लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के नतीजे चौकाने वाले आये हैं और इन नतीजों ने निश्चित ही अमित शाह और नरेंद्र मोदी की नींद हराम कर दी होगी। दरअसल उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधान सभा चुनावों में जीत के सपने देख रही भाजपा का उत्तर प्रदेश एमएलसी चुनावों में सूपड़ा साफ़ हो गया है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र की 28 सीटों के चुनाव में रविवार (6 मार्च) सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए 23 सीटों पर कब्जा कर लिया और आठ सीटों पर पहले ही निर्विरोध विजय प्राप्त कर चुकी इस पार्टी को अब उच्च सदन में भी बहुमत हासिल हो गया। इन चुनाव नतीजों से विपक्षी दलों को करारा झटका लगा है। मुख्य विपक्षी दल बसपा को जहां मात्र दो सीटें मिलीं वहीं, भाजपा खाता भी नहीं खोल सकी।

BJP huge defeat in UP mlc electionsस्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र की 36 सीटों में से सपा के आठ प्रत्याशी गत 18 फरवरी को ही निर्विरोध घोषित किये गये थे। बाकी बची 28 सीटों के लिये गत तीन मार्च को हुए चुनाव के घोषित परिणामों के अनुसार सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र आजमगढ़ में पार्टी प्रत्याशी राकेश यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के राजेश सिंह को पराजित किया। वहीं, बदायूं में सपा उम्मीदवार बनवारी सिंह यादव ने भाजपा के जितेन्द्र यादव को हराया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में निर्दलीय प्रत्याशी माफिया डॉन बृजेश सिंह ने सपा प्रत्याशी मीना सिंह को पराजित किया। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली में पार्टी प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह ने जीत हासिल की।

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बसपा को जौनपुर और सहारनपुर सीटों पर कामयाबी हासिल हुई। जौनपुर में उसके प्रत्याशी बृजेश सिंह उर्फ प्रिंसू और मुजफ्फरनगर-सहारनपुर सीट पर महमूद अली ने चुनाव जीता।

इसके साथ ही सत्तारूढ़ सपा को 100 सदस्यीय विधान परिषद में भी बहुमत हासिल हो गया है। इस चुनाव से पहले सदन में सपा के 27 सदस्य थे। सपा के आठ प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध घोषित हुए थे। अब सपा ने चुनाव में 23 सीटें और जीत ली हैं। इस तरह उच्च सदन में उसके सदस्यों की संख्या 58 हो गयी है।

कभी विधान परिषद में बहुमत रखने वाली बसपा इस चुनाव में दो सीटें हासिल कर सकी। अब उच्च सदन में उसके सिर्फ 16 सदस्य ही रह गये हैं। भाजपा का एक भी प्रत्याशी विधान परिषद चुनाव में कामयाब नहीं हो सका। उच्च सदन में अब उसे पास सात सदस्य हैं।

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