बहुरि बदन-बिधु अंचल ढाँकी में कौनसा अलंकार है?

बहुरि बदन-बिधु अंचल ढाँकी में कौनसा अलंकार है?

बहुरि बदन-बिधु अंचल ढाँकी में कौनसा अलंकार है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।

बहुरि बदन-बिधु अंचल ढाँकी में रूपक अलंकार है। इस काव्य अंश में सीताजी ग्रामीणों को लक्ष्मन का परिचय देने के उपरांत लज्जावश अपने चंद्रमा रूपी देह को आँचल से ढँक कर अपने प्रियतम का परिचय देतीं हैं। चंद्रमा की खूबसूरती और सीताजी की सुंदरता में अंतर न होने के कारण यहाँ रुपक अलंकार है।

दूसरे शब्दों में कहें तो यह कहा जा सकता है कि जानकी और चंद्रमा में कोई भेद नहीं है। इसे ही उपमेय पर उपमान का आरोप कहतें है।

इस उदाहरण में जहां जहां पर उपमेय और उपमान आए हैं, वो हमने विद्यार्थियों की सहायता के लिए नीचे लिख दिये हैं:-

उपमेय-उपमान

वदन – विधु

जहां किन्हीं दो व्यक्ति या वस्तुओं में इतनी समानता हो कि दोनों में अंतर करना मुश्किल हो जाए वहां रूपक अलंकार होता है।

अथवा जहां उपमेय उपमान का रूप धारण कर ले वहां रूपक अलंकार होता है। रूपक अलंकार अर्थालंकार का एक प्रकार है।

बहुरि बदन-बिधु अंचल ढाँकी में रूपक अलंकार से संबन्धित प्रश्न परीक्षा में कई प्रकार से पूछे जाते हैं। जैसे कि – यहाँ पर कौन सा अलंकार है? दी गई पंक्तियों में कौन सा अलंकार है? दिया गया पद्यान्श कौन से अलंकार का उदाहरण है? पद्यांश की पंक्ति में कौन-कौन सा अलंकार है, आदि।

बहुरि बदन-बिधु अंचल ढाँकी पंक्तियों में रूपक अलंकार के अलावा और कौन सा अलंकार उपस्थित है?

ब वर्ण की आवृति के कारण अनुप्रास अलंकार भी है।

Important Alankar in Hindi अलंकार के उदाहरण एवं हिन्दी अलंकार पर प्रश्न जो परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।

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