Apathit gadyansh with answers class 12 to 5 Hindi unseen passage अपठित गद्यांश













 

अपठित गद्यांश with answers Hindi Unseen passages for all classes

अपठित का शाब्दिक अर्थ है – जो पढ़ा नहीं गया – जो पाठ्यक्रम से जुड़ा हुआ नहीं है और जो अचानक ही पढ़ने के लिए दिया गया हो। इसमें गद्यांश से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देने को कहा जाता है। इस प्रकार इस विषय में यह अपेक्षा की जाती है कि पाठक द्वारा दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर उसी अनुच्छेद के आधार पर संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करें। प्रश्नों के उत्तर पाठक को अपनी भाषा शैली में देने होते है।

अपठित गद्यांश (Apathit Gadyansh) के द्वारा पाठक की व्यक्तिगत योग्यता और अभिव्यक्ति की क्षमता का आकलन किया जाता है। अपठित का कोई क्षेत्र विशेष नहीं होता। विज्ञान कला साहित्य नागरिक शास्त्र या किसी भी विषय के उत्तर देने से मानसिक स्तर बढ़ता है और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ाता है।

अपठित गद्यांश (Apathit Gadyansh) को हल करने की विधि और विशेषताएं –

1. अपठित गद्यांश को बहुत ध्यान पूर्वक मन ही मन में दो बार पढ़ना चाहिए।
2. गद्यांश को पढ़ते समय विशेष स्थानों को रेखांकित करना चाहिए।
3. अपठित गद्यांश के प्रश्नों के उत्तर देते समय भाषा सरल व्यवहारिक और सहज होनी चाहिए।
4. अपठित गद्यांश से संबंधित किसी भी प्रश्न का उत्तर देते समय कम से कम शब्दों में अपने उत्तर को स्पष्ट करना चाहिए।
5. शीर्षक लिखते समय संक्षिप्तता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

Class 12 – अपठित गद्यांश with answers in Hindi Unseen Passages Examples 

Class 11 – अपठित गद्यांश with answers in Hindi Unseen Passages Examples 

Class 10 – अपठित गद्यांश with answers in Hindi Unseen Passages Examples 

Class 9 – अपठित गद्यांश with answers in Hindi Unseen Passages Examples 

Class 8 – अपठित गद्यांश with answers in Hindi Unseen Passages Examples 

  1. अपठित गद्यांश – साहसी मनुष्य का जीवन ही सच्चा जीवन होता है
  2. अपठित गद्यांश – संगति का प्रभाव
  3. अपठित गद्यांश – महिलाओं के लिए उपयुक्त व्यवसाय
  4. अपठित गद्यांश – पुस्तकें सच्ची मित्र होती हैं
  5. अपठित गद्यांश – बिना अभ्यास के सिद्धि प्राप्त नहीं होती
  6. अपठित गद्यांश – स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा का निवास होता है
  7. अपठित गद्यांश – अपनी भाषा के विकास से अपने देश और अपनी संस्कृति का विकास संभव है

Class 7 – अपठित गद्यांश with answers in Hindi Unseen Passages Examples 

  1. अपठित गद्यांश – हम महापुरुषों की पहचान क्यों नहीं कर पाते?
  2. अपठित गद्यांश – महानगरों में भीड़ होती है, समाज या लोग नहीं बसते
  3. अपठित गद्यांश – भारतीय जनजीवन पर नदियों का क्या प्रभाव है?
  4. अपठित गद्यांश – विद्यार्थियों की अनुशासनहीनता का मुख्य कारण
  5. अपठित गद्यांश – सफलता का रहस्य
  6. अपठित गद्यांश – मानव जीवन का लक्ष्य
  7. अपठित गद्यांश – प्रजातंत्र के मुख्य अंग

Class 6 – अपठित गद्यांश with answers in Hindi Unseen Passages Examples 

Class 5 – अपठित गद्यांश with answers in Hindi Unseen Passages Examples 

अभ्यास हेतु अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi examples for practice

अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 01:

किसी शहर में एक नट मण्डली आई हुई थी. लोग भीड़ लगाकर नट के करतब देख रहे थे. भीड़ में दो चोर भी थे. उन्होंने देखा कि नट एक पतली सी रस्सी पर बड़े ही आराम से बिना किसी सहायता के चल रहा है. दोनों चोरो ने सोचा कि यदि यह नट हमारे साथ आ जाये तो चोरी करने में बड़ी सहायता मिलेगी. यह सोचकर दोनों चोरों ने नट से बात की. नट ने उन्हें मना कर दिया. चोर उसे बाँधकर अपने साथ ले गए, और रात में एक सेठ की हवेली के नीचे ले जाकर चाकू दिखाते हुए कहा “इस मुंडेर पर चलकर तुम अंदर जाकर दरवाजा खोलो”. मुंडेर इतनी पतली थी कि उस पर कोई इंसान तो क्या कोई छोटा जानवर भी नहीं चल सकता था. चोर उस पर चढ़ा और एक कदम चलकर धड़ाम से नीचे गिर पड़ा. दोनों चोर चिल्लाते हुए बोले “तमाशा दिखाते हुए तो तुम पतली सी रस्सी पर चल रहे थे, यहाँ कैसे गिर पड़े? ” चोर मासूमियत से बोला “ढोल बजाओ ढोल, क्योंकि मैं ढोल बजने पर ही रस्सी पर आराम से चल पाता हूँ. ” नट क़ी बात सुनकर चोरों ने अपना सिर पीट लिया.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- शहर में कौन सी मंडली आई थी?

क-भजन मण्डली ख-नाटक मण्डल ग-बाल मण्डली घ-नट मण्डली
 प्रश्न 2-नट किस पर बड़े आराम से चल रहा था?

क-एक पतली सी रस्सी पर ख-मोटे डंडे पर ग- मुंडेर पर घ-पतले तार पर
 प्रश्न 3-बताइए कि चोरों ने क्या सोच कर नट से बात की?
 प्रश्न 4- नट के मना करने पर चोरों ने उसके साथ कैसा बर्ताव किया?

प्रश्न 5 -गद्यांश में आये विशेषण शब्द लिखिए. (कोई दो) 

    उत्तर-पत्र

उत्तर 1-घ 
उत्तर 2-क
उत्तर 3- यदि यह नट हमारे साथ आ जाए तो चोरी करने में बड़ी सहायता मिलेगी. यह सोचकर दोनों चोरों ने नट से बात की.
उत्तर 4-नट के मना करने पर चोर उसे बाँधकर अपने साथ ले गए.
 उत्तर 5- विशेषण 1- पतली 2- छोटा 
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 02:

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भारतीय नववर्ष का आरम्भ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है. माना जाता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी. इस कारण इसे नवसंवतसर या नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है. आज भले ही नववर्ष ग्रेगोरियन कलेंडर के अनुसार मनाया जाता है किन्तु हमारे देश में आज भी मांगलिक तथा धार्मिक कार्यों के लिए विक्रम संवत को ही प्रधानता दी जाती है. उसी के आधार पर ही तिथि एवं काल गणना की जाती है. विक्रम संवत को सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने के उपलक्ष्य में 57 ईसा पूर्व शुरू किया था. विक्रम संवत का सम्बन्ध किसी विशेष धर्म से न होकर पूरे विश्व की प्रकृति, खगोलीय सिद्धांत, ग्रहों और नक्षत्रों से है. इसी लिए भारतीय काल गणना सृष्टि की रचना और राष्ट्र की गौरवशाली परम्पराओं का बोध कराती है. सौर मंडल के ग्रहों एवं नक्षत्रों के चाल, उनकी लगातार बदलती स्थिति पर भी हमारे दिन , महीने, साल आधारित होते हैं. वसंत ऋतु में नववर्ष का आरम्भ इसलिए भी आनंददायक है क्योंकि इस समय चारों ओर हरियाली होती है. रंग -बिरंगे सुगन्धित फूलों की छटा अनुपम होती है, जो धरा को अलौकिक सौंदर्य प्रदान करती है. कुल मिलाकर वातावरण सुंदर एवं मनोहारी होता है. कहने को तो यह पर्व एक है किन्तु इसके नाम अनेक हैं- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानि कि माँ की आराधना का पर्व ( नवरात्र)  , उगादी – (युग का प्रारम्भ)  आंध्र प्रदेश में इसे दीपावली की तरह मनाते हैं, महाराष्ट्र में इसे गुड़ीपड़वा के नाम से मनाते हैं, सिंध प्रान्त में नवसंवत को चेती चाँद ( चैत्र का चाँद)  के नाम से पुकारते हैं एवं जम्मू -कश्मीर में नवरेह के नाम से मनाया जाता है.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- भारतीय नववर्ष का आरम्भ किस माह से होता है?

प्रश्न 2- विक्रम संवत का आरम्भ कब तथा किसने किया था?

प्रश्न 3- ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना कब की थी?

प्रश्न 4-चेती चाँद का दूसरा नाम क्या है?

प्रश्न 5- गद्यांश से दो संज्ञा शब्द तथा दो विशेषण शब्द ढूंढकर लिखिए

उत्तर –

उत्तर 1-भारतीय नववर्ष का आरम्भ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है.
उत्तर 2-विक्रम संवत को सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने के उपलक्ष्य में 57
 ईसा पूर्व शुरू किया था.
 उत्तर 3- ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में की थी.
 उत्तर 4-चेती चाँद का दूसरा नाम चैत्र का चाँद है.
 उत्तर 5- संज्ञा शब्द -1- ब्रह्मा 2-कश्मीर
  विशेषण शब्द 1-सुंदर 2-अलौकिक 
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 03:

भारत को यदि हम त्योहारों का देश कहें तो अनुचित नहीं होगा. हमारे देश में वर्ष भर त्योहारों की धूम मची रहती है. हर बदलते मौसम के साथ ही कोई न कोई त्योहार अवश्य मनाया जाता है. ये त्योहार एक ओर हमें ऋतु परिवर्तन का सन्देश देते हैं तो दूसरी ओर उसके स्वागत हेतु हममें उत्साह-उमंग का संचार करते हैं. कुछ त्योहार धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं. ये सभी हमें एकता, प्रेम, भाई-चारा एवं सौहार्द का सन्देश देते हैं. वैसे भी हमारे देश में लगभग सभी धर्मों के निवासी हैं. भारत में सभी धर्मों को सम्मान प्राप्त है. सभी धर्मों के अनुयायियों को अपना धर्म पालन की पूर्ण स्वतंत्रता है. यही कारण है कि सभी त्योहारों को पूरा देश मिलजुलकर प्रसन्नता से मनाता है. हमारे देश के कुछ प्रमुख त्योहार हैं- होली, दीपावली, दशहरा, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी,रामनवमी, ईद,क्रिसमस गुरपुरब,महावीर जयंती आदि. दीपावली यदि हलकी ठंडक के साथ आरम्भ होकर शीत ऋतु के आगमन की सूचना देता है, तो रामनवमी ग्रीष्मऋतु की सूचना देता है. मकर संक्रांति एवं लोहड़ी का त्योहार शीत ऋतु की समाप्ति तथा वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है. इस प्रकार हर त्योहार किसी न किसी ऋतु के जुड़ा हुआ है. बच्चों के लिए मनाया जाने वाला त्योहार बाल-दिवस है जो हमारे स्वतंत्र देश के प्रथम प्रधानमंत्री चाचा नेहरू के जन्मदिन पर बच्चों को समर्पित है. हमारे तीन राष्ट्रीय त्योहार हैं -1 स्वतंत्रता दिवस -यह 15 अगस्त को मनाया जाता है. सन् 1947 में हमें इसी दिन आजादी मिली थी. 2-गणतंत्र दिवस – सन् 1950 में हमें पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त हुई थी. हमारा संविधान बना था. 3- गांधी जयंती -यह हमारे राष्ट्रपिता बापू को समर्पित है. इस प्रकार हमारा देश सचमुच त्योहारों का देश है.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- हमारे देश का क्या नाम है?

प्रश्न 2- हमारे देश में वर्षभर किसकी धूम रहती है?

प्रश्न 3- दीपावली का त्योहार हमें किस ऋतु के आगमन की सूचना देता है?

प्रश्न 4- गुरुपुरब किस धर्म के लोग मानते हैं?

प्रश्न 5- हम स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाते हैं?

प्रश्न 6 -नेहरू जी का जन्मदिन हम किस रूप में मनाते है?

प्रश्न 7 -हम गणतंत्र दिवस क्यों मानते हैं ?

प्रश्न 8 -गद्यांश आए संयुक्ताक्षरों से कोई दो चुनकर लिखिए.

प्रश्न 9-गद्यांश से चुनकर दो सर्वनाम शब्द लिखिए?

प्रश्न 10 – गद्यांश का उचित शीर्षक बताइए?

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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 04:

महेश एक स्वस्थ किन्तु निर्धन युवक था. निर्धनता के कारण उसकी पढ़ाई बचपन में ही अधूरी रह गई थी. वह अपने परिवार का भरण -पोषण मजदूरी करके जैसे-तैसे करता था. कई दिनों से उसे काम नहीं मिल रहा था. वह अत्यन्त निराश था. कई बार उसने सोचा कि वह अपनी जीवन लीला समाप्त कर ले. यह विचार आते ही उसकी आँखों के सामने उसके परिवार के भूखे -प्यासे सदस्यों के चेहरे आ जाते और वह उनके लिए जीने का संकल्प कर काम की तलाश में जुट जाता.

वह काम की तलाश में भटक ही रहा था कि उसने समूह में जाते हुए लोगों को बातचीत करते हुए सुना. उसे पता लगा कि कोई बहुत बड़े संत ने पुराने बरगद के नीचे आसान लगाया है. वे सबकी समस्याओं का समाधान चुटकी बजाते ही कर देते हैं. महेश के मन में आशा की किरण जागी. वह तेज क़दमों से भीड़ के साथ चलने लगा. वहाँ पहुँचकर वह शांत भाव से बैठकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगा. उसकी प्रतीक्षा समाप्त हुई. उसकी समस्या को जानने के लिए संत जी ने उसे बुलाकर उसकी बात सुनी और उसे अपना गधा दे दिया. महेश ने ह्रदय से उन्हें धन्यवाद दिया और वहाँ से गधा लेकर चल पड़ा. वह बड़ा प्रसन्न था कि इस गधे पर वह ईंट, रोड़ी आदि ढ़ो कर काम को जल्दी समाप्त कर इसकी सवारी कर शीघ्र ही घर पहुँच जाया करेगा. ये विचार उसके मन को गुदगुदा रहे थे कि अचानक गधा गिर पड़ा और मर गया.

महेश को बड़ा दुःख हुआ किन्तु वह करता भी क्या उसने तुरंत गड्ढा खोदकर गधे को दबा दिया और वहीं बैठकर रोने लगा. एक सेठ वहाँ से जा रहा था. महेश को उस कब्र के पास रोता देख उन्होंने सोचा कि कोई दिव्य आत्मा चल बसी है, ये सोचकर उन्होंने सिर झुका कर कुछ पैसे चढ़ा दिए. महेश कुछ बोलता इससे पहले वहाँ पैसे चढ़ाने वालों की भीड़ लग गई. घबराए महेश ने सारी बात संत जी को बताई. संत ने महेश को समझाया कि कोई बात नहीं शायद भगवान् की यही मर्जी मर्जी थी. ” जो गधा जीते जी तेरी मदद नहीं कर पाया उसने मरकर तेरी सहायता की है. अब इस पैसे से कोई काम शुरू कर और लाभ होने पर पैसों को भलाई के कार्य में लगाना. “

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1-महेश कैसा युवक था, उसकी पढाई किस कारण छूट गई थी?

प्रश्न 2-वह अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करता था?

प्रश्न 3-मजदूरी न मिलने पर उसके मन में क्या विचार आया?

प्रश्न 4 -मदद शब्द का समानार्थी शब्द गद्यांश से ढूंढकर लिखिए.

प्रश्न 5- गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए.   

उत्तर

 उत्तर 1-महेश एक स्वस्थ किन्तु निर्धन युवक था. निर्धनता के कारण उसकी पढ़ाई बचपन में ही अधूरी रह गई थी.
उत्तर 2-वह अपने परिवार का भरण -पोषण मजदूरी करके जैसे-तैसे करता था.
उत्तर 3-मजदूरी न मिलने पर उसके मन में विचार आया कि वह अपनी जीवन लीला समाप्त कर ले.
उत्तर 4-सहायता 
उत्तर 5-ईमानदार महेश, परिश्रमी महेश, सच्चा महेश .
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 05:

राजा सोहन सिंह अपनी प्रजा से बहुत प्यार करते थे. एक दिन उन्होंने अपने मंत्री से पूछा कि नगर में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति कौन हैं? सोहन सिंह जानते थे कि बुजुर्गों के पास काफी अनुभव होता है और वे उस अनुभव के महत्त्व को महसूस करना चाहते थे. मंत्री ने जानकारी हासिल करने के बाद बताया कि मनोहर नाम का एक दर्जी है, जो करीब अस्सी वर्ष का है और नगर में सबसे सक्रिय बुजुर्ग है. वह आज भी अपनी दुकान चलाता है. सभी लोग उसका बहुत आदर करते हैं. अगले ही दिन राजा अपने मंत्री के साथ वेश बदलकर मनोहर की दुकान में पहुँच गए. मनोहर अपने काम में लगा हुआ था, उसने राजा को ग्राहक समझकर अभिवादन किया.

राजा ने कहा कि वह कुछ देर उसकी दुकान में विश्राम करना चाहता है. मनोहर ने उन्हें इसकी अनुमति दे दी और कपडे सिलने का अपना काम शुरू कर दिया. राजा और उनका मंत्री लगातार मनोहर के काम पर नजर रखे हुए थे. उन्होंने देख कि मनोहर कपड़ा काटने के लिए कैंची को उठाता, कपड़ा काटता और फिर उसे जमीन पर रख देता. इसके बाद वह टोपी में से सूई निकालता और कपड़ा सिलने लगता. इसके बाद वह फिर से अपनी सूई को टोपी में लगा लेता.

यह क्रम लम्बे समय तक जारी रहा. जिज्ञासावश राजा ने मनोहर से पूछा “आप कैंची को जमीन पर रख रहे हैं और सूई को टोपी में लगा रहे हैं ऐसा क्यों”? मनोहर ने राजा की ओर देखते हुए कहा “यह एक ऐसा सबक हैं जो मुझे जिंदगी ने सिखाया हैं. कैंची काटकर बाँटने का काम करती है,इसलिए उसकी जगह पैरों में ही होनी चाहिए. वहीँ सूई दो कपड़ों को सिलने का काम करती है, इसीलिए उसकी जगह सिर पर होनी चाहिए. मैं जिंदगी में लोगों को इसी तरह रखता हूँ .

यह सुनकर राजा ने मनोहर को अपनी पहचान बताई और प्रणाम किया. इसके बाद उन्होंने मनोहर को इनाम देकर अपना ख़ास सलाहकार बना लिया.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1-राजा बुजुर्गों से क्या प्राप्त करना चाहते थे?

प्रश्न 2-मंत्री ने राज्य में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति का क्या नाम बताया एवं उनका क्या व्यवसाय था?

प्रश्न 3 -राजा एवं मंत्री ने क्या कहकर बुजुर्ग की दुकान में प्रवेश किया?

प्रश्न 4- मनोहर कैंची तथा सुई को कहाँ -कहाँ रखता था?

प्रश्न 5-मनोहर के उत्तर से संतुष्ट होकर राजा ने उसके साथ कैसा बर्ताव किया?

प्रश्न 6-गद्यांश में से दो व्यक्तिवाचक संज्ञा एवं दो जातिवाचक संज्ञा चुनकर लिखिए.

प्रश्न 7-गद्यांश में से चार सर्वनाम शब्द चुनकर लिखिए.

प्रश्न 8-गद्यांश में से दो संयुक्ताक्षर शब्द चुनकर लिखिए.

उत्तर -पत्र

उत्तर 1 राजा बुजुर्गों से उनके अनुभव प्राप्त करना चाहते थे.
उत्तर 2 मंत्री ने राज्य में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति का नाम मनोहर बताया एवं उनका व्यवसाय कपड़े सिलना था.
उत्तर 3-राजा एवं मंत्री ने विश्राम करने की इच्छा व्यक्त करते हुए बुजुर्ग की दुकान में प्रवेश किया.
उत्तर 4- मनोहर कैंची जमीन पर तथा सूई को टोपी में रखता था.
उत्तर 5-मनोहर के उत्तर से संतुष्ट होकर राजा ने मनोहर को इनाम देकर अपना ख़ास सलाहकार बना लिया.
उत्तर 6-व्यक्तिवाचक संज्ञा 1-मनोहर 2- सोहन
 जातिवाचक संज्ञा 1-राजा 2-मंत्री
उत्तर 7-सर्वनाम शब्द 1 -उन्होंने 2-अपने 3-उसने 4-उनका
 उत्तर 8-संयुक्ताक्षर शब्द 1 – विश्राम 2- प्रणाम
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 06:

एक बार नरेश नाम का एक युवा घने जंगल में जड़ी -बूटियों की खोज में गया. कई दिनों तक वह विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियाँ चुन-चुनकर एकत्रित करता रहा. उसका प्रतिदिन का आहार जंगल में ही मिलने वाले कन्द-मूल हुआ करते थे. जंगल से होकर बहने वाली नदियाँ,प्राकृतिक झरने या फिर मीठे पानी के सरोवर से वह अपनी प्यास बुझा लिया करता था. सब कुछ सामान्य चल रहा था. उसने अब तक अनेकों जड़ी-बूटियाँ एकत्रित कर ली थी. बड़ा प्रसन्न था वह. गर्व से उसका सीना चौड़ा हो रहा था. उसे अपनी मंजिल समीप दिखाई दे रही थी. प्रसन्नता के इन्हीं पलों का विचार करते हुए वह रास्ता भटक गया. रात हो चुकी थी, अतःउसने वहीं विश्राम करने का निर्णय लिया.

प्रातःकाल पुनः चल पड़ा. प्यास लगने पर उसने पानी की खोज की किन्तु असफल रहा. थककर एक वृक्ष के नीचे विश्राम करने लगा. अनायास उसने पानी की बूंदें महसूस की. उसे सुखद अनुभूति हुई. उसने पेड़ से पत्ता तोड़कर दोना बनाया और उसमें जल एकत्रित करने लगा. जब कुछ जल इकठ्ठा हुआ तभी एक तोता टे -टे करता आया और उसका दोना गिरा दिया. युवक ने पुनः पूरे यत्न से जल एकत्रित किया जैसे ही उसने पीने के लिए मुहँ तक लगाया तोते ने पुनः गिरा दिया. इस बार युवक अपना नियंत्रण खो बैठा उसने तोते को मार डालने का निश्चय किया जैसे ही उसने डाल पर बैठे तोते को मारने का प्रयास किया तो मोटी डाल पर उसकी आँखे स्थिर हो गई. वह स्तब्ध था. वह जिस निरीह प्राणी को मारने जा रहा था वह तो उसका जीवन रक्षक था. मोटी डाल पर एक भयंकर अजगर सो रहा था, वे पानी की बूंदें नहीं बल्कि अजगर के मुहँ से निकलती जहरीली लार थी. वह प्रसन्न था और तोते को ह्रदय से धन्यवाद दे रहा था. तोते के कारण ही उसे जीवन दान मिला था. यदि आज वह आवेश में तोते को मार देता तो हत्या का पाप तो लगता ही, स्वयं भी अपने जीवन से हाथ धो बैठता . अनायास ही उसके ह्रदय ने कहा “जीवन में क्रोध पर नियंत्रण आवश्यक है “.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- नरेश किस उददेश्य से जंगल में गया था?

प्रश्न 2-उसका आहार क्या था?

प्रश्न 3- थकान होने पर उसने कहाँ विश्राम किया?

प्रश्न 4-तोता कहाँ था तथा उसने नरेश के हाथ से दोना क्यों गिराया?

प्रश्न 5- कहानी के आधार पर स्वविवेक से बताएं कि क्रोध पर नियंत्रण क्यों आवश्यक है?

उत्तर पत्र

उत्तर 1-नरेश घने जंगल में जड़ी -बूटियों की खोज में गया था.
उत्तर 2- उसका आहार जंगल में ही मिलने वाले कन्द-मूल हुआ करते थे.
उत्तर 3-थकान होने पर उसने वृक्ष के नीचे विश्राम किया.
उत्तर 4- तोता पेड़ पर था. उसने नरेश के हाथ से दोना इसलिए गिराया क्योंकि उस दोने में जल नहीं बल्कि अजगर के मुँह से निकलता जहर था.
उत्तर5- कहानी के आधार पर हम कह सकते हैं कि हमें अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए क्योंकि क्रोध हमारी सोचने-विचारने की शक्ति को नष्ट कर देता है जिससे हम गलत निर्णय ले लेते हैं.
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 07:

कहा जाता है कि यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात का मुख सौंदर्य विहीन था. किन्तु उनके विचारों में अत्यंत प्रबल सुन्दरता थी अतः लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे. एक बार वे अपने शिष्यों के साथ बैठे हुए थे, तभी एक ज्योतिषी वहाँ आया वह सुकरात को जानता नहीं था. उसने सुकरात का चेहरा देखकर बताया कि तुम्हारे नथुनों की बनावट बता रही है कि तुममें क्रोध की भावना अत्यंत प्रबल है. यह सुनकर सुकरात के शिष्य नाराज होने, किन्तु सुकरात ने उन्हें रोक लिया. ज्योतिषी ने आगे बताया कि तुम्हारे सिर की आकृति तुम्हारे लालची होने का प्रमाण दे रही है, ठुठडी की बनावट से तुम सनकी और होठों से तुम देशद्रोह के लिए तत्पर प्रतीत होते हो. यह सुनकर सुकरात ने ज्योतिषी को पुरस्कार दिया. सुकरात के शिष्यों ने इसका कारण पूछा तो सुकरात ने स्पष्ट किया कि ये सारे दुर्गुण मुझमें हैं किन्तु ज्योतिषी मुझमें स्थित विवेक की शक्ति को न देख सका जिसके कारण मैं इन सभी दुर्गुणों को नियंत्रण में रखता हूँ. हर इंसान को अपने भीतर स्थित विवेक को जागृत कर सदैव दुर्गुणों को काबू में रखना चाहिए.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

 प्रश्न 1- सुकरात किस देश के निवासी थे?
 प्रश्न 2 – सुकरात देखने में कैसे थे?
 प्रश्न 3 – ज्योतिषी ने उनके नथुनों को देखकर क्या कहा?
 प्रश्न 4 – ज्योतिषी ने सिर की आकृति देखकर सुकरात के बारे में क्या आंकलन किया?
 प्रश्न 5 – सुकरात के विचारों के बारे में बताइए.
 प्रश्न 6 – ज्योतिषी की बात सुनकर सुकरात ने उसके साथ क्या किया?
 प्रश्न 7 – सुकरात ने अपने शिष्यों को अपने दुर्गुणों के बारे में क्या कहा?
 प्रश्न 8 – निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए –
  1 इंसान –   2 – शक्ति –
 प्रश्न 9 – निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –
  1- नाराज –  2 – दुर्गुण –

प्रश्न 10 – गद्यांश से दो संज्ञा शब्द छांटकर लिखिए –
  क –   ख –  
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 08:

 शिक्षा मनुष्य को मनुष्य बनाती है. शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान होता है. शिक्षित मनुष्य ही राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान कर सकते हैं. वैसे तो मनुष्य की प्रथम पाठशाला उसका परिवार होता है और उसकी प्रथम गुरु उसकी माँ होती है जो नवजात शिशु में संस्कारों को सिंचित करती रही है. जब तक बच्चा विद्यालय जाने के योग्य नहीं हो जाता परिवार में माँ के अतिरिक्त अन्य सदस्य भी उसके गुरु की भांति उसे शिक्षित करते रहते हैं. परिवार के बाद शिक्षा प्राप्त करने का सबसे अच्छा स्थान विद्यालय होता है. यहाँ आकर उसका सर्वांगीण विकास होता है. विद्यालय में पुस्तकीय ज्ञान के अलावा उसे नृत्य-संगीत एवं खेल-कूद आदि का भी प्रशिक्षण दिया जाता है. छात्रों द्वारा अपनी-अपनी रूचि के अनुसार खेलों का चयन किया जाता है. चुनी हुई गतिविधियों में दक्षता प्राप्त कने के लिए वे दिन-रात अथक परिश्रम करते हैं. विद्यालय के प्रशिक्षक भी उनमें जान डालने का कार्य करते हैं तभी ऐसे विद्यार्थी देश का नाम विश्व में स्वर्णाक्षरो में लिखवा देते हैं.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- शिक्षा के बिना मनुष्य किसके समान होता है?

प्रश्न 2- मनुष्य की प्रथम गुरु कौन होती है?

प्रश्न 3- परिवार के बाद मनुष्य कहाँ शिक्षा प्राप्त करता है?

प्रश्न 4- विद्यालय में पुस्तकीय ज्ञान के अतिरिक्त और क्या-क्या सिखाया जाता है?

प्रश्न 5- कैसे मनुष्य राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान कर सकते हैं?

प्रश्न 6- ऐसे किन्हीं दो खिलाडियों के नाम लिखिए जिन्होंने विश्व-स्तर पर नाम कमाया हो.

प्रश्न 7- गद्यांश में आए दो संयुक्ताक्षर लिखिए.

प्रश्न 8- निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए

क – बच्चा  ख – देश    

प्रश्न 9- निम्नलिखित शब्द का अर्थ समझाइये –

‘अथक परिश्रम’

प्रश्न 10- प्रस्तुत गद्यांश को क्या नाम देना चाहेंगे?      
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 09:

नजर उठाकर जहाँ भी देखें आपको हर इंसान दुःख, अवसाद, तृष्णा, घृणा, नफरत, ईर्ष्या आदि जैसे दुर्गुणों से त्रस्त दिखाई देगा. प्रत्येक इंसान तनावग्रस्त है. जीवन शैली इतनी नीरस हो चुकी है कि उमंग-उल्लास तो नदारद हो गए हैं जीवन से. भौतिक सुखों को तलाशते हुए व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्तियों को विस्मृत कर चुका है. अनंत सुखों का स्वामी होकर भी व्यक्ति दरिद्र बना हुआ है, वह निरंतर दुःख और तनाव से पीड़ित है. वह कितने ही भौतिक संसाधनों का अम्बार लगा ले, कभी भी सुखी नहीं हो सकता जब तक वह अपने भीतर सुख नहीं ढूंढेगा तब तक दुखों से कैसे मुक्ति पायेगा? हमें सुख की प्राप्ति के लिए पीछे मुड़कर अपनी समृद्ध परम्परा को देखना होगा, अपनाना होगा अपनी प्राचीन पद्धतियों को, जिनसे हमें एक सशक्त मार्ग मिलेगा जिसे हम योग कहते हैं. हमारे भीतर अनंत शक्तियां छिपी हैं, आवश्यकता है उन्हें जगाने की. योग ही एक ऐसा उत्तम एवं सरल मार्ग है जिसके द्वारा हम अपनी शक्तियों को जगाकर अनंत आनंद, शक्तियों एवं शांति को प्राप्त कर सकते हैं.

महर्षि पतंजलि ने योगशास्त्र में लिखा है मन की वृत्तियों को रोकना ही योग है. यदि हम अपने अंतःकरण को पवित्र कर मन को नियंत्रित कर सद्कर्म करते हुए जीवन यापन करें तो स्वयं तो अनंत आनंद को प्राप्त करेंगे ही साथ ही सभी को सुख प्रदान करेंगे. तभी सर्वे भवन्तु सुखिनः की उक्ति चरितार्थ होगी तथा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना बलवती होगी. न कोई मार-काट होगी, न किसी से कोई आतंकित होगा. वसुंधरा भी शस्यश्यामला होगी, वायु एवं जल भी सुगन्धित होंगे. बस आवश्यकता है तो सिर्फ इस बात की, कि हम अपने मन में उठते बुरे विचारों को नियंत्रित करें और जन-कल्याण को महत्त्व दें. इन सबकी प्राप्ति हमें योग द्वारा हो सकती है. तो क्यों न हम आज से बल्कि अभी से योग अपनाएँ और जीवन को सुखी बनाएँ.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

 प्रश्न 1- वर्तमान समय में मनुष्य कौन से दुर्गुणों से त्रस्त है?

प्रश्न 2- मनुष्य दुखों से कैसे मुक्ति पायेगा?

प्रश्न 3 हमें सुख की प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए?

प्रश्न 4 योग के द्वारा चरितार्थ होने वाली उक्तियों को लिखिए.

प्रश्न 5 आपने अनुच्छेद को ध्यान से पढ़ा है, आप इसे क्या नाम देना चाहेंगे?

प्रश्न 6 – निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –

क – सुखी –      ख – अनंत –

ग – जीवन      घ – स्वामी

प्रश्न 7 – निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए –

क- आनंद – 1-    2 –

ख- इंसान – 1-    2 –

प्रश्न 8 – गद्यांश से चुनकर कोई दो संयुक्ताक्षर शब्द लिखिए –

1-      2-
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 10:

अहंकार एक ऐसा दुर्गुण है जो क्रमशः मनुष्य का,परिवार का, समाज का देश का और अंततः मानव जाति का नाश कर डालता है. अहंकारवश मनुष्य पापकर्म करता रहता है और इसी का प्रतिफल उसे जन्म-जन्मान्तर भुगतना पड़ता है. अहंकार एक राक्षसी प्रवृत्ति है. इस प्रवृत्ति की छाया में अन्य दुर्गुण एकत्रित होकर मनुष्य को पूरा राक्षस बना देते हैं. हमारे धर्म ग्रन्थों में राक्षसों की चर्चा हर युग में मिलती है. आज भी राक्षसी प्रवृत्तियों वाले लोग बहुतायत मिल जाते हैं. ऐसे लोगों के बारे में तो तुलसीदास जी का रामचरितमानस में लिखित कथन आज भी उतना ही सत्य है कि राक्षस मौका मिलने पर अपने हितैषियों का भी अहित करने से नहीं चूकते.

दूसरों के अहित में ही इन्हें अपना लाभ दिखाई देता है. दूसरों के उजड़ने में इन्हें हर्ष एवं उनकी उन्नति में ये बेहद कष्ट का अनुभव होता है. ये दूसरों की बुराई करते हैं. दूसरों के दोषों को असंख्य नेत्रों से देखते हैं. दूसरों का काम बिगाड़ने के लिए दूध में मक्खी की भांति गिर जाते हैं. ये दूसरों का काम बिगाड़ने के लिए अपने प्राण तक गँवा देते हैं. अहंकार के कारण ये ईश्वर पर विश्वास न कर अपने ही निर्णयों को सर्वश्रेष्ठ मान दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं. राक्षसी प्रवृत्ति के लोग नैतिक को अनैतिक मानते हैं, इस कारण आस-पास का वातावरण नकारात्मक हो जाता है. ऐसी बुरी प्रवृत्ति की बढ़त के कारण पृथ्वी ने प्रभु के समक्ष निवेदन किया कि “हे भगवान मुझे पर्वत, वृक्षों आदि का भार इतना महसूस नहीं होता जितना नकारात्मक एवं दुष्प्रवृत्ति के लोगों के कारण होता है”. ऐसे लोगों को अपने दुष्कर्मों का प्रतिफल आने वाले जन्मों में भोगना ही पड़ता है. अतः मनुष्य को स्वाध्याय के माध्यम अपने भीतर झाँकना चाहिए एवं उस द्वार को पूर्णतः कसकर बंद कर देना चाहिए जहाँ से दुष्प्रवृत्तियों के आने की संभावना हो. इस प्रयास से ही मानवता जीवित रह पाएगी तथा धरती माँ भी सही अर्थों में वसुन्धरा बन पाएगी.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- अहंकार के बारे में आपके क्या विचार हैं? कम से कम तीन वाक्यों में स्पष्ट करिए. 3

प्रश्न 2- गद्यांश में प्रयुक्त कहावत को लिखिए. 1

प्रश्न 3- कैसे लोगों के कारण वातावरण नकारात्मक हो जाता है? 1

प्रश्न 4- पृथ्वी ने भगवान से क्या निवेदन किया था? 1

प्रश्न 5- गद्यांश से पृथ्वी शब्द के दो पर्यायवाची शब्द ढूंढ़कर लिखिए. 1

प्रश्न 6- गद्यांश से दो शब्द उपसर्ग वाले तथा दो शब्द प्रत्यय ढूंढ़कर लिखिए. 2

प्रश्न 7- इन शब्दों के विलोम शब्द लिखिए -1

क- लाभ x —————– ख- धरती x ———————–
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 11:

कहते हैं न कि यदि लगन लग जाए तो कोई भी कार्य पूर्ण होते देर नहीं लगती. और यदि लगन रचनात्मक एवं सकारात्मक हो तो वह प्रतिष्ठा एवं ख्याति अर्जित कर लेती है. लगन को हम धुन भी कह सकते हैं, जैसे तुलसीदास जी को रामधुन लगी तो रामचरितमानस जैसी कालजयी कृति की रचना हुई. मीराबाई, चैतन्य आदि ने तो गिरधर गोपाल की धुन में ही जीवन व्यतीत किया. वर्तमान समय में भी कुछ परोपकारी समाज सेवियों द्वारा समाज के उत्थान एवं कल्याण की लगन कुछ इस प्रकार सामने आ रही है कि लोग अपने आस-पास के निर्धन तथा पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने का कार्य कर समाज को नयी दशा एवं दिशा प्रदान कर रहे हैं. किसी को सर्दियों के मौसम में ठिठुरते लोगों को कम्बल ओढ़ाने की लगन है तो किसी को गरम चाय की दो चुस्कियों से राहत पहुँचाने की लगन है. इतना ही नहीं हमारी प्राचीन परम्पराओं तथा संस्कृति को आगे बढ़ाने की लगन भी प्रायः देखने को मिलती है – पक्षियों को दाना डालने की, पानी पिलाने की तथा घायल पशु-पक्षियों का उपचार आदि कार्य के रूप में. कुछ समय पहले एक किस्सा सामने आया था कि कोई एक व्यक्ति किसी लावारिस लाश का दाह संस्कार कर देता था. कितना बड़ी एवं सकारत्मक सोच है. अतः लगन का मुद्दा कोई भी हो रचनात्मकता एवं सकारात्मकता अवश्य होनी चाहिए, जिससे समाज को सही दशा, दिशा एवं वसुधैव कुटुम्बकम का सन्देश मिल सके.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1 – गद्यांश में प्रयुक्त प्रत्यय (किन्हीं दो)  शब्दों को चुनिए तथा प्रत्यय एवं शब्दों को अलग-अलग करके लिखिए. 2

प्रश्न 2- जीवन में लगन क्या रूप होना चाहिए? स्पष्ट करें. 1

प्रश्न 3- सकारात्मक लगन से हम क्या अर्जित कर सकते हैं? 1

प्रश्न 4 – तुलसीदास जी की कृति में किस महान चरित्र की जीवन गाथा है? कृति एवं चरित्र का नाम बताएँ. 1.5

प्रश्न 5- यदि आपको अपने आस-पास निर्धन-लाचार या बेबस लोग दिखें,तो आप उनके लिए क्या करना चाहेंगे? स्पष्ट करें. 1.5

प्रश्न 6- आप अनुच्छेद को क्या नाम देना चाहेंगे? 1

प्रश्न 7- निम्नलिखित शब्दों की वर्तनी शुद्ध करिए – 2

क – राचनात्मक  ख –आप-पास

ग- शिकषित  घ- संसकृति
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 12:

बहुत पुरानी बात है, किसी राज्य में यज्ञ हेतु राजा एक जानवर की बलि चढ़ाने जा रहा था. उसी समय वहाँ से भगवान गौतम बुद्ध गुजरे. राजा को ऐसा करते देख उन्होंने राजा से कहा –“ठहरो वत्स ! यह क्या कर रहे हो? इस बेजुबान की बलि क्यों चढ़ा रहे हो? राजा ने कहा – “हे महात्मन ! इसकी बलि चढ़ाने से मुझे बहुत पुण्य प्राप्त होगा, और यह हमारी प्रथा भी है”. यह सुनकर बुद्ध ने कहा – “राजन ! यदि ऐसी बात है तो मुझे भेंट चढ़ा दो, तुम्हें और ज्यादा पुण्य मिलेगा. जानवर के मुकाबले एक मनुष्य की बलि से तुम्हारे भगवान ज्यादा खुश होंगे”. यह सुनकर राजा थोड़ा डरा, क्योंकि जानवर की बलि चढ़ाने में कोई भय नहीं था. जानवर की बलि चढ़ाने पर उस बेजुबान की तरफ से बोलने वाला कोई होगा, ऐसा राजा ने सोचा न था. मगर बुद्ध की बलि चढ़ाने की बात से ही राजा काँप गया. उसने कहा – अरे नहीं महात्मन ! आप ऐसी बात न करें. इस बारे में तो मैं सोच भी नहीं सकता, जानवर की बात अलग है. ऐसा तो सदियों से होता आया है. फिर इसमें किसी का नुकसान भी तो नहीं है. जानवर का फायदा ही है, वह सीधा स्वर्ग चला जाएगा”.

बुद्ध बोले –“ यह तो बहुत ही अच्छा है, मैं स्वर्ग की तलाश कर रहा हूँ, तुम मुझे बलि चढ़ा दो और मुझे स्वर्ग भेज दो. अथवा तुम ऐसा क्यों नहीं करते कि तुम अपने माता-पिता को ही स्वर्ग भेज दो, और खुद को ही क्यों रोके हुए हो? जब स्वर्ग जाने की इतनी सरल व सुगम तरकीब मिल गई है तो फिर काट लो अपनी गर्दन. इस बेचारे जानवर को क्यों स्वर्ग भेज रहे हो, शायद यह जाना भी न चाहता हो. जानवर को स्वयं ही निश्चित करने दो कि उसे कहाँ जाना है”. राजा के सामने अपने तर्कों की पोल खुल चुकी थी. वह महात्मा बुद्ध के चरणों में गिर पड़ा और क्षमा माँगते हुए बोला – हे महात्मन ! आपने मेरी आँखों पर पड़े अज्ञान के परदे को हटा कर जो मेरा उपकार किया है उसे मैं जीवन भर नहीं भूल सकता”.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- राजा क्या करने जा रहा था?

प्रश्न 2- वहाँ से कौन गुजर रहा था?

प्रश्न 3- बुद्ध ने राजा से क्या कहा?

प्रश्न 4- बलि के विषय में राजा ने बुद्ध को क्या तर्क दिए?

प्रश्न 5- बुद्ध को किसकी तलाश थी एवं उन्होंने स्वयं की बलि चढ़ाने के लिए क्यों कहा?

प्रश्न 6- बुद्ध ने किस-किस को स्वर्ग भेजने की बात राजा से कही?

प्रश्न 7- निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द अनुच्छेद से छाँटकर लिखिए.

1-अज्ञान x ——————- 2- पाप x ———————

प्रश्न 8- निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द अनुच्छेद से छाँटकर लिखिए

 1 – हानि x ———————— 2- पशु x ————————

प्रश्न 9 – अनुच्छेद से दो सर्वनाम शब्द चुनकर लिखिए

1- —————————— 2- ————————-

प्रश्न 10 – इस अनुच्छेद से आपको क्या सीख मिलती है?
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 13:

गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 में गुजरात के पोरबन्दर नामक शहर में हुआ था । इनकी माता पुतलीबाई तथा पिता करमचंद गांधी थे । माता पुतलीबाई बड़ी ही धार्मिक विचारों की महिला थीं । गांधी जी का विवाह कस्तूरबा जी के साथ हुआ था। कानून की पढ़ाई उन्होंने इंग्लॅण्ड से की थी । गांधी जी को छुआछूत में जरा सा भी विश्वास नहीं था । उन्होंने इस बुराई को समाप्त करने का भरपूर प्रयास भी किया।

अंग्रेजों से भारत को स्वतंत्र कराने में गांधी जी ने अनेक आंदोलन किये जिनमे -असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह आंदोलन, डांडी यात्रा या नमक आंदोलन मुख्य है। स्वतंत्रता की लड़ाई में उनके हथियार सत्य एवं अहिंसा ही थे । उन्होंने इन्ही के बल पर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश कर दिया था। हम आज जिस खुली हवा में सांस ले रहे है वह सब हमे गांधी जी तथा सुभाषचंद बॉस, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद डा भीमराव अम्बेडकर तथा बल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं के प्रयासों से ही मिली है। हमारा कर्त्तव्य है कि हम न केवल अपने देश की स्वतंत्रता को बनाये रखे बल्कि अपने सुकर्मों से देश को पुनः विश्वगुरु बनाये ।

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न -1 गांधीजी का जन्म कब तथा कहाँ हुआ था?

प्रश्न -2 इनके माता-पिता कौन थे?

प्रश्न -3 गांधीजी ने किस बुराई को समाप्त करने का प्रयास किया?

प्रश्न- 4 गांधीजी के दो हथियारों के नाम लिखिए

प्रश्न -5 देश के प्रति हमारा क्या कर्त्तव्य है?

   उत्तर पत्र

 उत्तर 1-गांधीजी जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 में गुजरात के पोरबन्दर नामक शहर में हुआ था । उत्तर 2 -इनकी माता पुतलीबाई तथा पिता करमचंद गांधी थे ।

 उत्तर 3 गांधी जी ने छुआछूत जैसी बुराई को समाप्त करने का प्रयास किया

 उत्तर 4-गांधीजी के दो हथियार सत्य एवं अहिंसा ही थे ।

 उत्तर 5-हमारा कर्त्तव्य है कि हम न केवल अपने देश की स्वतंत्रता को बनाये रखे बल्कि अपने सुकर्मों से देश को पुनः विश्वगुरु बनाये ।
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 14:

वर्तमान समय में विज्ञान ने बहुत उन्नति कर ली है. इस उन्नति ने हमें हर कार्य करने के लिए अलग -अलग उपकरण प्रदान किये हैं. जैसे – कपडे धोने के लिए मशीन, कपडे सिलने के लिए सिलाई मशीन, आटा पीसने की मशीन, सब्जी काटने की मशीन, पानी ठंडा करने तथा भोजन को लम्बे समय तक ताज़ा रखने के लिए रेफ्रिजरेटर और भी न जाने कितनी ही मशीनों ने हमारे घरों में अपनी जगह बना ली है. इन मशीनों के कारण मनुष्यों में शारीरिक श्रम की प्रवृत्ति लगभग समाप्त हो चुकी है एवं विभिन्न बीमारियों ने शरीर में अपना घर बना लिया है. प्राचीन काल में मशीन तो नहीं थीं किन्तु सभी कार्य सरलता एवं सुगमता से होते थे साथ ही शारीरिक श्रम के कारण मनुष्यों के शरीर निरोगी एवं सुगठित होते थे. सभी मानव लम्बे कद के तथा कम से कम शतायु तो अवश्य होते थे.

आज हमें तरह -तरह की बीमारियों ने जकड़ रखा है. इससे हम न केवल रोगी हैं बल्कि अल्पायु भी होने लगे हैं. हमें मशीनों पर अपनी निर्भरता को समाप्त कर शारीरिक श्रम के महत्त्व को समझना होगा. जब हम स्वस्थ्य होंगे तभी हम किसी भी कार्य को पूरे मन से सफलता पूर्वक कर पाएँगे. स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है और स्वस्थ मस्तिष्क ही सफलता की सीढ़ी के द्वार खोलता है. अतः हमें मशीनों पर अपनी निर्भरता को रोकना चाहिए और शारीरिक श्रम के महत्त्व को पहचानकर प्रतिदिन श्रम करना चाहिए. शारीरिक श्रम को अपनाकर ही हम अपना सच्चा विकास कर पाएँगे.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न -1 गद्यांश से ता प्रत्यय वाले शब्द छांट कर लिखिए.

प्रश्न -2 किन्हीं चार घरेलू मशीनों के नाम लिखिए.

प्रश्न -3 गद्यांश में क्या अपनाने पर विशेष बल दिया गया है?

प्रश्न -4 इन शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए – श्रम, उन्नति

प्रश्न -5 बताइए कि सफलता की सीढ़ी के द्वार किस प्रकार खुलते हैं?

प्रश्न -6 संयुक्त अक्षरों वाले चार शब्द लिखिए.

प्रश्न -7 प्राचीन काल में मनुष्य शतायु क्यों होते थे?

प्रश्न -8 शारीरिक श्रम न करने के कारण मनुष्य को किसने जकड़ा है?

प्रश्न -9 हम अपना विकास कैसे कर सकते हैं?

प्रश्न -10 गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए.

  उत्तर पत्र

उत्तर-1 सरलता एवं सुगमता

उत्तर -2 -1 कपडे धोने के लिए मशीन,

  2-कपडे सिलने के लिए सिलाई मशीन

  3- आटा पीसने की मशीन, सब्जी काटने की मशीन

  4-पानी ठंडा करने तथा भोजन को लम्बे समय तक ताज़ा रखने के लिए रेफ्रिजरेटर

उत्तर -3 – शारीरिक श्रम को

उत्तर -4 -1-श्रम- परिश्रम, मेहनत, 2- उन्नति -विकास, प्रगति

 उत्तर -5 स्वस्थ मस्तिष्क ही सफलता की सीढ़ी के द्वार खोलता है.

उत्तर -6 -1 स्वस्थ 2 मस्तिष्क 3 उन्नति 4 सब्जी

उत्तर- 7 -शारीरिक श्रम कर निरोगी रहकर

उत्तर -8 बीमारियों ने

उत्तर – 9 शारीरिक श्रम को अपनाकर ही हम अपना सच्चा विकास कर पाएँगे.
 उत्तर -10 शारीरिक श्रम का महत्त्व
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 15:

रंग -बिरंगे फूल किसका मन नहीं मोह लेते I अर्थात फूल सभी को प्रिय होते हैं I जब कभी हम फूलों से भरे बगीचे के समीप से गुजर रहे होते हैं तो फूलों की सुगंध हमें बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है I फूलों को हम अन्य नामो से भी पुकारते हैं – पुष्प,सुमन, कुसुम एवं प्रसून आदि I इसी प्रकार फूल कई तरह के होते हैं जैसे- गुलाब, बेला,चमेली गेंदा आदि I फूल हमारे जीवन में अपना विशिष्ठ स्थान रखते हैं -जन्मोत्सव हो अथवा विवाह, पूजा का अवसर हो या किसी के स्वागत की तैयारी, किसी त्योहार पर रंगोली बनानी हो या भगवान के लिए माला अथवा गहने हमें फूलों की आवश्यकता होती है I क्या आप जानते हैं क़ि हम लोग जिस सुगन्धित इत्र का प्रयोग करते हैं वह भी फूलो से बनता है I गुलाब के फूलों का गुलकंद बनता है जो हमारे शरीर को ठंडक देता है I गुलाब के रस से गुलाब जल बनता है जो आँखों के लिए बड़ा लाभकारी है I तो देखा आपने फूल किस प्रकार हमारे जीवन का महत्त्वपूर्ण अंग हैं I हाँ, एक विशेष बात फूलों की, कि ये बिना किसी भेद -भाव के अपनी सुगंध सबको देते हैं I इनके लिए न कोई छोटा है न बड़ा, न कोई गरीब है न अमीर – फूल सबको अपनी सुगंध बिना शर्त बाँटते हैं I
 प्रश्न-1 – ऊपर लिखे अनुच्छेद को आप क्या नाम (शीर्षक)  देना चाहेंगे?

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न-2- फूलों के कोई अन्य दो नाम लिखिए I

प्रश्न-3- फूलों को हम किस-किस उपयोग में लाते हैं?

प्रश्न-4-गुलाब के फूल से क्या-क्या बनता है?

प्रश्न -5-जो फूल आपको पसंद हो उसका नाम लिखिए I
    उत्तर पत्र

उत्तर 1- मैं अनुच्छेद को “रंग -बिरंगे फूल” नाम (शीर्षक)  देना चाहती /चाहता हूँ

उत्तर-2-फूलों के कोई अन्य दो नाम “पुष्प और सुमन” हैं I

उत्तर 3-रंगोली,इत्र,गुलाब जल,माला अथवा गहने, गुलकंद आदि बनाने के उपयोग में लाते हैं.

उत्तर 4-गुलाब के फूल से गुलाब जल,गुलकंद आदि बनता है.

उत्तर -5 मुझे गुलाब, बेला,चमेली आदि फूल पसंद हैं.
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 16:

बच्चों क्या आपने कभी ऐसा पक्षी देखा है जिसके सिर पर मोर की ही तरह मुकुट होता है जी हाँ मुकुट ! इसके पंख ही इसके मुकुट की तरह होते हैं. यह पक्षी इस्रायल का राष्ट्रीय पक्षी है. इसका नाम भी थोड़ा अजीब सा है “हुदहुद “. यह तितली की तरह उड़ान भरता है. यह अपने पंखों को इकठ्ठा करे जोर से छोड़ता है. इसकी चोंच लम्बी और काफी मजबूत होती है. भोजन की तलाश में यह अपनी चोंच धरती में गड़ा देता है और शिकार मिलने पर धरती के अंदर ही चोंच खोलकर शिकार को पकड़कर खा जाता है. यह कई प्रकार के वातावरण में रह सकता है. ठन्डे हो या गर्म क्षेत्र यह सभी जगह आसानी से रह सकता है. हुदहुद का एक नाम और है हुप्पी. यह नाम इसकी आवाज के कारण ही पड़ा है. इसका भोजन छोटे-छोटे कीट, जमीन के अंदर रहने वाले केंचुआ, कीट आदि हैं. यह खुले जंगलों में, शहर में पार्कों के आसपास देख जा सकता है. यह अपना घोंसला पेड़ों की खोल, कोटर तथा पत्थरों की दरारों के बीच में बनाता है. इसके अंडे से जब तक चूजे नहीं निकलते मादा पक्षी घोंसले में रहकर अण्डों की रक्षा करती है. नर पक्षी उसके लिए खाना लाता है. शिकारियों से बचने के लिए ये घोंसले के आसपास बदबू फैला लेते हैं.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न-1 इस्रायल के राष्ट्रीय पक्षी का क्या नाम है?

प्रश्न -2 इस पक्षी की उड़ान किसकी तरह होती है?

प्रश्न 3-यह अपना घोंसला कहाँ -कहाँ बना सकता है?

प्रश्न 4-इसका भोजन क्या है?

प्रश्न 5-शिकारियों से बचने के लिए यह क्या उपाय करता है?

         उत्तर –
  उत्तर-1 इस्रायल का राष्ट्रीय पक्षी “हुदहुद ” है.

 उत्तर-2 इस पक्षी की उड़ान तितली की तरह होती है.

 उत्तर 3-यह अपना घोंसला पेड़ों की खोल, कोटर तथा पत्थरों की दरारों के बीच में बनाता है.

 उत्तर 4-इसका भोजन छोटे-छोटे कीट, जमीन के अंदर रहने वाले केंचुआ, कीट आदि हैं.

 उत्तर 5-शिकारियों से बचने के लिए ये घोंसले के आसपास बदबू फैला लेते हैं.
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 17:

एक बार जब महात्मा बुद्ध कपिलवस्तु पहुँचे तो बहुत से राजकुमार उनके अनुयायी बन गए. उनमें भगवान बुद्ध का ममेरा भाई देवदत्त भी था. बुद्ध के साथ रहते-रहते देवदत्त ने कुछ जादुई शक्तियाँ प्राप्त कर लीं और स्वयं को बुद्ध से श्रेष्ठ घोषित करने लगा. देवदत्त उन्हें हमेशा नीचा दिखाने का कोई न कोई रास्ता ढूंढता रहता था. किन्तु वह हर बार असफल ही हो जाता था. उसने भिक्षुओं को बुद्ध से विमुख करने का प्रयास कई बार किया. वह कई नए-नए तरीके अपनाकर बुद्ध को नीचा दिखाने एवं उन्हें रास्ते से हटाने का प्रयास करता था. यहाँ तक कि वह बुद्ध की हत्या का षडयंत्र रचने लगा. एक दिन देवदत्त ने राजा मगध के अस्तबल से एक विशाल हाथी नालगिरी को नशीला द्रव्य पिलाकर बुद्ध के आने वाले रास्ते पर छोड़ दिया. नालगिरी के आने से सड़कों पर खलबली मच गई और लोग जहाँ-तहाँ भाग खड़े हुए. तभी बुद्ध भी वहाँ से गुजरे. ठीक उसी समय एक स्त्री घबराई हुई सी अपने बच्चे को छोड़ भाग खड़ी हुई. उसी क्षण जैसे ही नालगिरी ने बच्चे को कुचलने के लिए अपना पैर उठाया, बुद्ध उसके ठीक सामने खड़े हो गए. उन्होंने बड़े ही प्यार से हाथी को स्पर्श किया और थपथपाया. बुद्ध के स्पर्श से नालगिरी घुटने टेक बुद्ध के सामने बैठ गया.

सच्चे तपस्वियों, महात्माओं में वो तेज एवं ऊर्जा होती है जो दुखी प्राणी को सुख, अशान्त प्राणी को शांति देती है. निर्जीव में प्राण फूंक देती है. अतः सबको अपना अंतःकरण शुद्ध एवं पावन बनाना चाहिए.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- महात्मा बुद्ध कहाँ पहुँचे?

प्रश्न 2- उनके अनुयायी कौन-कौन थे?

प्रश्न 3 – देवदत्त कौन था?

प्रश्न 4- उसके पास कौन सी शक्तियाँ थीं?

प्रश्न 5-देवदत्त ने किस राज्य के अस्तबल से हाथी को लिया?

प्रश्न-6 उस हाथी का क्या नाम था?

प्रश्न 7- उस हाथी को उस्नेक्य पिलाकर कहाँ छोड़ा?

प्रश्न 8- बुद्ध के स्पर्श से हाथी ने क्या किया?

प्रश्न 9- गद्यांश से दो संज्ञा शब्द चुनकर लिखिए.

प्रश्न 10-स्वविवेक से हाथी की दो विशेषताएँ बताइए.
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 18:

जब रात के समय खुले आसमान की ओर हमारी आँखें उठ जाती हैं तो टिमटिमाते तारों को एकटक निहारने लगती हैं. मन उनमें ही खो जाता है. ऐसा लगता है कि जैसे ये सभी तारे किसी बड़े से गोले पर बिखरे हैं और इनकी दूरी भी एक समान है. इसी आधार पर भारतीय खगोल विज्ञानियों ने इसे नक्षत्र लोक का नाम दे दिया. इसी अनुमान के आधार पर अमीर-खुसरो ने इस पहेली की रचना भी कर डाली – ‘ एक थाल मोती भरा सबके सिर औंधा पड़ा ‘. इस पहेली को तो हम और आप कई बार हल कर चुके हैं. आज हम जानते हैं कि उनकी यह बात सही नहीं थी क्योंकि न तो कोई गोल है, न ही सभी तारे एक समान दूरी पर हैं. हाँ कुछ तारे हमसे बहुत दूर हैं तो कुछ बहुत पास. हमारी दृष्टि में सूर्य बड़ा एवं अधिक प्रकाशमान तारा है किन्तु ऐसा नहीं है यह तो पृथ्वी के निकट है इसलिए यह हमें अधिक प्रकाशमान प्रतीत होता है. आकाशगंगा में अनेक तारे सूर्य से कई गुना बड़े हैं. इन्हें महादानव कहा जाता है एवं जो तारे पृथ्वी तथा बुध ग्रह से भी छोटे हैं उन्हें श्वेत मानव या बौने तारे कहा जाता है.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- गद्यांश में आई पहेली की रचना किसने की?

प्रश्न 2- तारों की दुनिया को भारतीय खगोल विज्ञानियों ने क्या नाम दे दिया ?

प्रश्न 3- सूर्य कैसा तारा है?

प्रश्न 4- गद्यांश से दो संज्ञा शब्द ढूंढ़कर लिखिए.

प्रश्न 5- जो तारे पृथ्वी तथा बुध ग्रह से भी छोटे हैं उन्हें क्या नाम दिया गया है?

प्रश्न 6- गद्यांश से दो संयुक्ताक्षर शब्द ढूंढ़कर लिखिए.

प्रश्न 7- गद्यांश से दो विशेषण शब्दसे ढूंढ़कर लिखिए.

प्रश्न 8- निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए.

क – मानव  ख –एक

प्रश्न 9- आसमान का पर्यायवाची शब्द गद्यांश से ढूंढ़कर लिखिए

प्रश्न 10- आप गद्यांश का नाम रखना चाहेंगे?
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 19:

मेरा नाम ईशान है. मैं मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में रहता हूँ. मेरा घर शहर से दूर खेरापति कालोनी में है. मैं संयुक्त परिवार में रहता हूँ. हमारा घर बड़ा है. घर में कई कमरे हैं. एक बड़ा आँगन एवं एक बड़ा बगीचा भी है. यह बगीचा मुझे और मेरे दादाजी को बेहद प्रिय है. बगीचे में हर मौसम में रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं. इन फूलों की महक से हमारा घर हमेशा महकता रहता है. बगीचे में फूलों की क्यारियों के अलावा रसीले फलों के पेड़ भी हैं. इन वृक्षों पर कई पक्षियों ने अपने घोंसले भी बना रखे हैं. एक दिन दादाजी ने मुझे इन पेड़ों के बारे में बताया कि आम का पेड़ उन्होंने पापा के जन्म पर लगाया था तो चाचा के जन्म पर जामुन का. बुआ के जन्म पर लीची का पेड़ लगाया था. इस प्रकार हर बच्चे के जन्म पर उन्होंने कोई न कोई पेड़ लगाया और उसका भी नाम रखकर उसकी देखभाल भी अपने बच्चों की तरह ही की. पेड़ों पर बड़ी ही फुर्ती से चढ़ती-उतरती गिलहरी को देखते ही मुझमें भी फुर्ती सी आ जाती है. इन वृक्षों पर खूब फल आते हैं. इन फलों को हम लोग तो खाते ही हैं पर दादी आस-पड़ोस में भी सबको बाँट देती हैं. हाँ एक बात और कि दादी, हमारे घर काम करने वाली बबीता आंटी को भी फल देना नहीं भूलती. बगीचे में हरी मुलायम घास पर आराम करना बहुत आनंददायक होता है. पेड़ों पर बैठे पक्षियों की आवाज से वातावरण मनमोहक हो जाता है. दादाजी ने बगीचे के एक कोने में झूला भी लगा रखा है जिस पर हम बच्चों को झूलने में बड़ा मजा आता है. सावन के महीने में मेरी माँ, चाची एवं दादी की सहेलियाँ आती हैं और झूला झूलते हुए सावन के गीत गाती हैं. इस प्रकार हमारा यह बगीचा हमें हमारी संस्कृति से भी जोड़े रखता है. मुझे मेरा बागीचा बेहद प्रिय है.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिये –

प्रश्न 1-ग्वालियर शहर भारत के किस प्रदेश में है?

प्रश्न 2- अपने बगीचे के बारे में चर्चा कौन कर रहा है?

प्रश्न 3 – बगीचे में लगे आम, जामुन और लीची के पेड़ों की क्या ख़ास बात है?

प्रश्न 4 – दादी फलों को किस-किस को बाँटती हैं?

प्रश्न 5- झूला झूलने किस-किस की सहेलियां आती हैं?

प्रश्न 6- बगीचे की घास की क्या विशेषता है?

प्रश्न 7- गद्यांश से दो क्रिया शब्द चुनकर लिखिए –

प्रश्न 8 – गद्यांश से दो विशेषण शब्द चुनकर लिखिए –

प्रश्न 9 –गद्यांश का उचित शीर्षक बताएँ.

प्रश्न 10 – गिलहरी कैसी होती है?

उत्तर -–

1- मध्य प्रदेश में.

2- ईशान

3- इन पेड़ों की ये विशेषताएं हैं कि आम का पेड़ पापा के जन्म पर तो चाचा के जन्म पर जामुन का और बुआ के जन्म पर लीची का पेड़ लगाया गया था.

 4- दादी आस-पड़ोस में भी सबको बाँट देती हैं और हमारे घर काम करने वाली बबीता आंटी को भी फल देना नहीं भूलती.

 5 – माँ, दादी और चाची की.

6 – घास हरी और मुलायम है.

7- बाँटती, भूलती

8 – रसीले, रंग-बिरंगे

9- मेरा सुंदर बगीचा

10- बड़ी ही फुर्तीली
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 20:

मैं कक्षा तीन में पढ़ता हूँ. मेरे विद्यालय का नाम सरस्वती विद्यामंदिर हैं. यह शहर का सबसे प्रसिद्ध विद्यालय है. यह बहुत बड़ा है. मेरे विद्यालय में लगभग पाँच हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं. विद्यालय के सभी अध्यापक अध्यापिकाएँ बहुत ही अच्छे हैं. वे सभी विद्यार्थियों का बहुत ध्यान रखते हैं. उनकी हर समस्या को ध्यान से सुनकर उसका समाधान भी करते हैं. ऐसे शिक्षक – शिक्षिकाओं के कारण ही विद्यालय का परीक्षा परिणाम हर वर्ष बढ़िया आता है. हर बच्चे के माता –पिता विद्यालय के सभी गुरुजनों से अत्यंत प्रभावित एवं प्रसन्न रहते हैं. इसी कारण हर माता – पिता अपने बच्चों को इसी विद्यालय में पढ़वाना चाहते हैं. विद्यालय की और भी अन्य खूबियाँ हैं. मेरे विद्यालय में चार पुस्तकालय हैं जिसमें कक्षाओं के आधार पर पुस्तकें मिलती हैं. यहाँ खेल का मैदान बहुत बड़ा है, यहाँ का तरणताल एकदम साफ़-सुथरा रहता है. अन्य सभी खेलों को सिखाने की भी अच्छी व्यवस्था है. घुड़सवारी करने और सीखने का यहाँ अलग ही मजा आता है. इन्हीं सब खूबियों के कारण ही मेरा विद्यालय देश के प्रसिद्ध विद्यालयों में नम्बर एक पर है. मुझे मेरा विद्यालय अत्यंत प्रिय है.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

 प्रश्न 1- गद्यांश में किस विद्यालय की चर्चा की गई है?

प्रश्न 2- विद्यालय के बारे में जानकारी देने वाला स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग, बताएँ?

प्रश्न 3- विद्यालय में कितने पुस्तकालय हैं?

प्रश्न 4-विद्यालय की किन्हीं दो विशेषताओं को लिखिए –

प्रश्न 5- पर्यायवाची शब्द लिखिए –

क- अध्यापक, ख- शिक्षिका

प्रश्न 6- बहु वचन बताएँ –

क- कक्षा, ख- पुस्तक

प्रश्न 7- दो संयुक्ताक्षर शब्द लिखिए

प्रश्न 8 – दो संज्ञा शब्द लिखिए

प्रश्न 9- दो सर्वनाम शब्द लिखिए –

प्रश्न 10 – गद्यांश को आप क्या नाम देना चाहेंगे?

उत्तर पत्र

उत्तर 1 – सरस्वती विद्यामंदिर.

उत्तर 2- पुल्लिंग

उत्तर 3 – चार

उत्तर 4 – 1- बड़ा है, 2- यहाँ लगभग सभी खेलों की व्यवस्था है.

उत्तर 5 – अध्यापिका, शिक्षक

उत्तर 6 – कक्षाएँ, पुस्तकें

उत्तर 7 – अत्यंत, सरस्वती

उत्तर 8 – 1 – सरस्वती 2 – विद्यामंदिर

उत्तर 9 – मुझे, मेरा
 उत्तर 10 – मेरा विद्यालय
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 21:

ज की भागती दौड़ती जिन्दगी से मुस्कराहट तो न जाने कहाँ खो गई है. कुछ दशक पहले तक तो लोग एक-दूसरे को देखते ही एक सुंदर सी मुस्कराहट के साथ अभिवादन करते थे, किन्तु आज दशा यह है कि किसी पहचान वाले को देखते ही व्यस्तता को मुखौटा लगाकर अभिवादन की प्रक्रिया से स्वयं को बचाकर सुरक्षित निकलना ही बहादुरी का कार्य समझते हैं. जबकि मुस्कराहट एक ऐसी औषधि है जो मनुष्य को बिना किसी दाम के मिली है, यह उसके शारीरिक एवं मानसिक रोगों का उपचार करने में पूर्णतः सक्षम है. जो व्यक्ति मुस्कराकर दिन की शुरुआत करता है वह निश्चय ही सारे दिन ऊर्जावान रहता है, वह बिना किसी तनाव के सारे कार्य कुशलता से पूर्ण कर पुनः अगले दिन के लिए नए कार्यों को पूरा करने की कुशल रणनीति बना, निश्चिन्त हो सो जाता है. पुनः नई ऊर्जा, नए विशवास के साथ दिन का शुभारम्भ करता है और सफलता प्राप्त करता है. ऐसे व्यक्ति का सानिध्य सभी लोग चाहते हैं, उसकी एक छोटी सी मुस्कराहट के कारण ज्यादा से ज्यादा लोग उसके समीप आने का प्रयास करते हैं. ठीक इसके विपरीत अनायास ही खीजने वाले व्यक्ति से हर कोई दूरी बनाना पसंद करता है, हर कोई उससे बचना चाहता है. पुरानी कहावत है कि प्रसन्न वदन के दर्शन मात्र से ही समस्त कार्य पूर्ण हो जाते हैं, अतः हमारा प्रयास होना चाहिए कि स्वयं प्रसन्न रहकर दूसरों को भी खुशियाँ बांटे. सचमुच मुस्कराहट अनमोल होती है एक छोटी सी मुस्कराहट से बड़े-बड़े कार्य सहजता से सम्पन्न हो जाते हैं. कहते हैं न कि हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा होए. तो अब तो आप समझ ही गए होंगे कि एक छोटी सी मुस्कराहट कितने काम की है. तो चलिए आज से बल्कि अभी से मुस्कराने की आदत डालिए खुद स्वस्थ रहकर लोगों में खुशियाँ बाँटिए.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न-1 प्रस्तुत गद्यांश जीवन की किस अनमोल औषधि के बारे में बताता है? स्पष्ट करें.

प्रश्न – 2 गद्यांश में किस कहावत की चर्चा की गई है, उस कहावत को लिखें.

प्रश्न 3 –अधिक ऊर्जावान रहने के लिए किस उपाय को बताया है, गद्यांश से ढूँढकर लिखिए-

प्रश्न 4- अभिवादन करते समय हमें अपने मुख पर कैसे भाव रखने चाहिए?

प्रश्न 5 – गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए-

 उत्तर-पत्र

उत्तर 1- गद्यांश में मुस्कराहट के बारे में बताया है कि मुस्कराहट एक ऐसी औषधि है जो मनुष्य को बिना किसी दाम के मिली है, यह उसके शारीरिक एवं मानसिक रोगों का उपचार करने में पूर्णतः सक्षम है.

उत्तर 2- गद्यांश में हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा होए कहावत की चर्चा की गई है, जिससे हमें मुस्कराहट की कीमत का पता लगता है कि मुस्कराहट अनमोल होती है और यह मनुष्य के अंतःकरण से निकलकर लोगों पर अपना स्थायी प्रभाव छोडती है तथा बिना किसी दाम के अपने आस-पास के वातावरण को मनभावन बना देती है.

उत्तर 3- ऊर्जावान रहने के लिए हमें दिन का आरम्भ मुस्कराहट के साथ करना चाहिए.

उत्तर 4 – अभिवादन करते समय हमें अपने मुख पर प्रसन्नता के भाव रखने चाहिए.

प्रश्न 5 – गद्यांश का उचित शीर्षक है “ मुस्कराहट “
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 22:

एक बार कोई महात्मा तपस्या में लीन थे. उनके समीप से एक चोर गुजर रहा था. चोर ने महात्मा जी को ध्यानावस्था में देखा तो उसे एक शरारत सूझी. उसने चोरी की हुई एक तलवार महात्मा जी के समीप रख दी और वहाँ से भाग गया. तपस्या पूरी होने पर महात्मा जी ने आँखें खोली तो पास में रखी तलवार को देखा. महात्मा जी दुनिया से बेखबर रहने वाले बिलकुल सीधे -सच्चे संत थे. उन्होंने पहले कभी तलवार नहीं देखी थी. उन्होंने तलवार उठाई तो तलवार छिटककर एक पौधे को काटती हुई दूर जा गिरी. महात्मा जी ने कटे पौधे को देखा तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ. अब मजे -मजे में उन्होंने हर चीज को काटना शुरू कर दिया. लोग बड़े परेशान हो गए, यहाँ तक कि देवतागण भी दुखी होकर ईश्वर से प्रार्थना करे लगे कि किसी प्रकार महात्मा जी को रोका जाए. भगवान ने सबकी प्रार्थना सुनी और सोते हुए महात्मा जी के पास से तलवार उठा ली और उसके स्थान पर एक कलम रख दी. सुबह जागने पर महात्मा जी ने कलम को देखा तो कलम एक अलोकिक प्रकाश से जगमगा रही थी. उन्होंने उसे उठाया और पत्ते पर रखा उस पर कुछ शब्द उभर आये. अब तो महात्मा जी की ख़ुशी का ठिकाना न रहा और वे भगवत भक्ति की रचनाएं करने लगे. महात्मा जी ने जो कुछ लिखा वह अदभुत था, उसे पढ़कर लोग उनकी जय-जयकार करने लगे.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

 प्रश्न 1-तपस्या कौन कर रहा था?

क – राजा   ख -मुनि   ग-चोर   घ- महात्मा
 प्रश्न 2- महात्मा जी के पास चोर ने क्या रखा?

क-तलवार   ख-कलम  ग – कपड़े  घ- भोजन
 प्रश्न 3-महात्मा जी कैसे स्वभाव के थे?

क-क्रोधी   ख-नम्र  ग-चालक   घ-सीधे-सच्चे संत
 प्रश्न 4-महात्मा जी के हाथ से तलवार छूटने पर क्या हुआ?

क- शेर के पैर पर गिरी      ख- महात्मा जी के हाथ पर गिरी 
 ग- एक पौधे को काटती हुई दूर जा गिरी   घ-उड़ती चिड़िया के पंखों को काटती गिर पड़ी
 प्रश्न 5- गद्यांश में आई चार जातिवाचक संज्ञा छांटकर लिखिए- 1-     2-     3-     4-
 प्रश्न 6-गद्यांश का उचित शीर्षक बताइए-
 प्रश्न 7- तलवार पाकर महात्मा जी ने क्या किया?
 प्रश्न 8 -महात्मा जी के व्यवहार से कौन-कौन दुखी हुआ?
 प्रश्न 9- प्रार्थना सुनकर भगवान ने क्या किया?
 प्रश्न 10- कलम पाकर महात्मा जी के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 23:

भारतीय संस्कृति की अपनी अनेक विशेषताएं हैं. साँझी संस्कृति के कारण भारत को विश्व में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. अनेक भाषाओँ और बोलियों के होते हुए भी भारतवासी एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं. विविधता में एकता भारत की अस्मिता की पहचान है. आज सम्पूर्ण विश्व में प्रेम और सदभाव की कमी खटक रही है. मानव-मानव के प्रति कठोर होता जा रहा है. यदि देख जाए तो आज वसुधैव कुटुम्बकम की नीति का पालन करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. संगठन और प्रेम में जितनी शक्ति होती है उतनी किसी अन्य चीज में नहीं है. व्यक्ति के सुख में सुख का अनुभव और दुःख में दुःख का अनुभव करना ही मानवता की सच्ची पहचान है.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न-1 भारतीय संस्कृति की क्या विशेषताएँ हैं? स्वविवेक से उत्तर दें.
 प्रश्न 2-गद्यांश में आये किन्ही दो संयुक्ताक्षरों को लिखिए.
 प्रश्न 3- इन शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-
 क -प्रेम ↔   ख एकता ↔
 प्रश्न 4- भारत में बोली जाने वाली किन्हीं दो बोलियों के नाम लिखिए.
 प्रश्न 5 –“ मानव – मानव के प्रति कठोर होता जा रहा है “ कैसे? आज की विश्व की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उत्तर दें.
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 24:

भारत में ही नहीं बल्कि भारत से बाहर भी राम लोकप्रिय हैं. राम के जीवन पर आधारित न जाने कितने ही ग्रन्थ भारत में तो मिल ही जाएँगे अपितु विश्वभर में भी इनकी संख्या कम नहीं है. राम एक लोकप्रिय जननायक हैं. भारत में तो जनमानस के प्राण हैं. राम के जीवन की एक-एक घटना बड़ी ही महत्त्वपूर्ण है, इसीलिए तो हर वर्ष भारत में रामलीला का आयोजन किया जाता है. राम कथा का पाठ होता है. राम जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से आयोजित किया जाता है. हर बालक में माँ को राम-कृष्ण की छवि दिखती है. हर माँ का सपना होता है कि उनका बेटा राम जैसा आज्ञाकारी हो. राम की सौगंध लेकर स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने की परम्परा भारत में प्रचलित है. एक दूसरे को अभिवादन करने के लिए राम-राम कहा जाता है. एक आदर्श चरित्र के रूप में राम की स्वीकृति भारत के बाहर भी है. रामलीलाएँ दक्षिणी और दक्षिणी-पूर्वी एशिया के लगभग सभी देशों में किसी न किसी रूप में दिखाई जाती हैं. कहीं कठपुतली के रूप में तो कहीं नृत्य-नाटिका के रूप में. इंडोनेशिया में सेन्द्रातारी रामायण बड़ी लोकप्रिय है. इंडोनेशिया के जावा के प्रम्बनान मंदिर में राम की यह लीला तक़रीबन साल भर चलती है. यह रामकथा पर आधारित एक नृत्य-नाटिका (बैले-डांस)  है. इसमें एक समय में कलाकारों की संख्या दो सौ से भी ज्यादा हो जाती है. कभी-कभी आठ सौ तक हो जाती है. यहाँ भी भारत की भाँति सीता-हरण, मारीचि वध आदि दृश्य दिखाए जाते हैं. फ्रा लाक फ्रा राम नाम का महाकाव्य बर्मा और चीन के बीच पड़ने वाले देश लाओस का राष्ट्रीय महाकाव्य है. इसकी कहानी भारतीय रामकथा से बहुत मिलती-जुलती है. फिजी में होने वाली रामलीला का वाल्मीकि रामायण एवं रामचरित मानस के जैसा ही मंचन होता है. रामत्जांद्रे की लीला में डच प्रभाव के कारण सूरीनाम में भगवान् राम रामत्जांद्रे हो जाते हैं और सीता सियेता हो जाती हैं. रामायण के सभी पात्र जब हिंदी और डच मिश्रित भाषा बोलते हैं तो एक अद्भुत वातावरण बन जाता है. सच ही कहा गया है कि राम हर जगह किसी न किसी रूप में व्याप्त हैं.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- राम का सम्बन्ध मुख्य रूप से किस देश से है?

प्रश्न 2- रामायण महाकाव्य की रचना किस कवि द्वारा की गई?

प्रश्न 3- फ्रा लाक फ्रा राम किस देश का राष्ट्रीय महाकाव्य है?

प्रश्न 4- सेन्द्रतारी रामायण के बारे में तीन-चार वाक्य लिखिए.

प्रश्न 5-इस गद्यांश को आप क्या नाम देना चाहते हैं?

प्रश्न 6- डच भाषा के प्रभाव के कारण राम-सीता के बदले नाम क्या हैं तथा किस देश में इसका आयोजन होता है?

उत्तर-पत्र

 उत्तर-1 राम का सम्बन्ध मुख्य रूप से भारत से है.

उत्तर-2 रामायण महाकाव्य की रचना महाकवि वाल्मीकि द्वारा की गई.

उत्तर-3 फ्रा लाक फ्रा राम नाम का महाकाव्य बर्मा और चीन के बीच पड़ने वाले देश लाओस का राष्ट्रीय महाकाव्य है.

उत्तर-4 इंडोनेशिया के जावा के प्रम्बनान मंदिर में सेन्द्रतारी रामायण पर आधारित राम की यह लीला तक़रीबन साल भर चलती है. यह रामकथा पर आधारित एक नृत्य-नाटिका (बैले-डांस)  है. इसमें एक समय में कलाकारों की संख्या दो सौ से भी ज्यादा हो जाती है. कभी-कभी आठ सौ तक हो जाती है. यहाँ भी भारत की भाँति सीता-हरण, मारीचि वध आदि दृश्य दिखाए जाते हैं.
 उत्तर-5 इस गद्यांश को मैं रामलीला नाम देना चाहता /चाहती हूँ.

उत्तर-6 रामत्जांद्रे की लीला में डच प्रभाव के कारण सूरीनाम में भगवान् राम रामत्जांद्रे हो जाते हैं और सीता सियेता हो जाती हैं.
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 25:

जैसे हिन्दुओं का त्यौहार दीपावली कई दिन का त्यौहार होता है, उसी प्रकार ईसाइयों का त्यौहार क्रिसमस भी एक दिन का नहीं बल्कि कई दिनों तक मनाया जाने वाला त्यौहार है. इसकी तैयारियाँ तो नौ दिन पहले शुरू हो जाती हैं. इसे नोवेना कहते हैं. इनमें हर दिन नई-नई प्रार्थनाएँ की जाती हैं. हर रात एक मोमबत्ती जलाकर यानि हनुक्का मनाया जाता है. इस प्रकार यह त्यौहार नए साल तक मनाया जाता है. क्रिसमस पर गाए जाने वाले कैरोल की शुरुआत हजारों साल पहले यूरोप में हुई थी, तब ये क्रिसमस कैरोल नहीं बल्कि काव्य कथा होती थी. जिनके द्वारा लोग मदर मैरी और जीसस की कहानियाँ बताते थे. पहले क्रिसमस को मनाने की तारीख को लेकर काफी मतभेद थे, किन्तु रोम के बिशप जूलियन प्रथम ने सन 350 में नए कैलेंडर के हिसाब से 25 दिसम्बर को क्रिसमस मनाने की घोषणा कर दी. तब से यह सिलसिला जारी है. दुनिया भर में क्रिसमस मनाने का सबका अपना-अपना अलग-अलग तरीका है. फ़्रांस में छह दिसम्बर से ही उत्सव शुरू हो जाता है. बाजार सज जाते हैं, चौकलेट और तोहफों की भरमार होती है.

ब्रिटेन में बच्चे गिफ्ट की लिस्ट बना कर आग में जलाते हैं. यह माना जाता है कि यह कागज जलकर चिमनी से होता हुआ नॉर्थ पोल तक जाता है. जहाँ सांता की गिफ्ट फैक्ट्री है. जर्मनी में बच्चे सांता को बुलाने के लिए विश लिस्ट को रंग-बिरंगा सजाते हैं. वहीँ स्पेन में तोहफों की आस में बच्चे मोज़े नहीं बल्कि जूते टाँगते हैं. फिलिपीन्स के लोग कागज और बांस से बनी तारे के आकार की लालटेन से सजावट करते हैं. बच्चों को क्रिसमस ट्री सजाने का तोहफा 19वीं शताब्दी में मिला था. सब सोचते हैं कि क्या सच में सांता और उसके रेनडियरस नॉर्थ पोल से आते हैं. बात यह है कि चौथी शताब्दी में टर्की के एक बिशप थे संत निकोलस वे पता लगाते थे कि किस बच्चे ने अच्छा कार्य किया है, जिसे उपहार दिया जाए. इसके बाद ये चोगा पहनकर निकलते थे और बच्चों को उपहार देते थे. इस प्रकार सांता क्लॉज खूब प्रसिद्ध हो गए.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1- हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्यौहार का नाम बताइए.
 प्रश्न 2- नोवेना क्या है? बताएँ.
 प्रश्न 3-कैरोल की शुरुआत कहाँ से हुई पहले इसका क्या रूप था?
 प्रश्न 4 – ब्रिटेन में बच्चे क्रिसमस कैसे मनाते हैं?
 प्रश्न 5- उपरोक्त अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए.
 उत्तर पत्र
 उत्तर 1 – हिन्दुओं का प्रसिद्ध त्यौहार दीपावली है.
 उत्तर 2-क्रिसमस की तैयारियाँ नौ दिन पहले आरम्भ हो जाती हैं, इसमें हर दिन नई -नई प्रार्थनाएँ की जाती हैं. इसे नोवेना कहते हैं.
 उत्तर 3-कैरोल की शुरुआत यूरोप से हुई. पहले यह काव्य-कथा होती थीं. जिनके द्वारा लोग मदर मैरी तथा जीसस की कहानियाँ बताते थे.
 उत्तर 4- ब्रिटेन में बच्चे गिफ्ट की लिस्ट बना कर आग में जलाते हैं. यह माना जाता है कि यह कागज जलकर चिमनी से होता हुआ नॉर्थ पोल तक जाता है. जहाँ सांता की गिफ्ट फैक्ट्री है.  

उत्तर 5- क्रिसमस का त्यौहार.
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अपठित गद्यांश unseen passage in Hindi 26:

भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा को कौन नहीं जानता. भारत में ही नहीं बल्कि,विश्वभर में मथुरा के मंदिरों की धूम है. यदि मथुरा कृष्ण जी की जन्म-भूमि है तो मथुरा से सटे वृन्दावन में उन्होंने बचपन बिताया है. बचपन में कान्हा बड़े ही नटखट थे. माखन चुराना, गोपियों की मटकी तोड़ना उनके प्रिय खेल थे. वे ग्वाल-बालों के साथ गेंद भी खेलते थे. एक बार गेंद खेलते समय उनकी गेंद यमुना में चली गई. उनके सभी मित्र उदास हो गए कि गेंद तो यमुना में चली गई है, अब कैसे खेलेंगे? कान्हा ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे नदी से गेंद लेकर आते हैं. सब ग्वालों ने उन्हें रोकते हुए कहा कि यमुना जी में एक भयंकर काला नाग रहता है, वह तुम्हें जीवित नहीं छोड़ेगा. अतः हमें खेलने का विचार त्याग कर घर वापस चलना चाहिए. जब-तक मित्र-मण्डली कुछ समझ पाती कन्हैया कालिंदी में कूद गए. सब घबरा गए और भागकर यशोदा मैया के पास गए. उन्हें सारी बात बतायी. यशोदा मैया और नंदबाबा रोते-बिलखते यमुना तट पहुँचे, वे मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि ” प्रभु मेरे लाड़ले को सही-सलामत भेज दो. ” इतने में ही उन्होंने देखा कि कन्हैया नाग के सिर पर खड़ा बांसुरी बजा रहा है. कान्हा को सही-सलामत देखकर सबकी जान में जान आई और प्रसन्नता की लहर दौड़ गई. कृष्ण ने कालिया नाग के साथ घोर युद्ध कर उसे हरा दिया था और उसे यमुना जी को छोड़कर कहीं अन्य स्थान पर जाने को कहा था. कहते हैं कि युद्ध के समय उसने विष छोड़ा था, उसी विष के कारण कालिंदी का रंग काला हो गया.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1-भगवान कृष्ण का जन्म कहाँ हुआ था?

प्रश्न 2-कृष्ण जी का बचपन कहाँ बीता?

प्रश्न 3-अपठित गद्यांश में आए मुहावरे ढूँढकर लिखिए तथा यमुना नदी का दूसरा नाम बताइए –

प्रश्न 4-कृष्ण जी किसके साथ गेंद खेल रहे थे तथा गेंद कहाँ चली गई.

प्रश्न 5- कारण बताइए कि यमुना का रंग काला क्यों हो गया?

उत्तर –

उत्तर -भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था.

उत्तर 2-कृष्ण जी का बचपन वृन्दावन में बीता.

उत्तर 3- मुहावरे 1-जान में जान आई 2- प्रसन्नता की लहर दौड़ गई.

उत्तर 4- कृष्ण जी ग्वाल-बालों के साथ गेंद खेल रहे थे, उनकी गेंद यमुना नदी में चली गई थी.

उत्तर 5-कृष्ण जी गेंद लेने के लिए यमुना में गए और उन्होंने यमुना में रहने वाले कालिया नाग को मार दिया. ऐसा माना जाता है कि उसके विष के कारण ही यमुना नदी का रंग काला हो गया.

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