अपठित गद्यांश – भाषा संगम – भारत के नए तीर्थ

Apathit Gadyansh with Answers in Hindi unseen passage 

जहाँ भी दो नदियाँ आकर मिल जाती है, उस स्थान को अपने देश में तीर्थ’ कहने का रिवाज है। और यह केवल रिवाज की ही बात नहीं है, हम सचमुच मानते हैं कि अलग-अलग नदियों में स्नान करने से जितना पुण्य होता है, उससे कहीं अधिक पुण्य संगम स्नान में है। किंतु, भारत आज जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें असली संगम वे स्थान, वे सभाएँ तथा वे मंच हैं, जिन पर एक से अधिक भाषाएँ एकत्र होती हैं।

नदियों की विशेषता यह है कि वे अपनी धाराओं में अनेक जनपदों का सौरभ, अनेक जनपदों के आँसू और उल्लास लिए चलती हैं और उनका पारस्परिक मिलन वास्तव में नाना के आँसू और उमंग, भाव और विचार, आशाएँ और शंकाएँ समाहित होती हैं। अतः जहाँ भाषाओं का मिलन होता है, यहाँ वास्तव में विभिन्न जनपदों के हृदय ही मिलते हैं, उनके भावों और विचारों का ही मिलन होता है तथा भिन्नताओं में छिपी हुई एकता वहाँ कुछ अधिक प्रत्यक्ष हो उठती है। इस दृष्टि से भाषाओं के संगम आज सबसे बड़े तीर्थ हैं और इन तीर्थों में जो भी भारतवासी श्रद्धा से स्नान करता है, वह भारतीय एकता का सबसे बड़ा सिपाही और संत है।

हमारी भाषाएँ जितनी ही तेजी से जगेंगी, हमारे विभिन्न प्रदेशों का पारस्परिक ज्ञान उतना ही बढ़ता जाएगा। भारतीय कि वे केवल अपनी ही भाषा में प्रसिद्ध होकर न रह जाएँ, बल्कि भारत की अन्य भाषाओं में भी उनके नाम पहुँचे और उनकी कृतियों की चर्चा हो। भाषाओं के जागरण का आरंभ होते ही एक प्रकार का अखिल भारतीय मंच आप-से-आप प्रकट होने लगा है। आज प्रत्येक भाषा के भीतर यह जानने की इच्छा उत्पन्न हो गई है कि भारत की अन्य भाषाओं में क्या हो रहा है, उनमें कौन-कौन ऐसे लेखक है. है तथा कौन सी विचारधारा वहाँ प्रभुसत्ता प्राप्त कर रही है।

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न-

(क) लेखक ने आधुनिक संगम-स्थल किसको माना है और क्यों?

(ख) भाषा संगमों में भारत की किन विशेषताओं का संगम होता है?

(ग) दो नदियों का मिलन किसका प्रतीक है?

(घ) अलग-अलग प्रदेशों में आपसी ज्ञान किस प्रकार बढ़ सकता है?

(ड) स्वराज प्राप्ति के उपरांत विभिन्न भाषाओं के लेखकों में क्या जिज्ञासा उत्पन्न हुई?

(च) लेखक ने सबसे बड़ा सिपाही और संत किसको कहा है और क्यों?

(छ) निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-

समानार्थी शब्द बताइए- सौरभ, आकांक्षा।

विपरीतार्थक शब्द बताइए – भिन्नता, प्रत्यक्ष।

(ज) उपर्युक्त गद्यांश का एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

उत्तर-

(क) लेखक ने आधुनिक संगम स्थल उन सभाओं व मंचों को माना है, जहाँ पर एक से अधिक भाषाएँ एकत्रितहोती है। ये भा पाएँ विभिन्न जनपदों में बसने वाली जानता की भावनाएँ लेकर आती हैं।

(ख) किसी भी भाषा के भीतर उस भाषा को बोलने वाली जनता के आँसू और उमंग, भाव और विचार, आशाएँ और शंकाएँ समाहित होती हैं। फलतः जहाँ भाषाओं का संगम होता है. वहाँ विभिन्न भाषा-भाषी लोगों के भावों और विचारों का संगम होता है।

(ग) नदियाँ अपनी धाराओं के साथ मार्ग में आने वाले जनपदों के हर्ष एवं विषाद की कहानी लेकर बहती हैं। अत: उनका मिलन विभिन्न जनपदों के मिलन का ही प्रतीक है।

(घ) भाषाएँ ही लाखों वर्षों तक ज्ञान-विज्ञान को सुरक्षित रखती हैं तथा ज्ञान का प्रचार-प्रसार करती हैं। अत. हम कह सकते हैं कि अलग-अलग प्रदेशों में आपसी ज्ञान तभी बढ़ सकता है, जब भारतीय भाषाएँ जागेंगी।

(ड) स्वराज-प्राप्ति के उपरांत विभिन्न भाषाओं के लेखकों में यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि भारत की अन्य भाषाओं में क्या हो रहा है। वे अन्य भाषाओं में भी अपनी प्रसिद्ध चाहने लगे तथा वे अन्य भाषाओं के कवियों एवं उनकी कृतियों के प्रति जिज्ञासु हो उठे।

(च) लेखक ने भाषाओं के संगम में गोता लगाने वाले श्रद्धालुओं को सबसे बड़ा सिपाही और संत कहा है। उसका मानना है किबभाषाओं का संगम, विभिन्न भाषा-भाषियों के भावों और विचारों का संगम होता है। वहीं विभिन्नता में छिपी एकता मूर्त रूप लेती है और दर्शन करने वाला कोई देशभक्त सिपाही हो सकता है या संत।

(छ)समानार्थी शब्द खुशबू, इच्छा।

विपरीतार्थक शब्द-अभिन्नता, परोक्ष।

(ज) शीर्षक- भाषा संगम – भारत के नए तीर्थ

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