Samvad Lekhan बस कंडक्टर और यात्री के बीच संवाद – संवाद लेखन

Bus conductor aur yatri ke beech samvad- Samvad Lekhan

यात्री : भैया यह बस कहाँ तक जायेगी ?

बस कंडक्टर : आपने कहाँ तक जाना है भैया ?

यात्री : भैया मुझे घंटा घर जाना है ।

बस कंडक्टर : हाँ जी, जाएगी घंटा घर ।

यात्री : भैया, कितना समय लग जाएगा घंटा घर पहुँचने में ?

बस कंडक्टर : घंटा घर पहुँचने में पन्द्रह-बीस लग जायेंगे उसके बात पन्द्रह-बीस मिनट का रास्ता है । लेकिन, भाई पहले बस यहाँ से भरेगी उसके बाद चलेगी और बस भरने में करीब दस-पंद्रह मिनट तो लग ही जायेंगे ।

यात्री : ठीक हैं भैया एक टिकट काट देना घंटा घर तक का।

बस कंडक्टर : अरे भाई, खुले पैसे दो कहाँ सुबह-सुबह यह सौ रूपये का नोट पकड़ा रहे हो ।

यात्री : भाई खुले पैसे तो नहीं हैं ।

बस कंडक्टर : कोई नहीं, अभी बस चलने में कुछ समय बाकी है । आप इतने पैसे खुलवा लाइए किसी दुकान से ।

यात्री : भैया कहीं खुले पैसे नहीं मिले । आप ही देख लीजिये ना ।

बस कंडक्टर : अब इस समय सुबह-सुबह मैं भी कहाँ से लाऊँ भैया खुले पैसे ?

यात्री : आप ऐसा करें सबके टिकट काट लें । उसके बाद आखरी में मेरा टिकट काट देना । तब तक आप के पास भी खुले पैसे इकट्ठे हो जायेंगे

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