भगवान को पीठ क्यों नहीं दिखाना चाहिए?

Bhagvan ki aur peeth kyon nahi karni chahiye?

शास्त्रों के अनुसार गणेश जी को बुद्धि के दाता व विष्णु भगवान को लक्ष्मीपति माना गया है। ये दोनों ही सभी सुखों को देने वाले माने गए हैं। अपने भक्तों के सभी दुखों को दूर करते हैं और उनकी शत्रुओं से रक्षा करते हैं। इनके नित्य दर्शन से हमारा मन शांत रहता है और सभी कार्य सफल होते हैं। गणेश जी को रिद्धि सिद्धि का दाता माना गया है। इनकी पीठ के दर्शन करना वर्जित किया गया है। गणेश जी के शरीर पर जीवन और ब्रहमण्ड से जुड़े अंग निवास करते हैं।
गणेश जी सूंड पर धर्म विद्यमान है तो कानों पर ऋचाएं, दाएं हाथ में वर, बाएं हाथ में अन्न, पेट में समृद्धि, नाभी में ब्रहामण्ड, आँखों में लक्ष्य, पैरों में सातों लोक और मस्तक में ब्रहमलोक विद्यमान हैं। गणेश जी के सामने से दर्शन करने पर उपरोक्त सभी सुख- शांति और समृद्धि प्राप्त हो जाती है। ऐसा माना जाता है, इनकी पीठ पर दरिद्रता का निवास होता है। गणेश जी की पीठ के दर्शन करने वाला व्यक्ति यदि बहुत धनवान भी हो तो उसके घर पर दरिद्रता का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी वजह से इनकी पीठ नहीं देखना चाहिए। जाने अनजाने पीठ देख लें तो श्री गणेश से क्षमा याचना कर उनका पूजन करें। तब बुरा प्रभाव नष्ट होगा। वहीं भगवान विष्णु की पीठ पर भी अधर्म का वास माना जाता है।
शास्त्रों में लिखा है जो व्यक्ति इनकी पीठ के दर्शन करता है, उसके पुण्य खत्म होते जाते हैं और पाप बढ़ता जाता है। इन्हीं कारणों से श्री गणेश और विष्णु की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए। साथ ही यह भी मान्यता है कि इनके मंदिर में दर्शन करने जाएं तो दर्शन करते समय ये सावधानी रखें कि इन्हें पीठ दिखाकर बाहर ना आएँ। इससे भी बुद्धि और धन दोनों का नाश होता है।