दिल्ली वर्ल्ड फ़ूड इंडिया मेला,इस मेले में 20 से ज़्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं

दिल्ली के इंडिया गेट पर इन दिनों वर्ल्ड फ़ूड इंडिया मेला चल रहा है.3 से 5 नवंबर तक चलने वाले इस मेले में 20 से ज़्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं,और भारत के 26 राज्यों के किसान, कंपनियां और कृषि से जुड़े कई सरकारी संस्थान ने हिस्सा लिया हैं.

देश के अलग अलग हिस्सों से लोगो ने हिस्सा लिया हैं. यहाँ पर अलग हिस्सों में मिलने वाली खाने की चीज़ों को देखने और जानने का अच्छा मौका है.इस मेले का मकसद भारत की फ़ूड इंडस्ट्री के कारोबार को बढ़ाना है, विश्व में भारत खाद्य उत्पादन में दूसरे नंबर पर आता है.

इस मेले का मकसद विश्व के कई देशों और भारत के राज्यों को एक साथ एक ही प्लेटफार्म पर लाना है, ताकि वो आपस में अपने कारोबार और निवेश को बढ़ा सकें.

मेले में तमिलनाडु से केले की 7 किस्में  प्रदर्शित की गई. इन सभी किस्मों में कोई ना कोई गुण है जो कई तरह के रोग ठीक कर सकता है.लोगो की जिज्ञासा लाल रंग के केले के बारे में जानने की जिज्ञासा नज़र आई .

अब तक दक्षिण भारत में ही ऐसी केले की फसल उगाई जाती है, एक कारोबारी के अनुसार उत्तर भारत में भी वो अपना कारोबार बढ़ाना चाहता ताकि यहाँ के लोगों को भी केले की ऐसी किस्में आसानी से मिल सकें.

राजस्थान से आए एक किसान के अनुसार उनका मक़सद है कि लोगों को क्वालिटी उत्पाद मिले और किसानों को उनका सही दाम. किसान के मुताबिक जो हल्दी और अदरक लाये हैं.

जिसकी खुशबू दिल्ली में मिलने वाली हल्दी या अदरक से अलग है. ये खुशबू दिल्ली में मिल पाना मुश्किल है.वो बाज़ार के दाम से कम कीमत पर वो अपना सामान बेचते हैं.

कुछ किसानो की  शिकायत भी है कि उन्हें सरकार से पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं नहीं मिल पति हैं .महाराष्ट्र की  महिलाओं ने घरेलू उत्पादों से अपना कारोबार खड़ा किया.

जिनमें से एक ऐसी रोटी जो 3 महीने तक भी ख़राब नहीं होती. इन महिलाओं ने घर रहकर ही अपना कारोबार खड़ा किया है. ये महिलाएं अपने कारोबार को दुनिया में फैलाना चाहती हैं.

मेले में मौजूद  ऐसी नई मोबाइल बस यूनिट हैं जो जगह-जगह जाकर मिलावट की जांच-पड़ताल करेगी.इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फूड प्रोसेसिंग की एक मोबाइल यूनिट भी हैं.

जो किसानों के उत्पाद को प्रोसेस करेगी. इस यूनिट की मदद से उनके प्याज़ और टमाटर की फसल को छांटना आसान होगा, ताकि उन्हें बेचने के लिए तैयार किया जा सके. इससे फसल की बरबादी  भी रोकी जा सकती हैं .

मोबाइल यूनिट से होगी मिलावट की जांच-पड़ताल. ज़्यादातर पंडाल कंसल्टेंसी सर्विस कंपनियों के हैं जो सरकारों को कृषि संबंधित योजनाओं में उनकी मदद करती हैं.