अपठित गद्यांश – अनुशासन और स्वतंत्रता

Apathit Gadyansh with Answers in Hindi unseen passage 

कई लोग समझते हैं की अनुशासन और स्वतंत्रता में विरोध है, किन्तु वास्तव में यह भ्रम है । अनुशासन के द्वारा स्वतंत्रता छिन नहीं जाती ,बल्कि दूसरों की स्वतंत्रता की रक्षा होती है । सड़क पर चलने के लिए हम लोग स्वतंत्र हैं, हमें बायीं तरफ से चलना चाहिए किन्तु चाहें तो हम बीच में भी चल सकते हैं। इससे हम अपने ही प्राण संकट में डालते हैं, दूसरों की स्वतंत्रता भी छींनते हैं । विद्यार्थी भारत के भावी निर्माता हैं । उन्हें अनुशासन के गुणों का अभ्यास अभी से करना चाहिए, जिससे वे भारत के सच्चे सपूत कहला सकें ।

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न (अ) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए ।
प्रश्न (ब) दूसरों की स्वतंत्रता की रक्षा किससे होती है ?
प्रश्न (स) भारत के सच्चे सपूत बनने के लिए विद्यार्थियों को कौन से गुणों का अभ्यास करना चाहिए ?
प्रश्न (द) विलोम शब्द लिखिए – स्वतंत्रता, सपूत
प्रश्न (इ) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए ।

उत्तर  – 

प्रश्न (अ) का उत्तर – अनुशासन और स्वतंत्रता
प्रश्न (ब) का उत्तर – दूसरों की स्वतंत्रता की रक्षा अनुशासन से होती है ?
प्रश्न (स) का उत्तर – भारत के सच्चे सपूत बनने के लिए विद्यार्थियों को अनुशासन के गुणों का अभ्यास करना चाहिए ।
प्रश्न (द) का उत्तर – शब्द विलोम शब्द
स्वतंत्रता परतंत्रता
सपूत कपूत
प्रश्न (इ) का उत्तर – अनुशासन ‘स्व’ और ‘पर’ की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवश्यक है। इससे अपने जीवन के साथ-साथ दूसरों का जीवन सुरक्षित होता है । अनुशासन के गुणों को आत्मसात करके ही विद्यार्थी सच्चे राष्ट्र निर्माता बन सकते है ।

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