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Samvad Lekhan चोरी की बढ़ती घटनाओं पर दो पड़ोसियों के मध्य हुए संवाद- संवाद लेखन

Chori ki bardti ghatnaon par do padosioan ke madhya hue samvad – Samvad Lekhan

अशोक : उमेश आजकल रोज ही शहर में चोरी की घटनाएँ सुनने में आ रही हैं।

उमेश : हाँ अशोक, चोरों को तो किसी बात का भी डर नहीं रह गया है उनके लिए तो अब दिन और रात एक बराबर हैं।

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अशोक : कल ही दिन-दहाड़े राज विहार में एक घर में चोर घुस गए और घर वालों को बंधक बना कर घर से नकद और गहने चोरी कर के ले गए। शुक्र है भगवान का कि किसी की जान को कोई खतरा नहीं हुआ।

उमेश : जान को खतरा नहीं हुआ लेकिन इंसान मेहनत करके क्या इसीलिए पैसा जमा करता है कि चोर उसे चुरा कर ले जाएँ?

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अशोक: मुझे तो लगता है अपने घर में और आसपास काम करने वालों से भी सावधान रहने की जरूरत है। क्या पता चोरों के साथ मिले हुए हों।

उमेश : सही कहते हो अशोक।रात को तो चौकीदार पहरा देता है और पुलिस की गाड़ी भी गश्त मारती रहती है लेकिन तब भी न जाने चोरों को कहाँ से भनक लगती है और चोरी कर के चम्पत हो जाते हैं।

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अशोक : अब पुलिस भी कहाँ-कहाँ देखे? हमें खुद भी थोडा चोकन्ना होने की जरुरत है।

उमेश : सही कह रहे हो मित्र जरा सा भी कुछ शक होने पर हमें तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए और अपने आसपास के जगहों पर सुरक्षा के साधनों का इंतजाम भी करना चाहिए।

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