अपठित गद्यांश – संगति का प्रभाव

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Apathit Gadyansh with Answers in Hindi unseen passage

सत्संग से लौकिक और पारलौकिक दोनों प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं. यदि कोई मनुष्य इस जीवन में दुखी रहता है तो कम से कम कुछ समय के लिए श्रेष्ठ पुरुषों की संगति में वह अपने सांसारिक दुखों का विस्मरण कर देता है. महापुरुषों के उपदेश सदैव सुख शांति प्रदान करते हैं. दुख के समय मनुष्य जिनका स्मरण करके धीरज प्राप्त करता है. सत्संग में लीन रहने वाले मनुष्य को दुखों का भय नहीं रहता है. वह अपने दिल समझता है, जिससे दुखों का कोई कारण ही शेष नहीं रह जाता. सत्संग के प्रभाव से धैर्य लाभ होता है जिससे मन में क्षमा की शक्ति स्वयं ही आ जाती है. क्षमा सभी प्रकार के दुर्गुणों का विनाश कर देती है और मन को शांति व संतोष प्रदान करती है. इसी प्रकार के अन्य अनेक लाभ सत्संग द्वारा प्राप्त होते हैं. संगति का प्रभाव मन पर अनिवार्य रूप से पड़ता है अतः सत्संग में रहने वाला मनुष्य सदाचारी होता है. हमें भी सदस्य सज्जन पुरुषों की संगति करनी चाहिए और दुर्जन मनुष्य उसे दूर रहना चाहिए. दर्जनों के संग रहकर उत्कृष्ट गुणों वाला मनुष्य भी विनाश की ओर चला जाता है.

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

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  1. सत्संग से लौकिक और पारलौकिक सुख किस प्रकार प्राप्त होते हैं?
  2. सत्संग से मन को क्या लाभ प्राप्त होता है?
  3. दुर्जन व्यक्तियों से दूर रहने की सलाह क्यों दी गई है?
  4. अपठित गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए.

उत्तर –

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  1. सत्संग करने वाला व्यक्ति श्रेष्ठ पुरुषों की संगति में आने पर संसार क दुखों को भूल जाता है. सुख और दुख के बंधन से दूर हो जाता है. महापुरुषों के उपदेश उसमें धीरज को जन्म देते हैं और सुख शांति देते हैं. ऐसा व्यक्ति देवी प्रकोप से दूर होकर ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाता है. इस प्रकार वह लौकिक और पारलौकिक सुख की प्राप्ति कर लेता है.
  2. सत्संगति मन में न केवल धैर्य प्रदान करती है बल्कि मन में क्षमा की शक्ति का भी संचार होता है. क्षमा सभी प्रकार के दुर्गुणों को समाप्त कर संतोष और शांति प्रदान करती है.
  3. संगति का प्रभाव हमारे आचरण पर अवश्य पड़ता है. संगति आत्म शिक्षा का एक सुगम साधन है. दुर्जन व्यक्ति का साथ पथभ्रष्ट होने और कुमार पर जाने को प्रेरित करता है. दुर्जनो यानी दुष्ट व्यक्तियों का साथ अच्छे गुण वाले व्यक्ति को भी विनाश के पथ पर अग्रसर कर देता है. इसीलिए दुरजनों से दूर रहने की सलाह दी गई है.
  4. अपठित गद्यांश का शीर्षक – संगति का महत्व

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