अमृता की चाहत उनकी आत्मकथा “रसीदी टिकट” में भी जाहिर हुई है…

अमृता प्रीतम के बरसी (31 अक्टूबर )  
दिल्ली.मशहूर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा दो साल के लंबे गैप के बाद जल्द बॉलीवुड फिल्मों में दस्तक देने वाली है.संजय लीला भंसाली की अगली बायोपिक में नजर आएंगी. भंसाली बायोपिक पंजाबी और हिंदी की जानी मानी लेखिका और देश के सर्वश्रेष्ठ साहित्य पुरस्कार ज्ञानपीठ से सम्मानित अमृता प्रीतम के जीवन पर बन रही है.

प्रियंका पहले ही एक बायोपिक में काम कर चुकी हैं.साल 2014 मे आई फिल्म ‘मैरी कॉम’ में उन्होंने भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम का किरदार निभाया था. इस फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया था.

सवाल यह है कि अमृता प्रीतम के जीवन पर फिल्म क्यों बन रही है? उनके जीवन में ऐसा क्या खास है जो बॉलीवुड वालों को लुभा रहा है? बॉलीवुड में साहित्यकारों की रचनाओं पर तो छिटपुट फिल्में बनती रही है मगर किसी साहित्यकार के जीवन पर बॉलीवुड वालों की नजर कम ही पड़ती है.

अमृता प्रीतम का जन्म 31 अगस्त 1919 को गुजरांवाला पाकिस्तान में हुआ था। उनका बचपन लाहौर में बीता। देश के बंटवारे के वक्त वह दिल्ली आ गई थीं। उनकी मां की बचपन में ही मृत्यु हो गई थी। घर की जिम्मेदारियां कंधे पर आ जाने से उन्होंने बहुत जल्दी लिखना शुरू कर दिया था। उनकी पहली रचना उनकी किशोरावस्था में ही छप गई थी।

वास्तव में जितना अमृता प्रीतम का साहित्य विशिष्ट है,उतना ही उनका जीवन भी विशिष्ट रहा.इस जीवन में कई ऐसे चौंकाऊ और दिलचस्प कोण हैं कि उन्हें लेकर एक अच्छी फिल्म बनाई जा सकती है. चंद पंक्तियों में कहानी कुछ यूं है। एक बेहद खूबसूरत युवती थी। वह उतना ही खूबसूरत साहित्य भी रचती थी। वह अपने जीवन में पति के अलावा दो अन्य पुरुषों के निकट आई और इन दोनों ही अलग किस्म के पुरुषों से उसका रिश्ता भी बहुत ही अलग किस्म का रहा।

फिल्म कैसी होगी, यह तो बनने के बाद ही पता चलेगा,मगर यहां बताते चलें कि अमृता प्रीतम की शादी 16 साल की उम्र में (1935) ही कर दी गई थी। उनके पति का नाम प्रीतम सिंह था,शादी से पहले उनका नाम अमृता कौर था। पति-पत्नी करीब 25 साल साथ रहे। उन दिनों अमृता प्रीतम जाने-माने साहित्यकार और गीतकार साहिर लुधियानवी की तरफ आकर्षित थीं। यह चाहत अमृता जी की आत्मकथा “रसीदी टिकट” में भी जाहिर हुई है।

कहा जाता है कि अमृता, साहिर को हद से ज्यादा चाहती थीं। हालांकि बाद में साहिर लुधियानवी के जीवन में गायिका सुधा मल्हौत्रा का प्रवेश हुआ,जिससे अमृता प्रीतम का दिल टूट गया।यहां बताते चलें कि साहिर को पूर्ण रूप से न अमृता ही मिल सकीं और न ही सुधा मल्हौत्रा। दोनों ही मामलों में धर्म आड़े आ गया और साहिर जीवनभर कुंवारे ही रहे।

साहिर के बाद अमृता प्रीतम के जीवन में मशहूर चित्रकार और लेखक इमरोज आए। दिल्ली के वेस्ट पटेल नगर में इमरोज का घर अमृता प्रीतम के घर के पास ही था। इमरोज पटेल नगर से ही निकलने वाली उर्दू पत्रिका “शमा” में काम करते थे। वहीं पर कुछ मुलाकातों के बाद यह रिश्ता बना। इमरोज, अमृता प्रीतम से सात साल छोटे थे। बाद में यह रिश्ता इतना पुख्ता जुड़ा कि उसके बाद अमृता प्रीतम बिना शादी किए ही मृत्यु तक इमरोज के साथ ही रहीं।

इमरोज और अमृता प्रीतम का रिश्ता बहुत ही अलग किस्म का रिश्ता रहा। दोनों को कभी एक-दूसरे से यह कहने की जरूरत नहीं पड़ी कि वे एक-दूसरे को प्यार करते हैं। इस रिश्ते की बुनियाद में कोई शर्त नहीं थी, शायद इसीलिए यह रिश्ता बिना शादी के भी 40 साल तक बना रहा।

उन्होंने छह दशक लंबे अपने लेखकीय जीवन में 100 से ज्यादा किताबें लिखीं। “पिंजर” उनकी सर्वाधिक चर्चित रचना है, जिस पर बाद में फिल्म भी बनी। बीमारी के बाद उनकी मृत्यु 31 अक्तूबर 2005 को दिल्ली में हुई। उस समय वह 86 वर्ष की थीं।