Advertisements

अपने को कभी कमजोर न समझो – शिक्षाप्रद कहानी

एक समय की घटना है कि बहुत बड़ी संख्या में खरगोश एक स्थान पर एकत्रित हुए और उन्होंने अपने कष्टपूर्ण जीवन के विषय में विचार-विमर्श किया।

Advertisements

अपने को कभी कमजोर न समझो - शिक्षाप्रद कहानी

”इस संसार के जितने भी जीव हैं,“ एक ने कहा – ”हम खरगोश उन सभी से अधिक कोमल हैं। हमें दूसरे सभी जानवरों तथा खूंखार पशु-पक्षियों से खतरा रहता है। हम सभी से भयभीत रहते हैं। हमसे कोई भी भयभीत नहीं होता। यहां तक कि मुनष्य भी हमारा मांस खाते हैं।“

Advertisements

तभी एक दूसरे खरगोश ने कहा- ”हाथी तो हमारा मांस नहीं खाते। मगर हममें से कई भाई अनगिनत बार इन हाथियों के पैरों तले कुचले गए हैं।“

तीसरे खरगोश ने कहा-”यह संसार हम जैसे दुर्बलों और लाचारों के लिए नहीं है। यहां केवल वही जीवित रह सकता है, जो शक्तिशाली हो। मुझे लगता है, हमारी समस्या का कोई हल नहीं है।“

तब एक वृद्ध सा दिखने वाला मगर अनुभवी खरगोश उठ खड़ा हुआ और कहने लगा- ”सुनो दोस्तो, हमारी समस्या का एक हल है। और यह हमारे सारे कष्टों को भी दूर कर देगा। हल यह है कि हम सभी सामूहिक रूप से नदी में कूद का आत्महत्या कर लें। मृत्यु हमारे सारे कष्टों को दूर कर देगी।“

यह सुझाव सभी खरगोशों को पसंद आ गया। वे सभी पास बहने वाली एक नदी के किनारे आत्महत्या करने के लिए जमा हो गए। मगर आत्महत्या करने की अफरा तफरी में उन्होंने इतना हो हल्ला किया कि नदी किनारे बैठा मेंढ़कों का एक झुंड बुरी तरह घबरा गया। सभी मेंढ़क भयभीत होकर पानी में कूदने लगे।

यह देखकर बूढ़े खरगोश ने अपने साथियों को नदी में कूदने से रोकते हुए कहा- ”मेरे भाइयो! में धैर्य रखना चाहिए और इस संसार में कुछ अधिक दिनों तक जीवित रहने का प्रयत्न करना चाहिए। हमें सोचना चाहिए कि कुछ ऐसे भी जीव हैं, जो हमसे भी अधिक दुर्बल हैं और हमसे डरते हैं। इस संसार में हर प्राणी किसी न किसी से डरता है।“

शिक्षा – अपने को कभी कमजोर न समझो।

Advertisements
Advertisements