अपठित गद्यांश – कर्म का महत्व

Apathit Gadyansh with Answers in Hindi unseen passage 

“आदर्श व्यक्ति कर्मशीलता में ही अपने जीवन की सफलता समझता है। जीवन का प्रत्येक क्षण वह कर्म में लगाता है। विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है। शेष समय जन सेवा में व्यतीत होता है। हाथ पर हाथ धरकर बैठने को वह मृत्यु के समान समझता है। काम करने की उसमें लगन होती है। उत्साह होता है। विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है। धैर्य की कुदाली से वह बड़े-बड़े संकट पर्वतों को ढहा देता है। उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग दाँतो तले ऊँगली दबाते हैं। संतोष उसका धन है। वह परिस्थतियो का दास नहीं। परिस्थितियाँ उसकी दासी हैं।”

उपर्युक्त अपठित गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ii) हाथ पर हाथ धरना और दाँतों तले ऊँगली दबाना मुहावरे का अर्थ लिखिए।
(iii) उपर्युक्त गद्यांश में वर्णित व्यक्ति के गुणों का वर्णन अपने शब्दों कीजिए।

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