सपा, बसपा छोड़कर आने वालों को नहीं मिलेगा उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा का टिकट – केशव प्रसाद मौर्य

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने आज पार्टी कार्यकर्त्ताओं की आशंकाओं को शांत करने के मकसद से कहा कि हाल ही में अन्य दलों को छोड़कर भाजपा में आये नेताओं को भाजपा की और से विधान सभा चुनाव में टिकट नहीं मिलेगा.

dalbadalu up election BJP ticket keshav prasad maurya“बसपा और समाजवादी पार्टी को हाल ही में छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वाले किसी भी राजनेता को टिकट का वादा नहीं किया गया है. वे सभी लोग टिकट की आशा में नहीं बल्कि पार्टी के सिद्धान्तों और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक नेतृत्व से प्रभावित हो कर भाजपा में आये हैं.”- केशव प्रसाद मौर्य ने पीटीआई से एक इंटरव्यू के दौरान ये बातें कहीं.

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“जीतने योग्य प्रत्याशियों का ध्यान रखा जायेगा लेकिन यह कहना गलत होगा कि अन्य पार्टियों से आने वाले सभी व्यक्तियों को भाजपा का चुनावी टिकट मिल जायेगा.”

“मैं भाजपा कार्यकर्त्ताओं को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्त्ताओं के सम्मान का ध्यान किसी भी कीमत पर रखा जायेगा. भाजपा लोकतान्त्रिक पार्टी है और ऐसा नहीं होगा कि किसी एमएलए के बेटे का एमएलए बनना सुनिश्चित है. हमारी पार्टी में कोई भी कार्यकर्त्ता पार्टी के उच्चतम शिखर तक पहुँच सकता है.”

“पार्टी टिकट के असंख्य दावेदार हैं लेकिन हमें यकीन है कि पार्टी के अनुशासित सदस्य पार्टी के निर्णयों का सम्मान करेंगे.”

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में यूपी भाजपा अध्यक्ष मौर्य ने कहा “जब उन्होंने अध्यक्ष पद स्वीकार किया तब उन्हें आगामी विधान सभा चुनाव में २६५ सीटों का लक्ष्य दिया गया था. लेकिन गहन मंथन और गणना के पश्चात यह निष्कर्ष निकला कि भाजपा ३०० से काम सीट नहीं जीतेगी और अब यही हमारा उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए नारा भी है.”

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“विमुद्रीकरण पर उन्होंने कहा कि ९८% लोग सरकार के बड़े नोटबंदी के कदम से खुश हैं लेकिन युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले, किसानों का शोषण करने वाले और बुजुर्गों के हितों की अनदेखी करने वाले ही नोटबंदी के निर्णय से दुखी हैं.”

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“लेकिन भाजपा का सरोकार आम आदमी के हितों से है. प्रधान मंत्री मोदी का निर्णय देश हित में है. यह भ्रष्टाचार के विरोध में है और साथ ही यह भारत के दुश्मन पाकिस्तान के खिलाफ भी है.”

“जो काले धन के बल पर चुनाव जीतना चाह रहे थे, वे गहरी चिंता में हैं. नोट के बदले वोट खरीदने वालों का सपना टूट गया है.”

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