अपने कार्य को करना चाहते हैं सफलतापूर्वक पूरा तो मत भूलिए चाणक्य के इन मन्त्रों को !

प्रभूतं कार्यमपि वा तत्परः प्रकर्तुमिच्छति। सर्वारम्भेण तत्कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते॥
chanakya neeti जो भी काम करना चाहें, उसे अपनी पूरी शक्ति लगाकर करेंछोटा हो या बड़ा, जो भी काम करना चाहें, उसे अपनी पूरी शक्ति लगाकर करें, यह गुण हमें शेर से सीखना चाहिए

इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत्पण्डितो नरः। देशकालः बलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत्॥
chanakya neeti बगुले के समान इंद्रियों वश देश, काल एवं बल जानकर कार्य सफल करें ।बगुले के समान इंद्रियों को वश में करके देश, काल एवं बल को जानकर अपना कार्य सफल करें ।

कश्चित् कस्यचिन्मित्रं, न कश्चित् कस्यचित् रिपु:। अर्थतस्तु निबध्यन्ते, मित्राणि रिपवस्तथा ॥
चाणक्य नीति न कोई किसी का मित्र है और न ही शत्रु, कार्यवश ही लोग मित्र और शत्रु बनते हैंन कोई किसी का मित्र है और न ही शत्रु, कार्यवश ही लोग मित्र और शत्रु बनते हैं ।

जानीयात्प्रेषणेभृत्यान् बान्धवान्व्यसनाऽऽगमे। मित्रं याऽऽपत्तिकालेषु भार्यां च विभवक्षये ॥
धन नष्ट हो जाने पर पत्नी की परीक्षा होती है ।किसी महत्वपूर्ण कार्य पर भेज़ते समय सेवक की पहचान होती है । दुःख के समय में बन्धु-बान्धवों की, विपत्ति के समय मित्र की तथा धन नष्ट हो जाने पर पत्नी की परीक्षा होती है ।

Chanakya quotes on work in Hindi

आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रुसण्कटे। राजद्वारे श्मशाने च यात्तिष्ठति स बान्धवः ॥
chanakya neeti मृत्यु पर श्मशान भूमि में ले जाने वाला व्यक्ति सच्चा मित्रबीमार होने पर, असमय शत्रु से घिर जाने पर, राजकार्य में सहायक रूप में तथा मृत्यु पर श्मशान भूमि में ले जाने वाला व्यक्ति सच्चा मित्र और बन्धु है ।

Chanakya Neeti – Karya par Chanakya ke Anmol vichar

परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्। वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् ॥
chanakya neeti पीठ पीछे काम बिगाड़ने वाले तथा सामने प्रिय बोलने वाले मित्र को त्याग देना चाहिए ।पीठ पीछे काम बिगाड़ने वाले तथा सामने प्रिय बोलने वाले मित्र को मुंह पर दूध रखे हुए विष के घड़े के समान त्याग देना चाहिए ।

मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत्। मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्य चापि नियोजयेत् ॥
chanakya neeti मन में सोचे हुए कार्य को मुंह से बाहर नहीं निकालना गुप्त रखकर ही उस काम को करना भी चाहिए ।मन में सोचे हुए कार्य को मुंह से बाहर नहीं निकालना चाहिए । मन्त्र के समान गुप्त रखकर उसकी रक्षा करनी चाहिए । गुप्त रखकर ही उस काम को करना भी चाहिए ।

तादृशी जायते बुद्धिर्व्यवसायोऽपि तादृशः। सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता॥
chanakya neeti मनुष्य जैसा भाग्य लेकर आता है उसकी बुद्धि भी उसी समान बन जाती हैमनुष्य जैसा भाग्य लेकर आता है उसकी बुद्धि भी उसी समान बन जाती है, कार्य – व्यापार भी उसी अनुरूप मिलता है । उसके सहयोगी, संगी – साथी भी उसके भाग्य के अनुरूप ही होते हैं । सारा क्रिया-कलाप भाग्यनुसार ही संचालित होता है ।

सुश्रान्तोऽपि वहेद् भारं शीतोष्णं न पश्यति। सन्तुष्टश्चरतो नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभात्॥
chanakya neeti गधे से तीन गुण सीखेंव्यक्ति को चाहिए की वे गधे से तीन गुण सीखें| जिस प्रकार अत्यधिक थका होने पर भी वह बोझ ढोता रहता है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति को भी आलस्य न करके अपने लक्ष्य की प्राप्ति और सिद्धि के लिए सदैव प्रयत्न करते रहना चाहिए । कार्य सिद्धि में ऋतुओं के सर्द और गर्म होने का भी चिंता नहीं करना चाहिए और जिस प्रकार गधा संतुष्ट होकर जहां – तहां चर लेता है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति को भी सदा सन्तोष रखकर कर्म में प्रवृत रहना चाहिए ।