गौ-हत्या के शक में सात मुसलमानों के साथ बिहार में हुई मारपीट, हमलावरों की जगह पिटने वालों की हुई गिरफ्तारी

पटना: बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले से तथाकथित गौ-रक्षकों द्वारा सात मुस्लिम व्यक्तियों पर गे का मांस कहानी के शक में हमला कर बुरी तरह पिटाई करने की खबर आई है.

यही नहीं खबर है कि इस घटना में मारपीट करने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई बल्कि जिनकी पिटाई हुई है उन्हीं सात मुस्लिम गांव वालों की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी कर ली गई है.

पटना: बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले से तथाकथित गौ-रक्षकों द्वारा सात मुस्लिम व्यक्तियों पर गे का मांस कहानी के शक में हमला कर बुरी तरह पिटाई करने की खबर आई है. यही नहीं खबर है कि इस घटना में मारपीट करने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई बल्कि जिनकी पिटाई हुई है उन्हीं सात मुस्लिम गांव वालों की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी कर ली गई है. प्राप्त ख़बरों के अनुसार गौ-रक्षकों की भीड़ ने मुहम्मद सहाबुद्दीन और कुदूस कुरैशी के घर में घुस कर मर पीट की. भीड़ का कहना था कि उन्होंने बीती रात एक गे का बछड़ा चुराया और मांस के लिए उसकी हत्या कर दी. दोनों के अलावा पांच अन्य पड़ोसियों की पिटाई के बाद उन्हें घर में बंद कर दिया गया. पुलिस के आने पर पथराव भी किया गया. पुलिस ने सातों मुसलिम गांव वालों को गिरफ्तार कर उन पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है. पुलिस अफसर संजय कुमार झा के अनुसार हमला करने वालों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं होने के कारण कोई कार्यवाही नहीं की गयी है. झा के अनुसार "पुलिस की प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रित करना था. आसपास के गांवों से भी भरी संख्या में भीड़ इकठ्ठा होने की वजह से अप्रिय घटना घटित होने की आशंका बनी हुई थी".प्राप्त ख़बरों के अनुसार गौ-रक्षकों की भीड़ ने मुहम्मद सहाबुद्दीन और कुदूस कुरैशी के घर में घुस कर मार-पीट की. भीड़ का कहना था कि उन्होंने बीती रात एक गाय का बछड़ा चुराया और मांस के लिए उसकी हत्या कर दी. दोनों के अलावा पांच अन्य पड़ोसियों की पिटाई के बाद उन्हें घर में बंद कर दिया गया. पुलिस के आने पर पथराव भी किया गया.

पुलिस ने सातों मुसलिम गांव वालों को गिरफ्तार कर उन पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है.

पुलिस अफसर संजय कुमार झा के अनुसार हमला करने वालों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं होने के कारण कोई कार्यवाही नहीं की गयी है. झा के अनुसार “पुलिस की प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रित करना था. आसपास के गांवों से भी भारी संख्या में भीड़ इकठ्ठा होने की वजह से अप्रिय घटना घटित होने की आशंका बनी हुई थी”.

अभी हाल ही में प्रधान मंत्री ने गौ-रक्षा के नाम पर मारपीट को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किये जाने का बयान देकर तथाकथित गौरक्षकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए थे. लेकिन लगता है इसका कोई प्रभाव ऐसे स्वयंभू गौरक्षकों पर नहीं पड़ा है.