अमित शाह ने पूछा क्या राहुल गांधी भारत का बंटवारा चाहते हैं?

दिल्ली: जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी और प्रदर्शनों को लेकर आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का एक महत्वपूर्ण बयान आया है। इस बयान में अमित शाह ने खास कर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए उनसे बहुत तीखे सवाल पूछ डाले हैं। दरसल आज अमित शाह ने एक ब्लॉग पोस्ट लिखी जिसमें अमित शाह ने कहा है कि राहुल देश विरोधी और देश हित का अंतर नहीं समझ पा रहे हैं। और भी सीधा वार करते हुए शाह ने लिखा है कि कांग्रेस की सोच में राष्ट्रहित जैसी सोच की भावना नहीं। उन्होंने आरोप लगाया राहुल ने देश की अलगाववादी शक्तियों से हाथ मिला लिया है.
amit shah rahul gandhi jnu divide indiaअमित शाह के अनुसार कांग्रेस पार्टी अभी तक लोकसभा चुनाव और बाद के राज्यसभा चुनावों में अपनी दुर्दशा से उबार नहीं पायी है। पार्टी और उसके नेता यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इस अवसाद की अवस्था में वो देश के समक्ष कैसे एक जिम्मेदार राजनीतिक दल की भूमिका निभाएं।

कांग्रेस में हताशा का आलम यह है कि उसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी देश विरोधी और देश हित का अंतर तक नहीं समझ पा रहे हैं। जेएनयू में जो कुछ भी हुआ उसे कहीं से भी देश हित के दायरे में रखकर नहीं देखा जा सकता है। देश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारे लगें और आतंकवादियों की खुली हिमायत हो, इसे कोई भी नागरिक स्वीकार नहीं कर सकता। लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं ने जेएनयू जाकर जो बयान दिए हैं उससे उनकी सोच का दीवालियापन जाहिर  होता है।

आपको बता दें कि क्या है जेएनयू विवाद:

एक वीडिओ सामने आया है जिसमें ९ फरवरी को कुछ वामपंथी विचारधारा के संगठनों द्वारा एक रैली की गई दिखाई गई है  जिसमें में कुछ छात्रों ने ऐसे राष्ट्रविरोधी नारे लगाए:

पाकिस्तान जिंदाबाद
गो इंडिया गो बैक
भारत की बरबादी तक जंग रहेगी जारी
कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी जारी
अफजल हम शर्मिंदा है तेरे कातिल जिंदा हैं
तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा
अफजल तेरे खून से इन्कलाब आएगा

इन नारों के बाद और एबीवीपी के विरोध के बाद राजनीति गरमा गई और पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और कुछ अन्य को हिरासत में ले लिया। आज एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी सियासत का दौर उफान पर है और हर टीवी चैनल पर यही डिबेट चल रही है।

अमित शाह ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि इन छात्रों को सही ठहराकर राहुल गांधी किस लोकतांत्रिक व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं। क्या राहुल गांधी के लिए राष्ट्रभक्ति की परिभाषा यही है? देशद्रोह को छात्र क्रान्ति और देशद्रोह के खिलाफ कार्यवाही को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात का नाम देकर उन्होंने राष्ट की अखंडता के प्रति संवेदनहीनता का परिचय दिया है।

मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि इन नारों का समर्थन करके क्या उन्होंने देश की अलगाववादी शक्तियों से हाथ मिला लिया है? क्या वह स्वतंत्रता की अभिवक्ति की आड़ में देश में अलगाववादियों को छूट देकर देश का एक और बंटवारा करवाना चाहते है?

“I want to ask him (Rahul Gandhi) if his support for such slogans means that he has joined hands with the separatists,” Shah questioned. “Does he want to give a free hand to separatists in the name of freedom of expression and want another division of the country?”

 मैं कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से ऊपर उल्लेखित सवालों का 125 करोड़ देशवासियों की ओर से जवाब मांगता हूं और यह भी मांग करता हूं कि राहुल गांधी अपने इस कृत्य के लिए देश से माफी मांगे।