8 नवम्बर 1927 भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का जन्म हुआ.पाकिस्तान के कराची में लालकृष्ण आडवाणी का जन्म हुआ था।उनके पिता श्री के डी आडवाणी और माँ ज्ञानी आडवाणी थीं।लालकृष्ण आडवाणी की शुरुआती शिक्षा लाहौर में ही हुई.विभाजन के बाद भारत वे आ गए,भारत आकर उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक किया। आडवाणी ने 25 फ़रवरी 1965 को ‘कमला आडवाणी’ को अपनी अर्धांगिनी बनाया। आडवाणी के दो बच्चे हैं।

भारतीय जनता पार्टी के आजतक के इतिहास का अहम अध्याय हैं लालकृष्ण आडवाणी. भारतीय जनता पार्टी  को खड़ा करने और उसे राष्ट्रीय स्तर तक लाने का श्रेय लालकृष्ण आडवाणी जाता है लालकृष्ण आडवाणी अलग अलग नामो से जाने गए कभी कभी पार्टी के कर्णधार कहे गए, कभी लौह पुरुष तो  कभी पार्टी का असली चेहरा.

भारतीय जनता पार्टी को राजनीति  प्रमुख पार्टी बनाने में उनका  बहुत बड़ा योगदान हैं ।  कई बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं।जनवरी 2008 मे पार्टी ने उनके नेतृत्व मे  राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एन डी ए) ने लोकसभा चुनावों को लड़ने तथा जीत होने पर उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा की थी.

लालकृष्ण आडवाणी कभी पार्टी के कर्णधार कहे गए, कभी लौह पुरुष और कभी पार्टी का असली चेहरा। कुल मिलाकर पार्टी के आजतक के इतिहास का अहम अध्याय हैं लालकृष्ण आडवाणी.

लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति में एक बड़ा नाम हैं। गांधी के बाद वो दूसरे जननायक के रूप मे भी जाना जाता हैं  इन्हे  जिन्होंने हिन्दू आंदोलन का नेतृत्व किया और पहली बार बीजेपी की सरकार बनावाई.

लेकिन पिछले कुछ समय से जिस आक्रामकता के लिए वो जाने जाते थे,उस छवि के ठीक विपरीत आज वो समझौतावादी नज़र आते हैं.

आज भी लोग उस अडवाणी को देखना चाहते हैं जो हिन्दुओं में नई चेतना का सूत्रपात करने वाले होते थे.आडवाणी में लोग नब्बे के दशक का आडवाणी ढूंढ रहे हैं।अपनी बयानबाज़ी की वजह से उनकी काफी फज़ीहत हुई। अपनी किताब और ब्लॉग से भी वो काफी चर्चा में आए,आलोचना भी हुई.

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने वर्ष 1951 में जनसंघ की स्थापना की। तब से लेकर सन 1957 तक आडवाणी पार्टी के सचिव रहे। वर्ष 1973 से 1977 तक आडवाणी ने भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष का दायित्व संभाला। वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद से 1986 तक लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के महासचिव रहे। इसके बाद 1986 से 1991 तक पार्टी के अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व भी उन्होंने संभाला.

1990 की रथयात्रा ने लालकृष्ण आडवाणी की लोकप्रियता को चरम पर पहुँचा दिया था।1990 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली। इससे काफी चर्चाओं मे रहे अडवाणी, हालांकि आडवाणी को बीच में ही गिरफ़्तार कर लिया गया था .पर इस यात्रा के बाद आडवाणी का राजनीतिक कद और बड़ा हो गया.

वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जिन लोगों को अभियुक्त बनाया गया है उनमें आडवाणी का नाम भी शामिल है।लालकृष्ण आडवाणी तीन बार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। आडवाणी चार बार राज्यसभा के और पांच बार लोकसभा के सदस्य रहे। वर्तमान में भी वो गुजरात के गांधीनगर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के सांसद हैं.

वर्ष 1977 से 1979 तक पहली बार केंद्रीय सरकार में कैबिनेट मंत्री की हैसियत से लालकृष्ण आडवाणी ने दायित्व संभाला। आडवाणी इस दौरान सूचना प्रसारण मंत्री  का पद भर भी संभाला.

आडवाणी ने  जो सर्वोच्च पद संभाला है वह है एनडीए शासनकाल के दौरान उपप्रधानमंत्री का। लालकृष्ण आडवाणी वर्ष 1999 में एनडीए की सरकार बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेत़ृत्व में केंद्रीय गृहमंत्री बने और फिर इसी सरकार में उन्हें 29 जून 2002 को उपप्रधानमंत्री पद का दायित्व भी सौंपा गया.

भारतीय संसद में एक अच्छे सांसद के रूप में आडवाणी अपनी भूमिका के लिए कभी सराहे गए तो कभी पुरस्कृत भी किए गए।आडवाणी किताबों, संगीत और सिनेमा में ख़ासी रुचि रखते हैं।अडवाणी का व्यक्तित्व बहुत ही अच्छा रहा ,ये विडंबना ही रही के वो देश के प्रधान मंत्री नहीं बन पाए.