चाणक्य के 5 सफलता सूत्र जो आपको अपने कार्य स्थल पर सफल बना सकते हैं लेकिन एम बी ए में नहीं पढ़ाये जाते

चाणक्य को भारत ही नहीं, समस्त संसार में नीति-शास्त्र के सबसे बड़े विद्वान के रूप में जाना जाता है।  यहाँ पर हम आपके लिए उनके ऐसे 5 सफलता सूत्रों को लेकर आये हैं जिन्हें अपना कर आप अपने कार्यक्षेत्र में सफल हो सकते हैं।

#1 किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार नहीं होना चाहिए।  सीधे पेड़ और ईमानदार व्यक्तियों पर सबसे पहले प्रहार होता है।

ऑफिस में कभी बहुत ज्यादा ईमानदार या मुंहफट होने की कोशिश न करें. जहां आपको कोई बात गलत लग रही हो वहां या तो चुप रहें या फिर हलके से अपनी बात एक सलाह के तौर पर कह कर देखें।  यदि ऐसा लगता है कि आप की कही बात की बड़ी तीखी प्रतिक्रिया हो रही है तो आगे चर्चा से बचें।  अपने विचार जब रखें तो सामने वाले को गलत ठहराने के लिए न रखें भले ही आप सही हों तो भी।  विशेषकर अपने बॉस की आलोचना से बचें।  ऑफिस में अपने आइडियाज को लागू करने का बेहतर समय तब है जब आप खुद ऑफिस के चार्ज में हो।  जब तक आप जूनियर है तब तक अपनी बात डिप्लोमेटिक तरीके से ही कहें।

#2 किसी भी नए कार्य को शुरू करने से पहले खुद से तीन सवाल जरूर पूछें : मैं यह काम क्यों कर रहा हूँ, इसका परिणाम क्या होगा और क्या मैं इसमें सफल हो पाउँगा? जब गहन सोच-विचार के बाद आपको इन तीनों प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर मिले, तभी किसी नए काम की शुरुआत करें।

अकसर हम बिना ज्यादा सोचे-समझे अपने ऑफिस में ऐसे नए कामों में उलझ जाते हैं जिनमें वैसी सफलता नहीं मिलती जैसी आपने सोचा था।  यह तभी होता है जब आपने भली-भाँति प्लानिंग नहीं की हो।  ऐसा बार-बार होने पर आपकी इमेज आपके बॉस और सहकर्मियों में ऐसे एम्प्लोयी की बन जाती है जो किसी प्रोजेक्ट को हाथ में लेकर सफलता पूर्वक हैंडल नहीं कर सकता।  नतीजा यह कि  धीरे-धीरे आपको कम महत्त्व वाले काम दिए जाते हैं और इस तरह आपकी कंपनी या ऑफिस में आपकी तरक्की के द्वार बंद होते चले जाते हैं।

#3 जब आप किसी काम को शुरू कर दें तो बीच में आने वाली बाधाओं से घबराएं नहीं।  किसी भी काम को बीच में ही न छोड़ें।

ऐसा कभी नहीं होता कि हमारे हाथ में जो प्रोजेक्ट या असाइनमेंट है वो ठीक वैसे ही आसानी से नियत समय पर पूरा हो जाये जैसा आपने सोचा था।  यह तब भी संभव है जब आपने वह काम अच्छी तरह सोच-विचार कर प्लानिंग के साथ आरम्भ किया हो।  याद रखें, किसी काम को पूरा करने के बाद थक-हार कर जो चैन की नींद आती है और सफल होने का जो एहसास, जो आनंद और जो आत्म-संतुष्टि मिलती है, उसके सामने इन बाधाओं को पार करते समय होने वाली तकलीफ का कोई मायने नहीं है।  साथ ही जब आप ऐसे काम सफलतापूर्वक संपन्न कर लेते हैं जिन्हें दूसरे एम्प्लॉयीज हाथ लगाने से भी बचते हों तो आपके वरिष्ठ अधिकारी हमेशा आपको ही जिम्मेदारी भरे काम देंगें और जल्दी ही आपकी कंपनी में आपका सितारा बुलंद होने लगेगा।

#4 सफलता मिलने तक अपने काम के बारे में लोगों को न बताएं।  उसे गुप्त रखने में ही आपकी कामयाबी का राज छुपा है।

ध्यान रखिये, आप एक ऑफिस में काम करते हैं, कोई कॉलेज की दोस्ती नहीं निभा रहे जहां आप अपनी हर बात अपने दोस्तों में शेयर करें।  अपने ऑफिसियल काम और अपनी पर्सनल लाइफ के बारें में अपने सहकर्मियों को जितनी जरूरी हो उतनी ही जानकारी दें।  अगर आप अपनी हर बात खुले मन से अपने कलीग्स को बता देते हैं तो आप पीठ में छुरा घोपें जाने के लिए तैयार रहिये।  या तो कोई सहकर्मी आपके  श्रेय खुद ले लेगा, या आपकी किसी पर्सनल कमजोरी का फायदा उठा कर आपको नुक्सान अवश्य पहुंचाएगा।  इसलिए अपनी ऑफिसियल लाइफ और पर्सनल लाइफ में संतुलन बनाएं और अपने गुप्त भेद किसी को न बताएं।  साथ ही ऐसे प्रोजेक्ट्स जिन पर आपके कैरियर की सफलता या सफलता निर्भर करती है, उन्हें अपने सहकर्मियों से यथासंभव गुप्त ही रखें।

#5 हर सम्बन्ध के पीछे कोई न कोई स्वार्थ छुपा होता है।  यह एक कड़वी सच्चाई है।

यह केवल ऑफिस में ही नहीं बल्कि हमारी व्यक्तिगत ज़िन्दगी पर भी लागू होता है।  चाहे हमारे सहकर्मी हों, मित्र हों या रिश्ते नाते, सभी  की बुनियाद किसी न किसी स्वार्थ पर टिकी होती है यानि हर सम्बन्ध में यही मानसिकता काम करती है कि अमुक व्यक्ति हमारे किसी काम आ सकता है या नहीं या कि किसी व्यक्ति से सम्बन्ध रखने से हमारे कौन से काम निकल सकते हैं।  इसलिए अपने मित्रों का चयन ध्यान पूर्वक कीजिये ताकि समय पड़ने पर वे आपके  भी काम आ सकें न कि ऐसा हो कि सिर्फ आपके सहयोगी मित्र आपसे अपना काम ही निकालते रहें।

महान कूटनीतिक चाणक्य के ये गुरु मन्त्र आपको अपने कार्य स्थल पर सफल होने में जितनी मदद करेंगे इतना आपको किसी एम बी ए में नहीं पढ़ाया जाता।