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Bayen hath ki sund vale Ganesh shubh kyon mane jate hain?

शिव जी ने गणेश जी को प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया है। इसी वजह से कोई मांगलिक कर्म, पूजना आदि में सबसे पहले गणेश जी की आराधना ही की जाती है। गजानन को प्रथम पूज्य का पद प्राप्त है। इनकी अराधना से घर की सभी समस्याएं स्वतः ही खत्म हो जाती है और सुख समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है। गणेश जी परमात्मा के विघ्न विनाशक स्वरूप हैं। कहा जाता है विघ्नहर्ता की मूर्ति या चित्र में हमारे बाएं हाथ की ओर से सूंड घूमी हुई हो इस बात का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन ये बात बहुत कम लोग जानते है कि घर में पंड़ितों वास्तुविदों द्वारा बाएं हाथ की तरफ घूमी हुई सूंड वाले गणेश रखने को ही क्यों कहा जाता है?
दरअसल, वास्तु व अन्य शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि दाएं हाथ की ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेश जी हठी होते हैं और उनकी साधना आराधना कठिन होती है। वे देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं, क्योंकि दाएं हाथ की सूंड वाले गणेश जी को तंत्र विधि से पूजना या मनाना होता है। इनके पूजन की विधि बहुत कठिन होती है। इसलिए दक्षिण दिशा की ओर सूंड वाले गणेश जी की बजाए बाएं हाथ की ओर सूंड वाले गणेश जी के पूजन करने के लिए कहा जाता है। वे पारम्परिक पूजा विधि से ही ही सहज में प्रसन्न हो जाते हैं।

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