भारत की राजनीती में आए दिन एक नया मोड़ देखने को मिलता है. कभी सांसद और विधायक पार्टी से बगावत कर सरकार गिरा देते हैं तो कभी विरोधी पार्टी से मिल कर नए सरकार का गठन कर लेते है. कुछ ऐसा ही मंजर पिछले साल अरुणाचल प्रदेश में देखने को मिला था जब कांग्रेस के विधायक कलिखो पुल ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था और प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थें.

लेकिन अचानक एक दिन ये खबर आई कि पुल ने आत्महत्या कर लिया. उन्होंने आत्महत्या क्यों किया था इस बात का खुलासा उस वक़्त नहीं किया गया था. लेकिन अब उनके सुसाइड नोट को सार्वजनिक कर दिया गया है. अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के सुसाइड नोट को कैंपेन फॉर ज्‍यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्‍स(सीजेएआर) ने सार्वजनिक किया है. नोट में कई बड़े खुलासे किये गए हैं. इस नोट में गुवाहाटी हाईकोर्ट के वर्तमान और पूर्व जजों को घूस देने के दावे किये गए हैं.

द क्विंंट की खबर के अनुसार इस नोट में न्‍यायपालिका से जुड़े चार बड़े लोगों को रिश्‍वत दिए जाने का ज़िक्र किया गया है. पुल ने नोट में जज का नाम लेते हुए लिखा है कि, जज ने 36 करोड़ रुपये घूस लेकर गलत फैसला सुनाया था. जिसका समझौता उन्होंने अपने बेटे के जरिये किया था. आगे पुल ने मंत्री के नाम का खुलासा करते हुए लिखा है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ की गई सुनवाई में किसी अन्य को दोषी ठहराते हुए सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे. लेकिन उसी केस में किसी अन्य ने 28 करोड़ रुपये की घूस देकर स्टे लिया और आज स्वतंत्र घूम रहा है.

नोट में जजों के साथ-साथ कई पार्टियों और वरिष्ठ राजनेताओं के नाम भी लिखे हैं जिन्हें पुल ने रिश्वत दिए थें. हिंदी में लिखा गया ये सुसाइट नोट कुल 60 पन्नो का है.

पुल से सरकार को नसीयत देते हुए आगे लिखा है कि, ”सरकार को जज के फैसले पर भी निगरानी रखनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए कोई कानून बनाना चाहिए ताकि इस कानून की मदद से न्‍यायालय में भ्रष्‍टाचार को रोका जा सके. अरुणाचल राज्‍य में हुए पीडीएस घोटाले के केस को राज्‍य सरकार ने गलत बताया, एफसीआई ने गलत बताया और केंद्र सरकार ने भी गलत बताया फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने आरो‍पियों को खुला छोड़कर उनका पूरा पेमेंट करने का आदेश दिया. जिससे राज्‍य का विकास कोष खाली हो गया.”

आपको बता दें कि कलिखो पुल कांग्रेस पार्टी के विधायक थें लेकिन 2016 में वे भाजपा के साथ चले गये और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थें. हालाँकि इसके तुरंत बाद ही केंद्र सरकार द्वारा वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने गलत ठहराते हुए राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया था. कोर्ट के इस फैसले के बाद पुल को इस्तीफा देना पड़ा था. अपने इस्तीफे के कुछ दिन बाद ही पुल ने आत्महत्या कर ली थी.

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Mritunjay
राष्ट्रीय राजनीति में विशेष रुझान रखते हैं. कभी कभार अन्य मुद्दों पर भी अपनी राय बेबाक तरीके से रखते हैं ! विशेष जानने के लिए इनसे फेसबुक के माध्यम से जुड़ सकते हैं! हिन्दीवार्ता पर इनके रोचक लेखों को पढ़िए और दिल खोल कर शेयर कीजिये.