राजा को हमेशा किसको अपने साथ रखना चाहिए? आचार्य चाणक्य ने दी है गूढ़ सलाह

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 धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पञ्चमः। पञ्च यत्र न विद्यन्ते न तत्र दिवसे वसेत ॥

जहां कोई सेठ, वेदपाठी विद्वान, राजा और वैद्य न हो, जहां कोई नदी न हो, इन पांच स्थानों पर एक दिन भी नहीं रहना चाहिए ।

chanakya neeti इन पांच स्थानों पर एक दिन भी नहीं रहना चाहिए

बलं विद्या च विप्राणां राज्ञः सैन्यं बलं तथा। बलं वित्तं च वैश्यानां शूद्राणां च कनिष्ठता ॥

विद्या ही ब्राह्मणों का बल है । राजा का बल सेना है । वैश्यों का बल धन है तथा सेवा करना शूद्रों का बल है ।

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chanakya neeti विद्या ही ब्राह्मणों का बल है । राजा का बल सेना है

समाने शोभते प्रीती राज्ञि सेवा च शोभते। वाणिज्यं व्यवहारेषु स्त्री दिव्या शोभते गृहे ॥

समान स्तर वालों से ही मित्रता शोभा देती है । सेवा राजा की शोभा देती है । वैश्यों को व्यापार करना ही शोभा देता है । शुभ स्त्री घर की शोभा है

chanakya neeti समान स्तर वालों से ही मित्रता शोभा । सेवा राजा की शोभा

एतदर्थ कुलीनानां नृपाः कुर्वन्ति संग्रहम्। आदिमध्यावसानेषु न त्यजन्ति च ते नृपम् ॥

कुलीन लोग आरम्भ से अन्त तक साथ नहीं छोड़ते । वे वास्तव में संगति का धर्म निभाते हैं । इसलिए राजा कुलीन शुभचिंतकों को अपने साथ रखते हैं ताकि समय-समय पर सत्परामर्श मिल सके ।

chanakya neeti राजा कुलीन शुभचिंतकों को अपने साथ रखते हैं

वित्तेन रक्ष्यते धर्मो विद्या योगेन रक्ष्यते। मृदुना रक्ष्यते भूपः सत्स्त्रिया रक्ष्यते गृहम्॥

धन से धर्म की, योग से विद्या की, मृदुता से राजा की तथा अच्छी स्त्री से घर की रक्षा होती है ।

chanakya neeti मृदुता से राजा की रक्षा होती है ।


राजा राष्ट्रकृतं पापं राज्ञः पापं पुरोहितः। भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्य पाप गुरुस्तथा॥

राष्ट द्वारा किये गए पाप को राजा भोगता है । राजा के पाप को उसका पुरोहित, पत्नी के पाप को पति तथा शिष्य के पाप को गुरु भोगता है ।

chanakya neeti शिष्य के पाप को गुरु भोगता है ।


कुराजराज्येन कृतः प्रजासुखं कुमित्रमित्रेण कुतोऽभिनिवृत्तिः। कुदारदारैश्च कुतो गृहे रतिः कृशिष्यमध्यापयतः कुतो यशः॥

दुष्ट राजा के राज्य में प्रजा सुखी कैसे रह सकती है ! दुष्ट मित्र से आनंद कैसे मिल सकता है ! दुष्ट पत्नी से घर में सुख कैसे हो सकता है ! तथा दुष्ट – मूर्ख शिष्य को पढ़ाने से यश कैसे मिल सकता है !

Chanakya neeti - दुष्ट राजा के राज्य में प्रजा सुखी कैसे रह सकती है


अहिं नृपं च शार्दूलं वराटं बालकं तथा। परश्वानं च मूर्खं च सप्तसुप्तान् बोधयेत्॥

सांप, राजा, शेर, बर्र, बच्चा, दूसरे का कुत्ता तथा मूर्ख इनको सोए से नहीं जगाना चाहिए ।

chanakya neeti इन 7 को सोए से नहीं जगाना चाहिए


रङ्कं करोति राजानं राजानं रङ्कमेव च। धनिनं निर्धनं चैव निर्धनं धनिनं विधिः॥

भाग्य रंक को राजा और राजा को रंक बना देता है । धनी को निर्धन तथा निर्धन को धनी बना देता है ।

Chanakya neeti - भाग्य धनी को निर्धन तथा निर्धन को धनी बना देता है

 

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