भिन्न-भिन्न अर्थो में हआ है। पहले ‘नगन’ शब्द का अर्थ हीरे-मोती है तथा दूसरे ‘नगन’ का अर्थ नग्न बहीन है. इसी प्रकार पहले ‘जड़ाती’ शब्द का अर्थ जड़वाना है, परन्तु दूसरे ‘जडाती’ शब्द का अर्थ जाड़े में मरना (सर्दी में मरना) है। अस्तु यहाँ यमक अलंकार है।

अन्य उदाहरण हैं
(क) कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय।
वा खाये बौराय जग, या पाये बौराय।।
यहाँ पर’कनक’ शब्द का प्रयोग दो बार हुआ है। प्रथम कनक का अर्थ है धतूरा तथा द्वितीय कनक का अर्थ है सोना। इस पंक्ति से कवि का आशय यहाँ पर यह है कि धतूरा एक मादक फल होता है, जिसके सेवन से व्यक्ति नशे में धुत्त हो जाता है।
परंतु इस मादक धतूरे से भी सौ गुना अधिक नशा सोने में अर्थात स्वर्ण में होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि धतूरा खाने से व्यक्ति अपने होशोहवास खो देता है, परन्तु स्वर्ण को पाने भर से ही कोई भी अच्छा व्यक्ति अपना मानसिक संतुलन खो देता है, एवं वह इसे जल्दी से जल्दी अपने हित में प्रयोग करने को सोचता है। अस्तु, यहाँ यमक अलंकार है।

(ख) तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती थी
उपर्युक्त पंक्ति में ‘बेर’ शब्द की आवृत्ति दो बार हुई है, जिसमे प्रथम बेर का अर्थ बेर फल से है तथा द्वितीय बेर का अर्थ बारी अथवा वक़्त से है। कवि के अनुसार वह स्त्री भोजन के रूप में सिर्फ तीन बेर ग्रहण करती थी, वह भी दिन में सिर्फ तीन बार। प्रत्येक बार ‘बेर’ शब्द का अर्थ भिन्न-भिन्न है। पहले ‘बेर’ का अर्थ बार-बार है जबकि दूसरे ‘बेर’ का अर्थ ‘फल-विशेष’ है। अस्तु, यहाँ यमक अलंकार है।

ग) “काली घटा का घमंड घटा”
यहाँ पर ‘घटा’ शब्द दो बार प्रयुक्त हुआ है, इसमें प्रथम घटा का अर्थ है बादल एवं द्वितीय घटा का अर्थ है घटना अर्थात कम होना। अतः हम कह सकते हैं कि यहाँ पर काव्य का अर्थ काले बादल का घमंड अर्थात प्रकोप कम होने से है। अस्तु, यहाँ यमक अलंकार है।

3. श्लेष अलंकार Shlesh Alankar in Hindi

परिभाषा- जहाँ एक शब्द का एक ही बार प्रयोग हो किन्तु उसके अर्थ अनेक निकलें, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

श्लेष अलंकार का उदाहरण Example of Shlesh Alankar in Hindi

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानूस, चून।।
उपर्युक्त उदाहरण में पानी’ शब्द के अनेक अर्थ निकलते हैं-यहाँ ‘पानी’ का अर्थ चमक, सम्मान और जल के रूप में लिया गया है। अस्तु, यहाँ श्लेष अलंकार है।
अन्य उदाहरण
(क) रहिमन जो गति दीप की कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो लगे बढे अँधेरो होय।।
उपर्युक्त दोहे के बारे और बढ़े शब्दों में श्लेष अलंकार है।
(ख) मेरे मानस के मोती
यहाँ ‘मानस’ शब्द के दो अर्थ हैं-मन और मान सरोवर। अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।

प्रमुख अर्थालंकार Pramukh Arthalankar In Hindi

1. उपमा अलंकार Upma Alankar in Hindi

परिभाषा– ‘उपमा’ का शाब्दिक अर्थ है-‘तुलना’ । जहाँ एक वस्तु अथवा प्राणी की तुलना अत्यन्त सादृश्य के कारण प्रसिद्ध वस्तु अथवा प्राणी से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है।

उपमा अलंकार का उदाहरण Example of Upma Alankar in Hindi

नीलिमा लतिका-सी तन्वंगी है
यहाँ नीलिमा के इकहरे और उसके आकर्षक भंगिमापूर्ण शरीर की तुलना अपने इकहरेपन और लहरीपन के लिए प्रसिद्ध लतिका (बेल) के साथ की गई है। अतः यहाँ उपमा अलंकार है

उपमा के चार तत्व है
1. उपमेंय Upmeya  2. उपमान Upman 3. सामान्य धर्म Samanya Dharm 4. वाचक शब्द Vachak Shabd

(क) उपमेय- जिसकी तुलना की जाती है अथवा जिसकी समता बताई जाती है, उसे उपमेय कहते हैं। जैसे-उपर्युक्त उदाहरण में नीलिमा की लतिका से तुलना की गई है, अतः नीलिमा उपमेय है।

(ख) उपमान- जिस वस्तु या व्यक्ति से उपमेय की तुलना की जाती है अथवा उपमेय को जिसके समान बताया जाता है, उपमान कहलाता है। यहाँ नीलिमा (उपमेय) की लतिका से तुलना की गई है, अतः यहाँ लतिका उपमान है।

(ग) समान/साधारण/सामान्य धर्म- जो गुण या विशेषता उपमेय और उपमान दोनों में समान है, उस विशेषता को प्रकट करने वाले शब्द को समान धर्म या साधारण धर्म अथवा सामान्य धर्म कहते हैं। उपर्युक्त उदाहरण में ‘तन्वंगी’ शब्द (इकहरा और लहरीलापन) नीलिमा के शरीर और लतिका में मिलने वाले समान गुण या विशेषता को बताता है। अतः यहाँ तन्वंगी’ समान या सामान्य धर्म है।

(घ) वाचक शब्द- जिस शब्द की सहायता से उपमेय और उपमान की तुलना की जाती है, उसे वाचक शब्द कहते हैं। जैसे-उपर्युक्त उदाहरण में ‘सी’ शब्द दोनों के सादृश्य को बताता है, अतः यह वाचक पद है।

किसी भी काव्य पंक्ति में उपमा के इन चारों तत्त्वों के होने पर पूर्णोपमा’ और इनमें से एक तत्त्व के न होने पर ‘लुप्तोपमा’ नाम से ‘उपमा अलंकार’ के दो भेद हैं

(1) पूर्णोपमा Purnopama – जहाँ उपमेय और उपमान में सादृश्य प्रकट करने वाले चारों अंगों को बताने वाले शब्दों का प्रयोग हो, वहाँ पूर्णोपमा अलंकार होता है।

पूर्णोपमा अलंकार का उदाहरण Example of Purnopama Alankar in Hindi

पीपर पात सरिस मन डोला
उपर्युक्त पंक्ति में मन उपमेय, पीपरपात उपमान, डोला सामान्य धर्म तथा सरिस वाचक शब्द है।
अतः यहाँ उपमा के चारों तत्त्वों के विद्यमान होने के कारण पूर्णोपमा अलंकार है।

अन्य उदाहरण-हाय फूल-सी कोमल बच्ची। हुई राख की थी ढेरी।।

यहाँ फूल उपमय, बच्ची उपमान, कोमल सामान्य धर्म और सी वाचक शब्द हैं। अतः यहाँ पूर्णोपमा अलंकार है।

(ii) लुप्तोपमा Luptopama – उपमा के चारों अंगों व तत्त्वों में से किसी एक के लोप हो जाने अर्थात् उसके लिए शब्द का प्रयाग न होने के कारण लुप्तोपमा अलंकार हो जाता है।

लुप्तोपमा अलंकार का उदाहरण Example of Luptopama Alankar in Hindi
अरविंद से शिशुवृंद कैसे सो रहे?
उपर्युक्त पंक्ति में शिशुवृंद (उपमेय), अरविंद (उपमान) तथा सो रहे (वाचक | शब्द) हैं। परन्तु यहाँ सामान्य धर्म नहीं है। अस्तु यहाँ लुप्तोपमा अलंकार है।

अन्य उदाहरण–राधा मुख पूनो के चाँद समान।
उपर्युक्त उदाहरण में राधामुख (उपमेय), चाँद (उपमान), समान (वाचक शब्द) तो । हैं, परन्तु चाँद के समान कैसा? अर्थात् दोनों में मिलने वाले गण का कथन (सामान्य धर्म) नहीं है। अतः यहाँ लुप्तोपमा अलंकार है।

उपमा के अन्य उदाहरण हैं–
(क) नीलगगन-सा शान्त हृदय था रो रहा।
(ख) हरिपद कोमल कमल से ।
(ग) मुख बाल-रवि-सम लाल होकर ज्वाला-सा बोधित हुआ।

2. रूपक अलंकार Roopak Alankar In Hindi

परिभाषा- जहाँ बहुत समानता के कारण उपमेय और उपमान में एकरूपता दिखाई देती है, वहाँ रूपक अलंकार होता है। अत्यधिक समानता के कारण उपमेय और उपमान में अन्तर न बताकर उपमेय को ही उपमान कह दिया जाता है।

रूपक अलंकार का उदाहरण Example of Roopak Alankar in Hindi
”चरण-कमल बन्दौ हरि राई”
यहाँ चरण (उपमेय) और कमल (उपमान) में कोई अन्तर नहीं किया गया है.अर्थात दोनों में एकरूपता दिखाई गई है। अतः यहाँ रूपक अलंकार है।

अन्य उदाहरण हैं-
(क) आए महंत बसंत। उपर्युक्त पद में ‘बसंत पर महंत’ का आरोप होने से रूपक अलंकार है।
(ख) मैं तो चंद्र खिलौना लैहों।
इस पंक्ति में चन्द्रमा (उपमेय) में खिलौना (उपमान) का आरोप होने से रूपक अलंकार है।

3. उत्प्रेक्षा अलंकार Utpreksha Alankar In Hindi

परिभाषा- जहाँ उपमेय और उपमान के भिन्न होते हुए भी उनमें समानता की सम्भावना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। इसमें न तुलना होती है, न अभेद आरोप, बल्कि कहा जाता है कि ऐसा मान लो या कल्पना कर लो। इसमें मनो, मानो, मन्, जानो, जनहूँ, मनहूँ आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

उत्प्रेक्षा अलंकार का उदाहरण Example of Utpreksha Alankar in Hindi

उसका मारे क्रोध के तन काँपने लगा।
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।।
उपर्युक्त पंक्तियों में क्रोध से काँपते शरीर को तूफानी समुद्र मान लेने की बात की गई है। अस्तु, यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।

अन्य उदाहरण
(क) मुख मानो चन्द्र है।
उपर्युक्त पद में मुख में चन्द्रमा की सम्भावना की गई है। अतः यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।
(ख) कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।
उपर्युक्त पद में ‘उत्तरा के अश्रुपूर्ण नेत्रों’ (उपमेय) में ‘ओस जल-कण युक्त पंकज’ (उपमान) की सम्भावना की गई है। अस्तु, यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।

4. अतिशयोक्ति अलंकार Atishyokti Alankar

परिभाषा- जहाँ किसी कार्य, वस्तु या बात का लोक-सीमा से बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया जाता है, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है। बढा-चढाकर कहने से अभिप्राय यह है कि साधारण रूप से लोक या जीवन में वस्तु जैसी है अथवा जो कार्य जिस ढंग से होता है व जो बात जैसी भी कही जाती है उससे अधिक सुन्दर, बड़ा या छोटापन या बात में तेजी आदि उसमें वर्णन कर दी जाती हैं।

अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण Example of Atishyokti Alankar in Hindi

देख लो साकेत नगरी है यही,
स्वर्ग से मिलने गगन को जा रही।
यहाँ साकेत नगरी के भवनों की ऊंचाई का एक सीमा से अधिक बटाटा वर्णन किया गया है। अतः यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।

अन्य उदाहरण हैं
(क) आगे नदिया पड़ी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार ।।
उपर्युक्त पद में चेतक की तीव्र गति का बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन किया गया है। सोचने की क्रिया पूर्ण होने से पहले ही घोड़े (चेतक) का नदी के पार पहुंचना लोक सीमा का अतिक्रमण है। अतः यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।

(ख) हनूमान की पूंछ में लगन न पाई आग।
लंका सगरी जलि गई, गए निशाचर भाग।।
उपर्युक्त पद में कारण अभी हुआ नहीं अर्थात् आग अभी लगी नहीं कि सारी लंका के जल जाने का कार्य पूर्ण हो गया अर्थात् लंका जल गई। अतः यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।

5. अन्योक्ति अलंकार Anyokti Alankar In Hindi

परिभाषा- जहाँ उपमान के वर्णन के माध्यम से उपमेय का वर्णन होता है, वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है। इसमें अप्रस्तुत (उपमान) के माध्यम से प्रस्तुत (उपमेय) का वर्णन होता है। अतः इस अलंकार को अप्रस्तुत प्रशंसा अलंकार भी कहते हैं।

अन्योक्ति अलंकार का उदाहरण Example of ANyokti Alankar in Hindi

स्वारथ सुकृत न स्रम वृथा, देखु विहंग विचारि।
बाज पराए पानि पर तू पंछीउ न मारि।।
उपर्युक्त दोहे में बाज (उपमान) के माध्यम से राजा मानसिंह (उपमेय) को सम्बोधन किया गया है। अतः यहाँ अन्योक्ति अलंकार है।

अन्य उदाहरण है
जिन दिन देखे वे कुसुम, गई सु बीति बहार ।
अब अलि रही गुलाब में, अपत कँटीली डार।।
उपर्युक्त पद में गुलाब और भौरे (उपमान) के माध्यम से आश्रित कवि और आश्रयदाता राजा (उपमेय) की प्रतीति होने से यहाँ अन्योक्ति अलंकार है।

6. भ्रांतिमान अलंकार Bhrantiman Alankar in Hindi:-

यह अलंकार वहां पर प्रयुक्त होता है जब किसी गुण, अथवा रूप की समानता की वजह से उपमेय में उपमान की निश्चयात्मकता प्रतीत होती है, तथा बाद में वही, क्रियात्मक परिस्थिति में परिवर्तित हो जाती है।अर्थात जब उपमेय में उपमान होने का भ्रम हो जाये।

भ्रांतिमान अलंकार का उदाहरण Example of Bhrantiman Alankar in Hindi :

“पायें महावर देन को, नाइन बैठी आय,
फिरि-फिरि जानि महावरी, एड़ी भीडत आय”।

7) संदेह अलंकार Sandeh Alankar in Hindi:-

यह अलंकार तब प्रयुक्त किया जाता है, जब किसी एक वस्तु का उसी वस्तु के समान रूप की दूसरी वस्तु होने का संदेह किया जाये और वह निश्चय कर पाने में असमर्थ हो, तब वहां संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है। अर्थात जहाँ पर किसी व्यक्ति या वास्तु को देखकर संशय का भाव बना रहे। इसी कारण से इसे सन्देह अलंकार कहा जाता है।

सन्देह अलंकार का उदाहरण Example of Sandeh Alankar in Hindi

“यह काया है या शेष उसी की छाया,
क्षण भर उसकी कुछ नहीं समझ में आया।”

8) विभावना अलंकार Vibhavana Alankar in Hindi:-

विभावना अलंकार का प्रयोग तब किया जाता है, जब किसी निश्चित वजह अथवा कारण की अनुपस्थिति होने के बावजूद, उस कार्य के उत्पन्न होने का विवरण देकर विश्लेषण किया जाता है। अर्थात कारण की उपस्थिति में भी कार्य की पूर्ति हो जाये।

विभावना अलंकार का उदाहरण Example of Vibhavana Alankar in Hindi

बिनु पगु चलै, सुनै बिनु काना,
कर बिनु कर्म, करै विधि नाना,
आनन रहित, सकल रसु भोगी,
बिनु वाणी वक्ता बड़ जोगी।”

9) मानवीकरण अलंकार Manavikaran Alankar in Hindi :-

मानवीकरण अलंकार का प्रयोग तब किया जाता है, जब किसी निर्जीव अथवा सजीव वस्तु की तुलना किसी व्यक्ति, पशु अथवा जीव की गतिविधियों तथा क्रियाशीलता से की जाती है, अर्थात जब कोई निर्जीव वस्तु को मानव रूप देकर उससे मानव द्वारा की जाने वाली गतिविधियों का कर्ता मान लिया जाता है।

मानवीकरण अलंकार का उदाहरण Example of Manavikaran Alankar in Hindi

बीती विभावरी जाग री,
अम्बर पनघट में डुबो रही,तारा घट उषा नागरी।”

अलंकार सम्बन्धी प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित काव्यांशों में प्रयुक्त अलंकारों को स्पष्ट कीजिए–
(क) खंडपरस ………………….. बरिबंड।।
(ख) सोभित मंचन …………….. देखन आई।।
(ग) सब छत्रिन आदि ……….. ज्योति जगे।।
(घ) दानिन के शील, ………….. राय के।।
(ङ) प्रथम टंकोर ……………..” ब्रांड को।।
उत्तर–
(क) इन पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है; क्योंकि यहाँ शिवधनुष में शेषनाग की शोभा की सम्भावना की गई है।
(ख) इन पंक्तियों में ‘स’ और ‘ई’ वर्गों की पुनरावृत्ति के कारण अनुप्रास तथा हाथीदाँत के मंचों में चन्द्रमण्डल की चाँदनी की सम्भावना करने के कारण उत्प्रेक्षा अलंकार है।
(ग) विभिन्न वर्गों की पुनरावृत्ति के कारण अनुप्रास तथा उपमान ज्योति से उपमेय जनक की कान्ति का आधिक्य दिखाने के कारण व्यतिरेक अलंकार है।
(घ) इन पंक्तियों में वर्णों की पुनरावृत्ति के कारण अनुप्रास, राम–लक्ष्मण की तुलना विष्णु, प्रभु, इन्द्र आदि से करने के कारण उपमा तथा राम–लक्ष्मण को शरीरधारी होने पर भी जीवनमुक्त कहने एवं जनक को राजा होते हुए भी योगी कहने में विरोधाभास अलंकार है।
(ङ) इन पंक्तियों में अनुप्रास के अतिरिक्त धनुर्भंग की ध्वनि का बढ़ा–चढ़ाकर वर्णन करने से अतिशयोक्ति अलंकार है।

प्रश्न 2.
‘दिया बढ़ाएँ हूँ रहै, बड़ौ उज्यारौ गेह’ में कौन–सा अलंकार है और क्यों?
उत्तर–
नायिका के शरीर की कान्ति का बढ़ा–चढ़ाकर वर्णन करने के कारण अतिशयोक्ति तथा दीपक के बुझा देने पर भी घर में उजाला होने की बात कहने में विरोधाभास अलंकार है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित उद्धरणों में प्रयुक्त अलंकार बताइए
(क) खग–कुल, कुल–कुल–सा बोल रहा। (ख) कुसुम–वैभव में लता समान। (ग) चन्द्रिका से लिपटा घनश्याम। (घ) खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ–बन बीच गुलाबी रंग।
उत्तर-
(क) अनुप्रास और यमक,
(ख) उपमा,
(ग) रूपक,
(घ) उपमा।

अलंकारों से सम्बन्धित बहुविकल्पीय प्रश्न एवं उनके उत्तर उपयुक्त विकल्प द्वारा निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1. ‘तरनि–तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।’
उपर्युक्त पंक्ति में कौन–सा अलंकार है
(क) यमक (ख) श्लेष (ग) अनुप्रास (घ) रूपक।
उत्तर :
(ग) अनुप्रास

2. जहाँ एक शब्द अथवा शब्द–समूह का एक से अधिक बार प्रयोग हो, किन्तु उसका अर्थ प्रत्येक
बार भिन्न हो, वहाँ कौन–सा अलंकार होता है
(क) अनुप्रास (ख) श्लेष (ग) यमक (घ) भ्रान्तिमान्।
उत्तर :
(ग) यमक

3. ‘ऊधौ जोग जोग हम नाहीं।’
इस पंक्ति में कौन–सा अलंकार है
(क) अनुप्रास (ख) यमक (ग) श्लेष (घ) उत्प्रेक्षा।
उत्तर :
(ख) यमक

4. जहाँ कोई शब्द एक बार प्रयुक्त हो, किन्तु प्रसंग–भेद से उसके अर्थ एक से अधिक हों, वहाँ अलंकार होता है
(क) श्लेष (ख) रूपक (ग) उत्प्रेक्षा (घ) सन्देह।
उत्तर :
(क) श्लेष

5. जहाँ पर उपमेय की उपमान से किसी समान गुणधर्म के आधार पर समानता या तुलना की जाए, वहाँ अलंकार होता है
(क) यमक (ख) उत्प्रेक्षा (ग) रूपक (घ) उपमा।
उत्तर :
(घ) उपमा।

6. उपमेय में उपमान का भेदरहित आरोप किस अलंकार में होता है अथवा जहाँ उपमेय पर अप्रस्तुत उपमान आरोपित हो, वहाँ अलंकार होता है
(क) उपमा (ख) रूपक (ग) उत्प्रेक्षा (घ) प्रतीप।
उत्तर :
(ख) रूपक

7. उपमेय में उपमान की सम्भावना किस अलंकार में होती है अथवा जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाए, वहाँ अलंकार होता है
(क) सन्देह (ख) उत्प्रेक्षा (ग) भ्रान्तिमान् (घ) अतिशयोक्ति।
उत्तर :
(ख) उत्प्रेक्षा

8. कैधौं ब्योमबीथिका भरे हैं भूरि धूमकेतु, बीररस बीर तरवारि–सी उधारी है।’
उपर्युक्त पद में कौन–सा अलंकार है
(क) अनन्वय (ख) भ्रान्तिमान् (ग) सन्देह (घ) दृष्टान्त।
उत्तर :
(ग) सन्देह

9. ‘अजौं तरय्यौना ही रह्यौ श्रुति सेवत इक रंग।
नाक बास बेसरि लह्यौ, बसि मुकतनु के संग।’
इस दोहे में अलंकार है
(क) यमक (ख) श्लेष (ग) उत्प्रेक्षा (घ) उपमा।
उत्तर :
(ख) श्लेष

10. ‘अम्बर पनघट में डुबो रही
तारा–घट ऊषा–नागरी।’ ।
उपर्युक्त पद में अलंकार है
(क) रूपक (ख) श्लेष (ग) उत्प्रेक्षा (घ) उपमा।
उत्तर :
(क) रूपक

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Alankar in Roman Hindi

alankaar do shabdon se milakar bana hota hai – alam + kaar. yahaan par alam ka arth hota hai aabhooshan. maanav samaaj bahut hee saundaryopaasak hai usakee pravartee ke kaaran hee alankaaron ko janm diya gaya hai. jis tarah se ek naaree apanee sundarata ko badhaane ke lie aabhooshanon ko prayog mein laatee hain usee prakaar bhaasha ko sundar banaane ke lie alankaaron ka prayog kiya jaata hai. athaart jo shabd kaavy kee shobha ko badhaate hain use alankaar kahate hain.

saahityon mein ras aur shabd kee shaktiyon kee praasangikata gady aur pady donon mein hee kee jaatee hai parantu kavita mein in donon ke alaava bhee alankaar, chhand aur bimb ka prayog kiya jaata hai jo kavita mein vishishtata laane ka kaam karata hai haalaanki paathyakram mein kavitaon ko apana aadhaar maanakar hee alankaar, chhand, bimb aur ras kee vivechana kee jaatee hai.

udaaharan :- bhooshan bina na sohee – kavita, banita mitt.

alankaar ke prayog ka aadhaar
koee bhee kavee kathaneey vaastu ko achchhee se achchhee abhivyakti dene kee soch se alankaaron ko prayukt karata hai jinake dvaara vah apane bhaavon ko utkarsh pradaan karata hai ya phir roop, gun ya kriya ka adhik anubhav karaata hai. kavee ke man ka oj hee alankaaron ka asalee kaaran hota hai. jo vyakti ruchibhed aaenbar ya chamatkaarapriy hota hai vah vyakti apane shabdon mein shabdaalankaar ka prayog karata hai lekin jo vyakti bhaavuk hota hai vah vyakti arthaalankaar ka prayog karata hai.

alankaar ke bhed
shabdaalankaar
arthaalankaar
ubhayaalankaar
1. shabdaalankaar
shabdaalankaar do shabdon se milakar bana hota hai – shabd + alankaar. shabd ke do roop hote hain – dhvanee aur arth. dhvani ke aadhaar par shabdaalankaar kee srshtee hotee hai. jab alankaar kisee vishesh shabd kee sthiti mein hee rahe aur us shabd kee jagah par koee aur paryaayavaachee shabd ke rakh dene se us shabd ka astitv na rahe use shabdaalankaar kahate hain.

arthaart jis alankaar mein shabdon ko prayog karane se chamatkaar ho jaata hai aur un shabdon kee jagah par samaanaarthee shabd ko rakhane se vo chamatkaar samaapt ho jaaye vahaan shabdaalankaar hota hai.

shabdaalankaar ke bhed :-
anupraas alankaar
yamak alankaar
punarukti alankaar
vipsa alankaar
vakrokti alankaar
shalesh alankaar
1. anupraas alankaar kya hota hai :-
anupraas shabd do shabdon se milakar bana hai – anu + praas | yahaan par anu ka arth hai- baar-baar aur praas ka arth hota hai – varn. jab kisee varn kee baar – baar aavartee ho tab jo chamatkaar hota hai use anupraas alankaar kahate hai.

jaise :- jan ranjan manjan danuj manuj roop sur bhoop.
vishv badar iv dhrt udar jovat sovat soop..

anupraas ke bhed :-
chhekaanupraas alankaar
vrtyaanupraas alankaar
laataanupraas alankaar
antyaanupraas alankaar
shrutyaanupraas alankaar
1. chhekaanupraas alankaar kya hota hai :- jahaan par svarup aur kram se anek vyanjanon kee aavrti ek baar ho vahaan chhekaanupraas alankaar hota hai.

jaise :- reejhi reejhi rahasi rahasi hansi hansi uthai.
saansain bhari aansoo bhari kahat daee daee..

2. vrtyaanupraas alankaar kya hota hai :- jab ek vyanjan kee aavartee anek baar ho vahaan vrtyaanupraas alankaar kahate hain.

jaise :- “chaamar-see, chandan – see, chand – see,
chaandanee chamelee chaaru chand-sughar hai.”

3. laataanupraas alankaar kya hota hai :- jahaan shabd aur vaakyon kee aavartee ho tatha pratyek jagah par arth bhee vahee par anvay karane par bhinnata aa jaaye vahaan laataanupraas alankaar hota hai. athaart jab ek shabd ya vaaky khand kee aavartee usee arth mein ho vahaan laataanupraas alankaar hota hai.

jaise :- tegabahaadur, haan, ve hee the guru-padavee ke paatr samarth,
tegabahaadur, haan, ve hee the guru-padavee thee jinake arth.

4. antyaanupraas alankaar kya hota hai :- jahaan ant mein tuk milatee ho vahaan par antyaanupraas alankaar hota hai.

jaise :- “laga dee kisane aakar aag.
kahaan tha too sanshay ke naag?”

5. shrutyaanupraas alankaar kya hota hai :- jahaan par kaanon ko madhur lagane vaale varnon kee aavartee ho use shrutyaanupraas alankaar kahate hai.

jaise :- “dinaant tha, the deenanaath dubate,
sadhenu aate grh gvaal baal the.”

2. yamak alankaar kya hota hai :-
yamak shabd ka arth hota hai – do. jab ek hee shabd jyaada baar prayog ho par har baar arth alag-alag aaye vahaan par yamak alankaar hota hai.

jaise :- kanak kanak te saugunee, maadakata adhikaay.
va khaaye baurae nar, va paaye bauraaye.

3. punarukti alankaar kya hai :-
punarukti alankaar do shabdon se milakar bana hai – pun: +ukti. jab koee shabd do baar doharaaya jaata hai vahaan par punarukti alankaar hota hai.

4. vipsa alankaar kya hai :-
jab aadar, harsh, shok, vismayaadibodhak aadi bhaavon ko prabhaavashaalee roop se vyakt karane ke lie shabdon kee punaraavrtti ko hee vipsa alankaar kahate hai.

jaise :- mohi-mohi mohan ko man bhayo raadhaamay.
raadha man mohi-mohi mohan mayee-mayee..

5. vakrokti alankaar kya hai :-
jahaan par vakta ke dvaara bole gae shabdon ka shrota alag arth nikaale use vakrokti alankaar kahate hai.

vakrokti alankaar ke bhed :-
kaaku vakrokti alankaar
shlesh vakrokti alankaar
1. kaaku vakrokti alankaar kya hai :- jab vakta ke dvaara bole gaye shabdon ka usakee kanth dhvanee ke kaaran shrota kuchh aur arth nikaale vahaan par kaaku vakrokti alankaar hota hai.

jaise :- main sukumaari naath ban jogoo.

2. shlesh vakrokti alankaar kya hai :- jahaan par shlesh kee vajah se vakta ke dvaara bole gae shabdon ka alag arth nikaala jaaye vahaan shlesh vakrokti alankaar hota hai.

jaise :- ko tum hau it aaye kahaan ghanasyaam hau tau kitahoon baraso.
chitachor kahaavat hai ham tau tahaan jaahun jahaan dhan sarason..

6. shlesh alankaar kya hota hai :-
jahaan par koee ek shabd ek hee baar aaye par usake arth alag alag nikalen vahaan par shlesh alankaar hota hai.

jaise :- rahiman paanee raakhie bin paanee sab soon.
paanee gae na ubarai motee maanas choon..

Arth – yah doha raheem jee ka hai jisamen raheem jee ne paanee ko teen arthon mein prayog kiya hai jisamen paanee ka pahala arth aadamee ya manushy ke sandarbh mein hai jisaka matalab vinamrata se hai kyonki manushy mein hamesha vinamrata honee chaahie. paanee ka doosara arth chamak ya tej se hai jisake bina motiyon ka koee mooly nahin hota hai. paanee ka teesara arth jal se hai jise aate ko goothane ya jodane mein dikhaaya gaya hai kyonki paanee ke bina aate ka astitv namr nahin ho sakata hai aur motee ka mooly usakee chamak ke bina nahin ho sakata hai usee tarah se manushy ko bhee apane vyavahaar ko hamesha paanee kee hee bhaanti vinamr rakhana chaahie jisake bina usaka moolyahraas hota hai.

shlesh alankaar ke bhed :
abhang shlesh alankaar
sabhang shlesh alankaar
1. abhang shlesh alankaar :- jis alankaar mein shabdon ko bina tode hee ek se adhik ya anek arth nikalate hon vahaan par abhang shlesh alankaar hota hai.

jaise :- rahiman paanee raakhie, bin paanee sab soon.
paanee gae na oobarai, motee, maanus, choon..

Arth – yah doha raheem jee ka hai jisamen raheem jee ne paanee ko teen arthon mein prayog kiya hai jisamen paanee ka pahala arth aadamee ya manushy ke sandarbh mein hai jisaka matalab vinamrata se hai kyonki manushy mein hamesha vinamrata honee chaahie. paanee ka doosara arth chamak ya tej se hai jisake bina motiyon ka koee mooly nahin hota hai. paanee ka teesara arth jal se hai jise aate ko goothane ya jodane mein dikhaaya gaya hai kyonki paanee ke bina aate ka astitv namr nahin ho sakata hai aur motee ka mooly usakee chamak ke bina nahin ho sakata hai usee tarah se manushy ko bhee apane vyavahaar ko hamesha paanee kee hee bhaanti vinamr rakhana chaahie jisake bina usaka moolyahraas hota hai.

2. sabhang shlesh alankaar :- jis alankaar mein shabdon ko todana bahut adhik aavashyak hota hai kyonki shabdon ko tode bina unaka arth na nikalata ho vahaan par sabhang shlesh alankaar hota hai.

jaise :- sakhar sukomal manju, dosharahit dooshan sahit.

2. arthaalankaar kya hota hai
jahaan par arth ke maadhyam se kaavy mein chamatkaar hota ho vahaan arthaalankaar hota hai.

arthaalankaar ke bhed
upama alankaar
roopak alankaar
utpreksha alankaar
drashtaant alankaar
sandeh alankaar
atishyokti alankaar
upameyopama alankaar
prateep alankaar
ananvay alankaar
bhraantimaan alankaar
deepak alankaar
apahrti alankaar
vyatirek alankaar
vibhaavana alankaar
visheshokti alankaar
arthaantaranyaas alankaar
ullekh alankaar
virodhaabhaash alankaar
asangati alankaar
maanaveekaran alankaar
anyokti alankaar
kaavyaling alankaar
svabhaavotee alankaar
1. upama alankaar kya hota hai :-

upama shabd ka arth hota hai – tulana. jab kisee vyakti ya vastu kee tulana kisee doosare yakti ya vastu se kee jae vahaan par upama alankaar hota hai.

jaise :- saagar-sa gambheer hraday ho,
giree-sa ooncha ho jisaka man.

upama alankaar ke ang :-

upamey
upamaan
vaachak shabd
saadhaaran dharm
1. upamey kya hota hai :- upamey ka arth hota hai – upama dene ke yogy. agar jis vastu kee samaanata kisee doosaree vastu se kee jaaye vahaan par upamey hota hai.

2.upamaan kya hota hai :- upamey kee upama jisase dee jaatee hai use upamaan kahate hain. athaart upamey kee jis ke saath samaanata bataee jaatee hai use upamaan kahate hain.

3. vaachak shabd kya hota hai :- jab upamey aur upamaan mein samaanata dikhaee jaatee hai tab jis shabd ka prayog kiya jaata hai use vaachak shabd kahate hain.

4. saadhaaran dharm kya hota hai :- do vastuon ke beech samaanata dikhaane ke lie jab kisee aise gun ya dharm kee madad lee jaatee hai jo donon mein vartamaan sthiti mein ho usee gun ya dharm ko saadhaaran dharm kahate hain.

upama alankaar ke bhed :-

poornopama alankaar
luptopama alankaar
1. poornopama alankaar kya hota hai :- isamen upama ke sabhee ang hote hain – upamey, upamaan, vaachak shabd, saadhaaran dharm aadi ang hote hain vahaan par poornopama alankaar hota hai.

jaise :- saagar-sa gambheer hraday ho,
giree-sa ooncha ho jisaka man.

2. luptopama alankaar kya hota hai :- isamen upama ke chaaron agon mein se yadi ek ya do ka ya phir teen ka na hona paaya jae vahaan par luptopama alankaar hota hai.

jaise :- kalpana see atishay komal. jaisa ham dekh sakate hain ki isamen upamey nahin hai to isalie yah luptopama ka udahaaran hai.

2. roopak alankaar kya hota hai :-

jahaan par upamey aur upamaan mein koee antar na dikhaee de vahaan roopak alankaar hota hai athaart jahaan par upamey aur upamaan ke beech ke bhed ko samaapt karake use ek kar diya jaata hai vahaan par roopak alankaar hota hai.

jaise :- “udit uday giree manch par, raghuvar baal patang.
vigase sant-saroj sab, harashe lochan bhrang..”

roopak alankaar kee nimn baaten :-

upamey ko upamaan ka roop dena.
vaachak shabd ka lop hona.
upamey ka bhee saath mein varnan hona.
roopak alankaar ke bhed :-

sam roopak alankaar
adhik roopak alankaar
nyoon roopak alankaar
1. sam roopak alankaar kya hota hai :- isamen upamey aur upamaan mein samaanata dikhaee jaatee hai vahaan par sam roopak alankaar hota hai.

jaise :- beetee vibhaavaree jaagaree. ambar – panaghat mein duba rahee, taaraghat usha – naagaree.

2. adhik roopak alankaar kya hota hai :- jahaan par upamey mein upamaan kee tulana mein kuchh nyoonata ka bodh hota hai vahaan par adhik roopak alankaar hota hai.

3. nyoon roopak alankaar kya hota hai :- isamen upamaan kee tulana mein upamey ko nyoon dikhaaya jaata hai vahaan par nyoon roopak alankaar hota hai.

jaise :- janam sindhu vish bandhu puni, deen malin sakalank
siy mukh samata paavakimi chandr baapuro rank..

3. utpreksha alankaar kya hota hai :-

jahaan par upamaan ke na hone par upamey ko hee upamaan maan liya jae. athaart jahaan par aprastut ko prastut maan liya jae vahaan par utpreksha alankaar hota hai. agar kisee pankti mein manu, janu, mere jaanate, manahu, maano, nishchay, eev aadi aate hain vahaan par utpreksha alankaar hota hai.

jaise :- sakhi sohat gopaal ke, ur gunjan kee maal
baahar sohat manu piye, daavaanal kee jvaal..

utpreksha alankaar ke bhed :-

vastupreksha alankaar
hetupreksha alankaar
phalotpreksha alankaar
1. vastupreksha alankaar kya hota hai :- jahaan par prastut mein aprastut kee sambhaavana dikhaee jae vahaan par vastupreksha alankaar hota hai.

jaise :- “sakhi sohat gopaal ke, ur gunjan kee maal.
baahar lasat mano piye, daavaanal kee jvaal..”

2. hetupreksha alankaar kya hota hai :- jahaan ahetu mein hetu kee sambhaavana dekhee jaatee hai. athaart vaastavik kaaran ko chhodakar any hetu ko maan liya jae vahaan hetupreksha alankaar hota hai.

3. phalotpreksha alankaar kya hota hai :- isamen vaastavik phal ke na hone par bhee usee ko phal maan liya jaata hai vahaan par phalotpreksha alankaar hota hai.

jaise :- khanjareer nahin lakhi parat kuchh din saanchee baat.
baal dragan sam heen ko karan mano tap jaat..

4. drshtaant alankaar kya hota hai :-

jahaan do saamaany ya donon vishesh vaakyon mein bimb-pratibimb bhaav hota ho vahaan par drshtaant alankaar hota hai. is alankaar mein upamey roop mein kaheen gaee baat se milatee-julatee baat upamaan roop mein dusare vaaky mein hotee hai. yah alankaar ubhayaalankaar ka bhee ek ang hai.

jaise :- ek myaan mein do talavaaren, kabhee nahin rah sakatee hain.

kisee aur par prem naariyaan, pati ka kya sah sakatee hai..

5. sandeh alankaar kya hota hai :-

jab upamey aur upamaan mein samata dekhakar yah nishchay nahin ho paata ki upamaan vaastav mein upamey hai ya nahin. jab yah duvidha banatee hai , tab sandeh alankaar hota hai athaart jahaan par kisee vyakti ya vastu ko dekhakar sanshay bana rahe vahaan sandeh alankaar hota hai. yah alankaar ubhayaalankaar ka bhee ek ang hai.

jaise :- yah kaaya hai ya shesh usee kee chhaaya,
kshan bhar unakee kuchh nahin samajh mein aaya.

sandeh alankaar kee mukhy baaten :-

vishay ka anishchit gyaan.
yah anishchit samaanata par nirbhar ho.
anishchay ka chamatkaarapoorn varnan ho.
6. atishyokti alankaar kya hota hai :-

jab kisee vyakti ya vastu ka varnan karane mein lok samaaj kee seema ya maryaada toot jaaye use atishyokti alankaar kahate hain.

jaise :- hanumaan kee poonchh mein lagan na paayee aagi.
sagaree lanka jal gaee, gaye nisaachar bhaagi.

7. upameyopama alankaar kya hota hai :-

is alankaar mein upamey aur upamaan ko paraspar upamaan aur upamey banaane kee koshish kee jaatee hai isamen upamey aur upamaan kee ek doosare se upama dee jaatee hai.

jaise :- tau mukh sohat hai sasi so aru sohat hai sasi to mukh jaiso.

8. prateep alankaar kya hota hai :-

isaka arth hota hai ulta. upama ke angon mein ult – pher karane se athaart upamey ko upamaan ke samaan na kahakar ulat kar upamaan ko hee upamey kaha jaata hai vahaan prateep alankaar hota hai. is alankaar mein do vaaky hote hain ek upamey vaaky aur ek upamaan vaaky. lekin in donon vaakyon mein sadrshy ka saaph kathan nahin hota, vah vyanjit rahata hai. in donon mein saadhaaran dharm ek hee hota hai parantu use alag-alag dhang se kaha jaata hai.

jaise :- “netr ke samaan kamal hai.

9. ananvay alankaar kya hota hai :-

jab upamey kee samata mein koee upamaan nahin aata aur kaha jaata hai ki usake samaan vahee hai, tab ananvay alankaar hota hai.

jaise :- “yadyapi ati aarat – maarat hai. bhaarat ke sam bhaarat hai.

10. bhraantimaan alankaar kya hota hai :-

jab upamey mein upamaan ke hone ka bhram ho jaaye vahaan par bhraantimaan alankaar hota hai athaart jahaan upamaan aur upamey donon ko ek saath dekhane par upamaan ka nishchayaatmak bhram ho jaaye matalab jahaan ek vastu ko dekhane par doosaree vastu ka bhram ho jae vahaan bhraantimaan alankaar hota hai. yah alankaar ubhayaalankaar ka bhee ang maana jaata hai.

jaise :- paayen mahaavar den ko naeen baithee aay .
phiri-phiri jaani mahaavaree, edee bheedat jaaye..

11. deepak alankaar kya hota hai :-

jahaan par prastut aur aprastut ka ek hee dharm sthaapit kiya jaata hai vahaan par deepak alankaar hota hai.

jaise :- chanchal nishi udavas rahen, karat praat vasiraaj.
aravindan mein indira, sundari nainan laaj..

12. apahrti alankaar kya hota hai :-

apahrti ka arth hota hai chhipaav. jab kisee saty baat ya vastu ko chhipaakar usake sthaan par kisee jhoothee vastu kee sthaapana kee jaatee hai vahaan apahrti alankaar hota hai. yah alankaar ubhayaalankaar ka bhee ek ang hai.

jaise :- “sunahu naath raghuveer krpaala,
bandhu na hoy mor yah kaala.”

13. vyatirek alankaar kya hota hai :-

vyatirek ka shaabdik arth hota hai aadhiky. vyatirek mein kaaran ka hona jaruree hai. at: jahaan upamaan kee apeksha adhik gun hone ke kaaran upamey ka utkarsh ho vahaan par vyatirek alankaar hota hai.

jaise :- ka saravari tehin deun mayankoo. chaand kalankee vah nikalankoo..
mukh kee samaanata chandrama se kaise doon?

14. vibhaavana alankaar kya hota hai :-

jahaan par kaaran ke na hote hue bhee kaary ka hua jaana paaya jae vahaan par vibhaavana alankaar hota hai.

jaise :- binu pag chalai sunai binu kaana.
kar binu karm karai vidhi naana.
aanan rahit sakal ras bhogee.
binu vaanee vakta bad jogee.

15. visheshokti alankaar kya hota hai :-

kaavy mein jahaan kaary siddhi ke samast kaaranon ke vidyamaan rahate hue bhee kaary na ho vahaan par visheshokti alankaar hota hai.

jaise :- neh na nainan ko kachhu, upajee badee balaay.
neer bhare nit-prati rahen, taoo na pyaas bujhaee..

16. arthaantaranyaas alankaar kya hota hai :-

jab kisee saamaany kathan se vishesh kathan ka athava vishesh kathan se saamaany kathan ka samarthan kiya jaaye vahaan arthaantaranyaas alankaar hota hai.

jaise :- bade na hooje gunan binu, birad badaee pae.
kahat dhatoore son kanak, gahano gadho na jae..

17. ullekh alankaar kya hota hai :-

jahaan par kisee ek vastu ko anek roopon mein grahan kiya jae, to usake alag-alag bhaagon mein batane ko ullekh alankaar kahate hain. athaart jab kisee ek vastu ko anek prakaar se bataaya jaaye vahaan par ullekh alankaar hota hai.

jaise :- vindu mein theen tum sindhu anant ek sur mein samast sangeet.

18. virodhaabhaash alankaar kya hota hai :-

jab kisee vastu ka varnan karane par virodh na hote hue bhee virodh ka aabhaash ho vahaan par virodhaabhaas alankaar hota hai.

jaise :- aag hoon jisase dhulakate bindu himajal ke.
shoony hoon jisamen bichhe hain paanvade palaken.

19. asangati alankaar kya hota hai :-

jahaan aapataat: virodh drshtigat hote hue, kaary aur kaaran ka vaiyaadhikarany ranit ho vahaan par asangati alankaar hota hai.

jaise :- “hraday ghaav mere peer raghuveerai.”

20. maanaveekaran alankaar kya hota hai :-

jahaan par kaavy mein jad mein chetan ka aarop hota hai vahaan par maanaveekaran alankaar hota hai athaart jahaan jad prakrti par maanaveey bhaavanaon aur kriyaanon ka aarop ho vahaan par maanaveekaran alankaar hota hai. jab prakrti ke dvaara nirmit cheejon mein maanaveey bhaavanaon ke hone ka varnan kiya jae vahaan par maanaveekaran alankaar hota hai.

jaise :- beetee vibhaavaree jaagaree, ambar panaghat mein dubo rahee taas ghat usha nagaree.

21. anyokti alankaar kya hota hai :-

jahaan par kisee ukti ke maadhyam se kisee any ko koee baat kahee jae vahaan par anyokti alankaar hota hai.

jaise :- phoolon ke aas-paas rahate hain, phir bhee kaante udaas rahate hain.

22. kaavyaling alankaar kya hota hai :-

jahaan par kisee yukti se samarthit kee gayee baat ko kaavyaling alankaar kahate hain athaart jahaan par kisee baat ke samarthan mein koee-na-koee yukti ya kaaran jarur diya jaata hai.

jaise :- kanak kanak te saugunee, maadakata adhikaay.
uhi khaay bauraat nar, ihi pae baurae..

23. svabhaavokti alankaar kya hota hai :-

kisee vastu ke svaabhaavik varnan ko svabhaavokti alankaar kahate hain.

jaise :- sees mukut katee kaachhanee, kar muralee ur maal.
ihi baanik mo man basau, sada bihaareelaal..

3. ubhayaalankaar
jo alankaar shabd aur arth donon par aadhaarit rahakar donon ko chamatkaaree karate hain vahaan ubhayaalankaar hota hai.

jaise :- kajaraaree ankhiyan mein kajaraaree na lakhaay.

alankaaron se sambandhit prashn – uttar :-

in udaaharanon mein kaun-kaun se alankaar hain —–

praat: nabh tha bahut neela shankh jaise.
teree barachhee ne bar chheene hain khalan ke.
makhamal ke jhool pade haathee sa teela.
mita modu man bhay maleene, vidhi nidhi dinh let janu chheene.
raam naam kali kaam taru, raam bhagati sur dhenu.
uttar – (1) utpreksha, (2) yamak, (3) upama, (4) utpreksha, (5) roopak

kuchh prashnon ke uttar svan den –

ambar panaghat mein dubo rahee taara ghat usha naagaree.
vah deep shikha see shaant bhaav mein leen.
sir phat gaya usaka maano arun rang ka ghada ho.
tab to bahata samay shila sa jam jaayega.
mukhy gaayak ke chattaan jaise bhaaree svar.