नयी दिल्ली : देश भर में बैंकों और एटीएम के सामने लगी लंबी कतारों के बारे में कमेंट करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत एक विशाल देश है जिसकी जनसँख्या भी बहुत ज्यादा है. अरुण जेटली ने नोटबंदी पर कहा है कि आबादी बड़ी है तो लाइनें तो लगेंगी ही.

वित्त मंत्री ने कहा कि तमाम परेशानियों के बावजूद देशवासियों ने सरकार को सहयोग दिया है.

country-population-leading-to-long-lines-in-front-of-bank-jaitely-on-demonitization-queuesजेटली ने एचटी लीडरशिप समिट के दौरान बातचीत में विमुद्रीकरण या नोटबंदी के मुद्दे पर मोदी सरकार का पक्ष रखा. अरुण जेटली ने कहा कि सुरक्षा में नोटों की छपाई करने में समय लगता है और आरबीआई नोट जारी करने का काम लगातार कर रहा है.

जेटली ने कहा, “अगर आप इस देश के स्वभाव को देखें तो एक हिस्सा है जो आसानी से बदलाव को स्वीकार नहीं करता है. मुझे याद है कि हम एक वक्त इस बहस में काफी समय गंवाते थे कि भारत को रंगीन टीवी चाहिए या नहीं. 1996 में पार्टी की बैठक के लिए हमारी पार्टी ने सात मोबाईल फोन खरीदे तो मीडिया ने हमारे प्रस्तावों को रिपोर्ट नहीं किया. हां हमारा मज़ाक अवश्य उड़ाया गया. पंद्रह वर्ष पहले कोई भरोसा नहीं करता कि एक गरीब या दलित के हाथों में मोबाइल हो सकता है लेकिन आज यह एक सच्चाई है.”

इस अवसर पर बोलते हुए जेटली ने नोटबंदी के बारे में खुल कर अपनी राय रखी.

श्री जेटली ने कहा कि पिछले सात दशक में काफी काला धन इकट्ठा हुआ है. 30 दिसंबर के बाद नोटबंदी से जुड़ी परिस्थितियों का आंकलन किया जाएगा. नोटबंदी बड़ी प्रक्रिया है. इसमें गोपनीयता बनाए रखने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना था कि ज़रूरी जानकारी समय पर सभी को मिलती रहे.

यह भी पढ़िए  नोट बंदी का उत्तर प्रदेश चुनाव पर क्या है असर? किस पार्टी को होगा फायदा ?

हम देश को डिजिटल करेंसी की दिशा में ले जा रहे हैं. इससे औपचारिक कारोबार, व्यापार का दायरा बढ़ेगा, लेकिन काग़ज़ी मुद्रा कम हो जाएगी. देश में राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता आएगी. तकनीक को रोका नहीं जा सकता, अर्थव्यवस्था का डिजिटाइज़ेशन होकर रहेगा.

हिंदी वार्ता से जुडें फेसबुक पर-अभी लाइक करें